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नशे के नेटवर्क पर पुलिस का वार, सिंगर को लेकर चौंकाने वाला खुलासा
jantaserishta.com
11 Feb 2026 2:19 PM IST

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खन्ना: पंजाब में नशे के खिलाफ चल रही मुहिम के बीच खन्ना पुलिस को ऑपरेशन प्रहार-2 के तहत एक बड़ी सफलता मिली है. इस कार्रवाई ने एक ऐसे नाम को फिर सुर्खियों में ला दिया, जो कभी मंचों पर गाना गाती थी, लेकिन अब आरोप है कि वह नशा तस्करी के नेटवर्क का हिस्सा बन गई. माछीवाड़ा साहिब क्षेत्र में पुलिस ने कार्रवाई करते हुए पंजाबी सिंगर परमजीत कौर पम्मी और उसके भाई सरवन सिंह मिर्जा को हेरोइन समेत गिरफ्तार किया.
यह कहानी उस गिरते सफर की है, जिसमें शोहरत, विवाद, जेल, जमानत और फिर दोबारा अपराध के आरोप जुड़ते चले गए. पंजाब सरकार के निर्देशों पर डीजीपी और डीआईजी लुधियाना रेंज की निगरानी में ऑपरेशन प्रहार-2 शुरू किया गया. इसका मकसद था- नशा तस्करों, गैंगस्टर नेटवर्क और उनके सहयोगियों पर एक साथ कार्रवाई.
खन्ना पुलिस ने हेल्पलाइन इनपुट, लोकल इंटेलिजेंस और सर्विलांस के आधार पर संवेदनशील इलाकों की लिस्ट तैयार की. पहले ही दिन 125 से ज्यादा संदिग्ध और असामाजिक तत्वों को काबू किया गया.
कई गिरफ्तारियां हुईं, कई लोगों के खिलाफ रोकथाम कार्रवाई की गई. दो बड़े पैडलर, एक प्रमुख तस्कर और गैंगस्टर सहयोगी भी पकड़े गए. इसी कड़ी में सबसे चर्चित गिरफ्तारी रही- परमजीत कौर पम्मी और उसके भाई की.
पुलिस जांच में सामने आया कि परमजीत कौर पम्मी और उसका भाई खेतों के बीच एक डेरा बनाकर गतिविधियां चला रहे थे. यह जगह आम नजरों से दूर थी. आरोप है कि यहां लोगों का आना-जाना लगा रहता था, खास दिनों में भीड़ जुटती थी, और वहीं से नशे की सप्लाई का काम संचालित होता था.
स्थानीय लोगों की शिकायतें लंबे समय से पुलिस तक पहुंच रही थीं. ठोस इनपुट और सही समय का इंतजार किया जा रहा था. जैसे ही पुख्ता सूचना मिली, टीम ने छापा मारा और दोनों को काबू कर लिया. तलाशी में करीब 8 ग्राम हेरोइन बरामद होने की बात सामने आई.
परमजीत कौर पम्मी का नाम इलाके में नया नहीं है. वह पहले पंजाबी म्यूजिक सर्किट से जुड़ी रही है. सिंगिंग प्रोग्राम, स्टेज शो और रिकॉर्डिंग से उसने पहचान बनाई थी. इलाके में लोग उसे सिंगर पम्मी के नाम से जानते थे. पिछले कुछ वर्षों में उसका नाम कला से ज्यादा आपराधिक मामलों में चर्चा में आने लगा.
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, 2023 में परमजीत कौर पम्मी के खिलाफ नशा तस्करी से जुड़े एक मामले में केस दर्ज हुआ था. उस केस में ड्रग ओवरडोज के कारण एक युवक की मौत हुई थी. जांच के बाद उस पर गैर इरादतन हत्या और एनडीपीएस एक्ट की धाराएं लगाई गई थीं.
उसे गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था और उसने महिला जेल में समय भी काटा. बाद में वह जमानत पर बाहर आ गई. पुलिस का दावा है कि जमानत के बाद उसने अपनी गतिविधियां बंद नहीं कीं, बल्कि फिर से नेटवर्क सक्रिय कर लिया.
ताजा कार्रवाई में उसका भाई सरवन सिंह मिर्जा भी साथ पकड़ा गया. पुलिस का कहना है कि दोनों मिलकर काम कर रहे थे. सप्लाई, संपर्क और स्थानीय स्तर पर वितरण का काम परिवार के स्तर पर ही संचालित हो रहा था. जांच एजेंसियां अब यह भी खंगाल रही हैं कि क्या इनके नेटवर्क के तार बड़े सप्लायरों या क्षेत्रीय गिरोहों से भी जुड़े हैं.
एसएसपी डॉ. दर्पण आहलूवालिया ने बताया कि यह कार्रवाई हेल्पलाइन इनपुट पर आधारित थी. सेव पंजाब हेल्पलाइन और एंटी गैंगस्टर हेल्पलाइन पर मिली सूचनाओं को क्रॉस वेरिफाई किया गया. उसके बाद सर्च और रेड की प्लानिंग हुई.
पुलिस का कहना है कि आम लोगों से मिल रही सूचनाएं अब ऑपरेशन का बड़ा आधार बन रही हैं. कई हॉटस्पॉट ऐसे चिह्नित हुए हैं, जो पहले रिकॉर्ड में नहीं थे. इस ऑपरेशन की खास बात सिर्फ छापेमारी नहीं, बल्कि हॉटस्पॉट अडॉप्शन मॉडल भी है. खन्ना पुलिस और सिविल प्रशासन ने मिलकर ड्रग प्रभावित इलाकों को चिह्नित कर उन्हें गोद लेने की योजना शुरू की है.
मीट मार्केट क्षेत्र में फ्लैग मार्च किया गया. वहां सफाई अभियान, सैनिटेशन सुधार, स्कूल, ड्रॉपआउट बच्चों की पहचान, दस्तावेज बनवाकर दाखिला, सेल्फ हेल्प ग्रुप गठन, मोटिवेशनल बोर्ड और जागरूकता संदेश जैसी पहल शुरू की गई है.
एसएसपी ने साफ कहा कि नशे और गैंगस्टर नेटवर्क के खिलाफ लड़ाई सिर्फ पुलिस नहीं जीत सकती. इसमें जनता, मीडिया और एनजीओ का सहयोग जरूरी है. उन्होंने अपील की कि लोग डरें नहीं, हेल्पलाइन पर सूचना दें. पहचान गोपनीय रखी जाएगी.
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