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CM भगवंत मान के बहिष्कार वाले पोस्टर लगे, अकाल तख्त के आदेश का हवाला

Shantanu Roy
24 Jun 2026 5:20 PM IST
CM भगवंत मान के बहिष्कार वाले पोस्टर लगे, अकाल तख्त के आदेश का हवाला
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हवाला देकर हुआ सियासी संग्राम
Punjab. पंजाब। पंजाब में मुख्यमंत्री भगवंत मान को लेकर सियासी विवाद लगातार गहराता जा रहा है। श्री अकाल तख्त साहिब द्वारा जारी कथित आदेश के हवाले से राज्य के कई हिस्सों में मुख्यमंत्री भगवंत मान के सामाजिक बहिष्कार संबंधी पोस्टर लगाए गए हैं। बठिंडा के तलवंडी साबो, पटियाला के नाभा, मोगा समेत कई शहरों और कस्बों में लगे इन पोस्टरों ने राज्य की राजनीति को और गर्मा दिया है। पोस्टरों में सिख समुदाय से मुख्यमंत्री भगवंत मान का सामाजिक बहिष्कार करने की अपील की गई है। बताया जा रहा है कि इस अभियान को
शिरोमणि अकाली दल
के कार्यकर्ता आगे बढ़ा रहे हैं। हाल ही में शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) ने अमृतसर में ढाढी जत्थों, कविश्रों और विभिन्न धार्मिक संगठनों की बैठक आयोजित की थी, जिसमें अकाल तख्त के निर्णय को व्यापक स्तर पर प्रचारित करने की बात कही गई थी।

पूरा विवाद एक कथित बेअदबी वीडियो को लेकर शुरू हुआ है। अकाल तख्त ने इस वीडियो को सही बताया है, जबकि मुख्यमंत्री भगवंत मान लगातार इस दावे को खारिज कर रहे हैं। मुख्यमंत्री का कहना है कि वायरल वीडियो में दिखाई देने वाला व्यक्ति वह नहीं हैं और राजनीतिक विरोधियों द्वारा उन्हें बदनाम करने के लिए यह साजिश रची गई है। बुधवार को जारी एक वीडियो संदेश में भगवंत मान ने कहा कि उनके खिलाफ फर्जी वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित किए जा रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि वीडियो में दिख रहा व्यक्ति न तो उनकी तरह दिखता है और न ही उसकी चाल-ढाल उनसे मेल खाती है। मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि राजनीतिक विरोधी कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) तकनीक का उपयोग कर उन्हें बदनाम करने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि पंजाब में हो रहे विकास कार्यों को देखकर विपक्ष परेशान है और इसी कारण इस तरह के हथकंडे अपनाए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि वह लोगों के बीच रहकर काम करते रहेंगे और ऐसे आरोपों से विचलित नहीं होंगे।

इस बीच मामला और गंभीर तब हो गया जब हरियाणा पुलिस ने कथित फर्जी फॉरेंसिक रिपोर्ट तैयार करने के आरोप में दो लोगों को गिरफ्तार कर लिया। आरोप है कि वायरल वीडियो को लेकर तैयार की गई रिपोर्ट में तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया था। हालांकि इस मामले की जांच अभी जारी है और कई पहलुओं की पड़ताल की जा रही है। विपक्षी दलों ने इस मुद्दे को लेकर आम आदमी पार्टी सरकार पर तीखा हमला बोला है। भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस दोनों ने मुख्यमंत्री भगवंत मान से जवाब मांगा है। कांग्रेस ने तो मुख्यमंत्री के इस्तीफे और गिरफ्तारी तक की मांग कर दी है। भाजपा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट साझा करते हुए दावा किया कि अकाल तख्त के आदेश के बाद पंजाब पुलिस के कुछ अधिकारियों ने गुरुग्राम में एक फॉरेंसिक लैब से संपर्क कर कथित तौर पर रिपोर्ट को प्रभावित करने का प्रयास किया। भाजपा ने दावा किया कि गुरुग्राम के एक होटल में हुई बैठक की सीसीटीवी फुटेज भी सामने आई है।

भाजपा ने आरोप लगाया कि पूरी प्रक्रिया के माध्यम से अकाल तख्त के आदेश को चुनौती देने और सच्चाई को दबाने की कोशिश की गई। पार्टी का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। दूसरी ओर आम आदमी पार्टी और मुख्यमंत्री भगवंत मान इन आरोपों को पूरी तरह राजनीति से प्रेरित बता रहे हैं। पार्टी का कहना है कि विपक्ष जनता का ध्यान असली मुद्दों से भटकाने के लिए विवाद खड़ा कर रहा है। फिलहाल इस पूरे मामले ने पंजाब की राजनीति में नया तूफान खड़ा कर दिया है। एक ओर धार्मिक और सामाजिक संगठनों की प्रतिक्रिया सामने आ रही है, वहीं दूसरी ओर राजनीतिक दल इसे लेकर आमने-सामने हैं। आने वाले दिनों में जांच की दिशा और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं इस विवाद को और अधिक प्रभावित कर सकती हैं। राज्य में लगे बहिष्कार संबंधी पोस्टरों और वायरल वीडियो विवाद के बीच राजनीतिक माहौल लगातार गरमाता जा रहा है। अब सभी की नजरें जांच एजेंसियों की कार्रवाई और आगामी राजनीतिक घटनाक्रम पर टिकी हुई हैं।
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