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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने लाल किला में दशहरा कार्यक्रम में आतंकवाद पर विजय का दिया संदेश
Shantanu Roy
2 Oct 2025 9:30 PM IST

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New Delhi. नई दिल्ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने लाल किला में आयोजित दशहरा पर्व के कार्यक्रम में भाग लिया और इस अवसर पर लोगों को बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश दिया। राष्ट्रपति ने कहा कि जैसे दशहरा पर्व पर रावण का दहन किया जाता है, वैसे ही हमें अपने भीतर की बुराइयों और आतंकवाद जैसे दानवों का नाश करना चाहिए। राष्ट्रपति ने विशेष रूप से भारतीय सेना द्वारा किए गए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का जिक्र किया और इसे आतंकवाद पर मानवता की विजय का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि आतंकवाद का दमन करना अनिवार्य है, क्योंकि जब दानव मानवता पर प्रहार करता है, तब समाज और राष्ट्र के लिए उसका सामना करना आवश्यक हो जाता है।
उन्होंने नागरिकों को अपने भीतर की नकारात्मक प्रवृत्तियों और बुराईयों को पहचानने और उनका नाश करने का संदेश दिया। राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि हर व्यक्ति के जीवन में अच्छाई और सत्य की जीत सुनिश्चित करने के लिए साहस और नैतिकता का पालन करना जरूरी है। कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने राष्ट्रपति के संदेश को बेहद प्रेरणादायक बताया। उन्होंने कहा कि यह संदेश न केवल व्यक्तिगत जीवन के लिए बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा और समाज में शांति स्थापित करने के लिए भी महत्वपूर्ण है। राष्ट्रपति ने अपने भाषण में यह भी बताया कि दशहरा केवल धार्मिक महत्व का पर्व नहीं है, बल्कि यह जीवन में नैतिक मूल्यों, साहस और न्याय की विजय का प्रतीक है। उन्होंने उपस्थित लोगों से अपील की कि वे अपने जीवन में बुराईयों और नकारात्मक प्रवृत्तियों के खिलाफ हमेशा खड़े रहें और समाज में सकारात्मक बदलाव लाएं। इस अवसर पर कार्यक्रम में विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी हुईं। बच्चों और युवाओं ने रावण दहन और रामलीला आधारित नाट्य प्रस्तुतियां दीं। यह कार्यक्रम भारतीय संस्कृति, परंपरा और सामाजिक मूल्य को उजागर करने वाला रहा। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कार्यक्रम के दौरान सुरक्षा बलों और आयोजकों के प्रयासों की भी सराहना की।
उन्होंने कहा कि इस तरह के आयोजन समाज में एकता, सहिष्णुता और सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करते हैं। अंत में, राष्ट्रपति ने उपस्थित लोगों को यह संदेश दिया कि जैसे दशहरा के दिन बुराई का अंत होता है, वैसे ही समाज और राष्ट्र में भी नकारात्मक तत्वों का सामना करने की आवश्यकता है। उनका मानना है कि प्रत्येक व्यक्ति अपने जीवन में अच्छाई को बढ़ावा देकर समाज में सकारात्मक बदलाव ला सकता है। इस प्रकार, लाल किला में आयोजित दशहरा समारोह ने न केवल धार्मिक उत्सव का अनुभव दिया, बल्कि आतंकवाद और बुराई के खिलाफ जागरूकता और नैतिक संदेश भी प्रस्तुत किया। राष्ट्रपति का यह भाषण देशवासियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना और दशहरा के महत्व को आधुनिक संदर्भ में भी उजागर किया।
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