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CEC विरोध पर राजनीति: बंगाल और बिहार के बीजेपी नेताओं ने विपक्ष को घेरा
Tara Tandi
3 Oct 2026 11:50 AM IST

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नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल और बिहार में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष के विरोध प्रदर्शन पर निशाना साधा है। उन्होंने INDIA ब्लॉक पर चुनावों से पहले गुमराह करने वाला प्रचार फैलाने और मीडिया का ध्यान खींचने की कोशिश करने का आरोप लगाया है।
पश्चिम बंगाल के मंत्री दिलीप घोष ने कहा कि विपक्ष चुनाव आयोग का मुद्दा इसलिए उठा रहा है क्योंकि कई राज्यों में चुनाव होने वाले हैं, और बंगाल में भी नगर निगम चुनावों के लिए किसी मुद्दे की ज़रूरत है।
घोष ने दावा किया, "देश में कई राज्यों में चुनाव होने वाले हैं, इसलिए उससे पहले INDIA गठबंधन अचानक सामने आ जाता है। बंगाल में नगर निगम के चुनाव हो रहे हैं, इसलिए उन्हें एक मुद्दे की ज़रूरत है। लेकिन न तो देश में और न ही बंगाल में उनके पास कोई असली मुद्दा बचा है। वे बस मीडिया का ध्यान खींचने के लिए बेतुके बयान दे रहे हैं, और कुछ नहीं।"
उन्होंने CEC ज्ञानेश कुमार का बचाव करते हुए कहा कि वह एक संवैधानिक पद पर हैं और विपक्ष को इसके बजाय चुनावों की तैयारी करनी चाहिए और जनता का समर्थन हासिल करना चाहिए।
उन्होंने कहा, "चुनाव होंगे, नतीजे आएंगे, वे हारेंगे और शोर मचाते रहेंगे। ज्ञानेश कुमार संवैधानिक पद पर हैं, उन्हें हटाने की हिम्मत किसी में नहीं है। आप जनता के पास जाएं, चुनावों की तैयारी करें, वरना आपको वही नतीजा मिलेगा जो पहले मिला था।"
घोष की ये टिप्पणियां मतदाता सूची में संशोधन को लेकर विपक्ष और चुनाव आयोग के बीच बढ़ते राजनीतिक टकराव के बीच आई हैं। उन्होंने पहले भी INDIA ब्लॉक की एकता पर सवाल उठाए हैं और दावा किया है कि इसके घटक दल एक-दूसरे का सम्मान नहीं करते हैं।
इस बीच, बिहार के मंत्री दिलीप जायसवाल ने भी CEC के खिलाफ विपक्ष के विरोध प्रदर्शन को लेकर कांग्रेस की आलोचना की।
जायसवाल ने IANS से कहा, "कांग्रेस सत्ता के लिए बेताब हो गई है। गुमराह करने वाला प्रचार फैलाकर वह चुनाव आयोग के खिलाफ पूरे देश को अस्थिर करना चाहती है।"
जायसवाल ने आरोप लगाया, "सत्ता के लिए यह पागलपन और देश-विरोधी ताकतों के साथ भी हाथ मिलाना अब कांग्रेस की पहचान बन गई है।"
ये टिप्पणियां ऐसे समय में आई हैं जब INDIA ब्लॉक, छात्र संगठनों और नागरिक समाज समूहों ने मतदाता सूची में संशोधन को लेकर CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करते हुए प्रदर्शन किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि वोटर लिस्ट से योग्य वोटरों के नाम हटाए जा रहे हैं, जबकि केंद्र और बीजेपी ने चुनाव आयोग का बचाव करते हुए इन आरोपों को खारिज कर दिया है।
देश की राजधानी में कांग्रेस, आम आदमी पार्टी, वामपंथी दलों और राष्ट्रीय जनता दल के सदस्य जंतर-मंतर पर इकट्ठा होने की कोशिश कर रहे थे। इलाके में धारा 163 लागू थी और दिल्ली पुलिस ने 1,100 से ज़्यादा प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया, जिनमें वरिष्ठ वामपंथी नेता एम.ए. बेबी और वृंदा करात भी शामिल थीं।
INDIA ब्लॉक ने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफ़े की मांग की है और वोटर लिस्ट के 'स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न' (SIR) पर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि SIR के दौरान चुनाव आयोग ने ड्राफ़्ट लिस्ट से नाम हटाकर 13 करोड़ से ज़्यादा भारतीयों को वोट देने के अधिकार से वंचित कर दिया है। विपक्ष ने वोटर लिस्ट में सुधार की प्रक्रिया में बदलाव और नाम हटाए जाने के ख़िलाफ़ वोटरों के लिए अपील करने का एक असरदार तरीका बनाने की भी मांग की है।
वहीं, बीजेपी ने चुनाव आयोग के ख़िलाफ़ विपक्ष के आरोपों को खारिज कर दिया है और अपने राजनीतिक विरोधियों पर चुनाव आयोग को निशाना बनाने का आरोप लगाया है। कई राज्यों में होने वाले चुनावों से पहले यह विवाद एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गया है।
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