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‘त्राथ गोला’ के सौदे में पुलिस का एक्शन 5 लाख कैश, 7 गिरफ्तार

SHIDDHANT
5 Sept 2026 7:53 PM IST
‘त्राथ गोला’ के सौदे में पुलिस का एक्शन 5 लाख कैश, 7 गिरफ्तार
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शोपियां पुलिस ने पकड़ा दुर्लभ पत्थर का फर्जी सौदा दो वाहन भी जब्त
Shrinagar श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर के शोपियां जिले में पुलिस ने कथित दुर्लभ उल्कापिंड पत्थर यानी ‘त्राथ गोला’ के लेन-देन से जुड़े मामले में बड़ी कार्रवाई की है। पुलिस ने इस मामले में सात लोगों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से 7 लाख रुपये नकद बरामद किए गए हैं। पुलिस ने संदिग्ध पत्थर को भी अपने कब्जे में लिया है, जिसे कथित तौर पर बेहद कीमती और दुर्लभ उल्कापिंड बताया जा रहा था। पुलिस के अनुसार, शोपियां पुलिस को सूचना मिली थी कि कुछ लोग ‘त्राथ गोला’ नाम के पत्थर की खरीद-बिक्री को लेकर संदिग्ध लेन-देन कर रहे हैं। इसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए संबंधित स्थान पर दबिश दी और सात लोगों को हिरासत में ले लिया।
गिरफ्तार किए गए सभी आरोपियों को पूछताछ और आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए हीरपोरा पुलिस स्टेशन लाया गया। पुलिस ने बताया कि मामले की जांच जारी है और लेन-देन से जुड़े सभी पहलुओं की पड़ताल की जा रही है। पुलिस की शुरुआती जांच में मौके से एक बॉक्स बरामद हुआ, जिसमें एक पत्थर रखा था। इस पत्थर को आरोपी कथित तौर पर दुर्लभ और मूल्यवान उल्कापिंड बताकर पेश कर रहे थे। इसके अलावा पुलिस ने मौके से 5 लाख रुपये नकद भी बरामद किए हैं।
जांच के दौरान पुलिस ने दो वाहनों को भी जब्त कर आगे की जांच के लिए हीरपोरा थाने लाया है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस पूरे नेटवर्क में कितने लोग शामिल हैं और क्या इससे पहले भी इस तरह के सौदे किए गए हैं। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान जहूर अहमद भट, सफीरुद्दीन मीर, अब्दुल रशीद किरमानी, मोहम्मद शफी मीर, इम्तियाज अहमद बकलू, अर्शीद अहमद वानी और सैयद गुलजार अहमद के रूप में हुई है। ये सभी जम्मू-कश्मीर के अलग-अलग इलाकों के रहने वाले बताए गए हैं।
इस मामले में हीरपोरा पुलिस स्टेशन में संबंधित कानूनी धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की गई है। पुलिस अब बरामद पत्थर की वास्तविकता और उसकी जांच को लेकर विशेषज्ञों से भी जानकारी लेने की तैयारी कर रही है। पुलिस ने आम लोगों को भी ऐसे मामलों में सतर्क रहने की अपील की है। अधिकारियों ने कहा कि कई बार दुर्लभ पत्थर, उल्कापिंड या कीमती वस्तुओं के नाम पर लोगों को धोखाधड़ी का शिकार बनाया जाता है। इसलिए किसी भी महंगी वस्तु की खरीद-बिक्री से पहले उसकी प्रमाणिकता की जांच जरूर करानी चाहिए।
फिलहाल पुलिस पूरे मामले की गहन जांच में जुटी है। जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि बरामद पत्थर वास्तव में उल्कापिंड है या फिर लोगों को ठगने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा कोई सामान्य पत्थर।
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