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गगनयान मिशन की तैयारी तेज, ISRO ने क्रू और सर्विस मॉड्यूल अलग करने वाले सिस्टम का परीक्षण किया
jantaserishta.com
17 Oct 2026 12:21 PM IST

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नई दिल्ली: ISRO ने गगनयान मिशन के क्रू मॉड्यूल और सर्विस मॉड्यूल को अलग करने वाले सिस्टम के परीक्षण पूरे कर लिए हैं। तिरुवनंतपुरम स्थित विक्रम साराभाई स्पेस सेंटर में हुए इन परीक्षणों से सिस्टम के डिजाइन की क्षमता की पुष्टि हुई। गगनयान की पहली मानवरहित उड़ान G1 को 2026 में लॉन्च करने का लक्ष्य है। इस मिशन में अंतरिक्ष यात्रियों के बजाय तकनीकी प्रणालियों की कार्यक्षमता जांची जाएगी।
गगनयान मिशन के लिए ISRO ने पूरी की अहम टेस्टिंग
भारत के मानव अंतरिक्ष मिशन गगनयान की तैयारियों में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने क्रू मॉड्यूल (CM) और सर्विस मॉड्यूल (SM) को अलग करने वाले सिस्टम की टेस्टिंग पूरी कर ली है। इन परीक्षणों के बाद सिस्टम के डिजाइन की क्षमता की पुष्टि हुई है।
यह परीक्षण तिरुवनंतपुरम स्थित विक्रम साराभाई स्पेस सेंटर (VSSC) में किए गए। गगनयान मिशन में इस्तेमाल होने वाले ये दोनों मॉड्यूल अंतरिक्ष यान के अलग-अलग काम संभालते हैं। मिशन के दौरान एक समय ऐसा आता है, जब क्रू मॉड्यूल को सर्विस मॉड्यूल से अलग करना जरूरी होता है। ISRO का लक्ष्य गगनयान की पहली मानवरहित उड़ान G1 को वर्ष 2026 में लॉन्च करना है। इसे पहले ह्यूमन-रेटेड LVM3 रॉकेट के जरिए अंतरिक्ष में भेजने की योजना है।
गगनयान का ऑर्बिटल मॉड्यूल दो प्रमुख हिस्सों से मिलकर बनता है। इनमें क्रू मॉड्यूल वह हिस्सा है, जिसमें अंतरिक्ष यात्रियों को रखा जाएगा। वहीं, सर्विस मॉड्यूल मिशन के दौरान जरूरी सेवाएं उपलब्ध कराने का काम करता है।
लॉन्च से पहले दोनों मॉड्यूल को आपस में जोड़ा जाता है। इनके बीच बिजली और तरल पदार्थों की आपूर्ति के लिए विशेष कनेक्शन होते हैं। मिशन के दौरान दोनों हिस्से एक साथ काम करते हैं, लेकिन पृथ्वी पर लौटने से पहले इन्हें अलग करना जरूरी होता है। वापसी के समय क्रू मॉड्यूल सर्विस मॉड्यूल से अलग होकर पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करता है। इस दौरान उसे अत्यधिक गर्मी का सामना करना पड़ता है, इसलिए हीट शील्ड और थर्मल प्रोटेक्शन सिस्टम की भूमिका महत्वपूर्ण होती है।
मॉड्यूल अलग होने की प्रक्रिया में सभी कनेक्शन का सही क्रम में अलग होना भी जरूरी है। इसी वजह से सेपरेशन सिस्टम की विश्वसनीयता जांचना गगनयान की तैयारियों का अहम हिस्सा है।
परीक्षण में किन तकनीकों की जांच हुई?
ISRO ने सेपरेशन सिस्टम के डिजाइन की पुष्टि के लिए एक विशेष टेस्ट सेटअप तैयार किया था। इसमें क्रू मॉड्यूल और सर्विस मॉड्यूल की संयुक्त संरचना बनाई गई और पूरी प्रक्रिया पर नजर रखने के लिए बड़ी संख्या में उपकरण लगाए गए। ISRO के मुताबिक, परीक्षणों से सेपरेशन सिस्टम की क्षमता की पुष्टि हुई। इसके साथ ही क्रू मॉड्यूल के कई महत्वपूर्ण हिस्सों की मजबूती और झटके सहने की क्षमता भी जांची गई।
इनमें एवियोनिक्स सिस्टम, इनर्शियल नेविगेशन सिस्टम और मॉड्यूल के पिछले हिस्से में मौजूद शंकु के आकार की हीट शील्ड का थर्मल प्रोटेक्शन सिस्टम शामिल है। इसके अलावा क्रू मॉड्यूल में लगाए जाने वाले डिप्लॉयबल अंबिलिकल शील्ड की भी जांच की गई।
परीक्षण के दौरान क्रू मॉड्यूल को सही स्थिति में लाने वाले अप-राइटिंग सिस्टम और तापमान व नमी नियंत्रित करने वाली प्रणाली से जुड़े पाइरोटेक्निक उपकरणों को भी परखा गया। इन सभी व्यवस्थाओं का उद्देश्य मिशन के अलग-अलग चरणों में मॉड्यूल की सुरक्षा और कार्यक्षमता सुनिश्चित करना है।
सुरक्षित वापसी के लिए हीट शील्ड और पैराशूट अहम
गगनयान मिशन में केवल अंतरिक्ष तक पहुंचना ही लक्ष्य नहीं है, बल्कि अंतरिक्ष यात्रियों को सुरक्षित वापस लाना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। पृथ्वी के वायुमंडल में दोबारा प्रवेश के दौरान क्रू मॉड्यूल को तेज गर्मी से बचाने के लिए हीट शील्ड और थर्मल प्रोटेक्शन सिस्टम की जरूरत होती है।
वायुमंडल में प्रवेश के बाद पैराशूट मॉड्यूल की गति कम करने में मदद करेंगे, ताकि समुद्र में उतरने के समय सुरक्षित रिकवरी की जा सके। जुलाई 2026 में ISRO ने क्रू मॉड्यूल के पैराशूट और अन्य सुरक्षा प्रणालियों से संबंधित परीक्षणों की जानकारी दी थी। समुद्र में उतरने के बाद मॉड्यूल को सही स्थिति में बनाए रखने के लिए अप-राइटिंग सिस्टम भी विकसित किया गया है। जुलाई 2026 में इससे जुड़े फ्लोटेशन सिस्टम का परीक्षण भी किया गया था।
इसके अलावा, उड़ान के दौरान गंभीर आपात स्थिति पैदा होने पर अंतरिक्ष यात्रियों को बचाने के लिए क्रू एस्केप सिस्टम बनाया गया है। अक्टूबर 2023 में ISRO ने TV-D1 परीक्षण के जरिए इस सिस्टम की उड़ान के दौरान कार्यक्षमता जांची थी।
2026 में मानवरहित उड़ान, आगे अंतरिक्ष यात्रियों को भेजने की योजना
गगनयान मिशन के तहत पहले मानवरहित उड़ानों के जरिए अंतरिक्ष यान की विभिन्न प्रणालियों की जांच की जाएगी। G1 मिशन में मानव यात्रियों के बजाय तकनीकी व्यवस्थाओं की क्षमता परखी जाएगी। इस मिशन की योजना में व्योममित्र नाम के अर्ध-मानवाकार रोबोट को भी शामिल किया गया है।
योजना के अनुसार, अंतरिक्ष यात्रियों को भेजने से पहले दो मानवरहित परीक्षण उड़ानें होंगी और तीसरी उड़ान में रोबोट को भेजने की योजना है। इन चरणों की सफलता के बाद मानवयुक्त उड़ान का रास्ता तैयार होगा। गगनयान कार्यक्रम के तहत वर्ष 2027 में वायुसेना के तीन पायलटों को अंतरिक्ष में भेजने की योजना बताई गई है। वे लगभग 400 किलोमीटर की कक्षा में तीन दिन बिताएंगे और इसके बाद अंतरिक्ष यान की हिंद महासागर में लैंडिंग कराई जाएगी। मिशन की अनुमानित लागत करीब 20,193 करोड़ रुपये है।
इसके लिए वायुसेना के चार पायलट चुने गए हैं, जिनमें ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला भी शामिल हैं। वह एक्सियम मिशन के तहत अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन की यात्रा कर चुके हैं।
क्रू और सर्विस मॉड्यूल को अलग करने वाले सिस्टम की टेस्टिंग पूरी होना गगनयान कीतैयारियों का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। आगे की उड़ानों में इन प्रणालियों की कार्यक्षमता और सुरक्षा से जुड़ी तैयारियों की जांच की जाएगी।
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