
x
विजयवाड़ा। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने गुरुवार को कहा कि भारत वर्ष 2047 से पहले ही आत्मनिर्भर बनने की क्षमता रखता है। उन्होंने देश के विकास में ग्रामीण महिलाओं, स्वयं सहायता समूहों और महिला उद्यमियों की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया। राष्ट्रपति आंध्र प्रदेश के विजयवाड़ा स्थित पुन्नमी घाट पर आयोजित राष्ट्रीय सरस मेला-2026 को संबोधित कर रही थीं। इस दौरान उन्होंने कहा कि महिलाओं की आर्थिक भागीदारी और आत्मनिर्भरता देश को विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दे सकती है।
राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि राष्ट्रीय सरस मेला परंपरागत रूप से दिल्ली में आयोजित होता रहा है, लेकिन इस बार पहली बार इसका आयोजन आंध्र प्रदेश में किया जा रहा है। उन्होंने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजनों से ग्रामीण महिलाओं को अपनी प्रतिभा, कौशल और उत्पादों को व्यापक बाजार तक पहुंचाने का अवसर मिलता है।
ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक मजबूती पर दिया जोर
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने अपने संबोधन में कहा कि ग्रामीण महिलाएं देश की अर्थव्यवस्था और सामाजिक विकास का महत्वपूर्ण आधार हैं। कृषि, पशुपालन, हस्तशिल्प और छोटे व्यवसायों में उनकी भागीदारी लगातार बढ़ रही है। स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनने का अवसर मिल रहा है।
उन्होंने कहा कि स्वयं सहायता समूह महिलाओं के वित्तीय, तकनीकी और सामाजिक सशक्तिकरण का महत्वपूर्ण माध्यम बनकर उभरे हैं। इन समूहों से जुड़कर महिलाएं न केवल अपनी आय बढ़ा रही हैं, बल्कि परिवार और समाज से जुड़े आर्थिक निर्णयों में भी सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।
राष्ट्रपति ने कहा कि देश के समावेशी विकास के लिए महिलाओं की आर्थिक भागीदारी बढ़ाना आवश्यक है। ग्रामीण क्षेत्रों में महिला उद्यमिता को प्रोत्साहन मिलने से स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।
पहली बार दिल्ली-एनसीआर से बाहर राष्ट्रीय सरस मेला
विजयवाड़ा में आयोजित राष्ट्रीय सरस मेला-2026 कई मायनों में खास है। केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय और आंध्र प्रदेश सरकार के संयुक्त प्रयास से आयोजित यह मेला पहली बार दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र से बाहर आयोजित किया गया है।
पुन्नमी घाट पर 13 से 31 अक्टूबर तक चलने वाले इस आयोजन में देश के 30 से अधिक राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों की 1,500 से ज्यादा महिला उद्यमियों की भागीदारी निर्धारित है।
मेले में ग्रामीण हस्तशिल्प, हथकरघा उत्पाद, पारंपरिक वस्त्र, घरेलू उपयोग की वस्तुएं, जैविक उत्पाद और क्षेत्रीय व्यंजनों को प्रदर्शित किया जा रहा है। इसका प्रमुख उद्देश्य ग्रामीण उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराना और महिला उद्यमियों की आय बढ़ाने में सहायता करना है।
लखपति दीदियों से राष्ट्रपति ने किया संवाद
राष्ट्रीय सरस मेले के दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने विभिन्न स्टॉलों का अवलोकन किया और स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं तथा लखपति दीदियों से बातचीत की।
उन्होंने महिला उद्यमियों के प्रयासों की सराहना की और कहा कि महिलाओं की उद्यमशीलता देश की आर्थिक प्रगति के लिए महत्वपूर्ण है।
लखपति दीदी पहल का उद्देश्य स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं की आय में स्थायी वृद्धि सुनिश्चित करना है। इस पहल के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं को आजीविका गतिविधियों, छोटे व्यवसायों और उद्यमिता के अवसरों से जोड़ा जा रहा है।
राष्ट्रपति ने कहा कि महिलाओं को उचित प्रशिक्षण, संसाधन और बाजार उपलब्ध कराने से उनकी आर्थिक स्थिति को और मजबूत किया जा सकता है। महिलाओं की बढ़ती आत्मनिर्भरता का सकारात्मक प्रभाव उनके परिवारों और ग्रामीण समाज पर भी पड़ता है।
आंध्र प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत की सराहना
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने अपने संबोधन में आंध्र प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति को समृद्ध बनाने में आंध्र प्रदेश का महत्वपूर्ण योगदान रहा है।
उन्होंने तिरुमला के श्रीवेंकटेश्वर स्वामी मंदिर, कृष्णा नदी के किनारे विकसित अमरावती सभ्यता और उसकी प्रसिद्ध शिल्पकला का उल्लेख किया।
राष्ट्रपति ने कहा कि सरस मेले जैसे आयोजन पारंपरिक कला और शिल्प को आर्थिक अवसरों में बदलने का माध्यम बनते हैं। आंध्र प्रदेश की कलमकारी कला, कोंडपल्ली के लकड़ी के खिलौनों और उप्पडा जामदानी साड़ियों जैसे उत्पादों को ऐसे आयोजनों से व्यापक पहचान मिलती है।
इन पारंपरिक उत्पादों को आधुनिक बाजार से जोड़कर स्थानीय कारीगरों और महिला उद्यमियों के लिए स्थायी आजीविका के अवसर विकसित किए जा सकते हैं।
विकसित भारत के लक्ष्य में गांवों की महत्वपूर्ण भूमिका
राष्ट्रपति ने कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य हासिल करने के लिए विकास का लाभ प्रत्येक गांव और प्रत्येक परिवार तक पहुंचाना आवश्यक है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल बड़े शहरों और औद्योगिक क्षेत्रों का विकास पर्याप्त नहीं है। ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार, उद्यमिता और आर्थिक गतिविधियों का विस्तार भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
स्वयं सहायता समूह और सरस मेले इस दिशा में अग्रणी भूमिका निभा सकते हैं। इन माध्यमों से ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने तथा अपने उत्पादों के लिए नए बाजार तलाशने में सहायता मिलती है।
राष्ट्रपति ने इस बात पर भी जोर दिया कि ग्रामीण विकास में महिलाओं की भागीदारी को और प्रभावी बनाया जाना चाहिए।
आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को मिलेगा बल
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने राष्ट्रीय सरस मेले के आयोजन के लिए केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय और आंध्र प्रदेश सरकार की सराहना की। उन्होंने देशभर से आई स्वयं सहायता समूहों की सदस्यों और लखपति दीदियों को शुभकामनाएं दीं।
उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि महिला केंद्रित ग्रामीण विकास और उद्यमिता को बढ़ावा देने वाले प्रयास देश को आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे ले जाएंगे।
राष्ट्रपति ने कहा कि ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सक्षम बनाने के साथ प्रकृति के अनुकूल विकास को भी प्रोत्साहित करना जरूरी है। उन्होंने उम्मीद जताई कि राष्ट्रीय सरस मेला अपने उद्देश्यों में सफल होगा और ग्रामीण महिला उद्यमियों की भूमिका को और प्रभावी बनाएगा।
Next Story





