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नदिया के बुनकर अभिनव बसाक को राष्ट्रपति पुरस्कार

SHIDDHANT
9 Aug 2026 12:23 AM IST
नदिया के बुनकर अभिनव बसाक को राष्ट्रपति पुरस्कार
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Bangal बंगाल। पश्चिम बंगाल के नदिया जिले के हथकरघा बुनकर अभिनव बसाक को पारंपरिक 500 काउंट जामदानी और रिंग मुसलिन बुनाई को पुनर्जीवित करने के लिए राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। यह सम्मान केवल अभिनव बसाक की व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि बंगाल के पूरे बुनकर समुदाय के लिए गौरव का विषय माना जा रहा है। अभिनव बसाक ने बताया कि उन्हें यह पुरस्कार 500 काउंट जामदानी मुसलिन धागे और मुसलिन बुनाई की पारंपरिक कला को फिर से जीवंत करने के प्रयास के लिए मिला है। उन्होंने कहा कि इस पारंपरिक कला को संरक्षित करने और उसे आधुनिक दौर में आगे बढ़ाने के लिए लंबे समय तक मेहनत करनी पड़ी।
उन्होंने बताया कि पुरस्कार पाने वाली साड़ी को तैयार करने में कुल करीब 2.5 वर्ष का समय लगा। इसमें लगभग 1.8 वर्ष केवल साड़ी की बुनाई में लगे। बेहद महीन धागे और पारंपरिक तकनीक के कारण इसकी बुनाई बेहद चुनौतीपूर्ण रही। इस साड़ी के निर्माण में करीब 1.8 लाख रुपये की लागत आई। अभिनव बसाक ने कहा कि यह सम्मान सिर्फ उनका नहीं है, बल्कि बंगाल के पूरे बुनकर समुदाय का है। उन्होंने कहा कि सदियों पुरानी बुनाई परंपराओं को बचाने और नई पीढ़ी तक पहुंचाने में कई बुनकर परिवारों का योगदान रहा है। ऐसे पुरस्कार पारंपरिक हथकरघा कला से जुड़े कारीगरों का उत्साह बढ़ाते हैं।
500 काउंट जामदानी और पारंपरिक रिंग मुसलिन अपनी बेहद महीन बुनाई, हल्केपन और जटिल डिजाइन के लिए पहचाने जाते हैं। इस तरह की बुनाई में कारीगरों को लंबे समय तक धैर्य और विशेषज्ञता के साथ काम करना पड़ता है। अभिनव बसाक के प्रयासों ने इस पारंपरिक कला को फिर से चर्चा में ला दिया है। उन्होंने कहा कि पारंपरिक हथकरघा को जीवित रखने के लिए कारीगरों को सम्मान और उचित पहचान मिलना जरूरी है। उनका मानना है कि नई पीढ़ी को भी इस कला से जोड़ना होगा, ताकि बंगाल की समृद्ध बुनाई परंपरा आगे भी जारी रहे। राष्ट्रपति पुरस्कार मिलने के बाद अभिनव बसाक की उपलब्धि ने नदिया के साथ-साथ पूरे पश्चिम बंगाल के हथकरघा क्षेत्र में खुशी का माहौल पैदा किया है।
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