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विपक्ष के रुख पर टिकी निगाहें
Delhi दिल्ली: संसद के आगामी मॉनसून सत्र से पहले परिसीमन (Delimitation) को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि यदि सरकार भविष्य में परिसीमन से संबंधित संवैधानिक संशोधन विधेयक लाती है, तो उसे संसद में आवश्यक बहुमत जुटाने की चुनौती का सामना करना होगा। इसी बीच विभिन्न विपक्षी दलों के संभावित रुख को लेकर भी अटकलें लगाई जा रही हैं।
चर्चा का केंद्र यह है कि लोकसभा में दो-तिहाई बहुमत के आंकड़े तक पहुंचने के लिए राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) को अतिरिक्त समर्थन की आवश्यकता पड़ सकती है। इसी संदर्भ में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के कुछ हालिया बयानों को लेकर राजनीतिक विश्लेषण किए जा रहे हैं। ऐसी अटकलें हैं कि पार्टी परिसीमन से जुड़े किसी प्रस्ताव पर सकारात्मक रुख अपना सकती है, हालांकि इस संबंध में कोई औपचारिक घोषणा नहीं हुई है।
दूसरी ओर, तमिलनाडु की सत्तारूढ़ डीएमके पहले से ही परिसीमन के मुद्दे पर अपनी चिंताएं सार्वजनिक रूप से व्यक्त करती रही है। ऐसे में यदि भविष्य में इस विषय पर कोई संवैधानिक संशोधन विधेयक संसद में लाया जाता है, तो विभिन्न क्षेत्रीय दलों की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
मॉनसून सत्र के दौरान सरकार और विपक्ष के बीच इस मुद्दे पर व्यापक चर्चा होने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, केंद्र सरकार ने अभी तक परिसीमन से संबंधित किसी विशेष संविधान संशोधन विधेयक को मॉनसून सत्र में पेश करने की आधिकारिक घोषणा नहीं की है। ऐसे में फिलहाल परिसीमन को लेकर राजनीतिक बयानबाजी और संभावित समीकरणों पर चर्चा जारी है। वास्तविक स्थिति संसद में सरकार द्वारा लाए जाने वाले विधेयकों और विभिन्न दलों के आधिकारिक रुख के बाद ही स्पष्ट होगी।
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