भारत
छात्रों पर पुलिस कार्रवाई लोकतंत्र के लिए चिंताजनक: मौलाना जावेद हैदर ज़ैदी
Shantanu Roy
20 July 2026 11:55 PM IST

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शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा दें
Lucknow. लखनऊ। दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के समर्थन में आयोजित छात्र-युवा प्रदर्शन के दौरान पुलिस द्वारा बल प्रयोग की घटनाओं पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए प्रसिद्ध शिया इस्लामिक विद्वान एवं सामाजिक चिंतक मौलाना जावेद हैदर ज़ैदी ने गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में शांतिपूर्ण ढंग से अपनी बात रखना प्रत्येक नागरिक का संवैधानिक अधिकार है और किसी भी प्रकार का अत्यधिक बल प्रयोग लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप नहीं माना जा सकता।
मौलाना जावेद हैदर ज़ैदी ने कहा कि देश का छात्र आज अपने भविष्य, शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, निष्पक्ष अवसरों तथा जवाबदेही की मांग कर रहा है। ऐसे समय में सरकार का दायित्व संवाद स्थापित करना और समस्याओं का समाधान करना है, न कि विरोध कर रहे छात्रों के प्रति कठोर रवैया अपनाना। उन्होंने कहा कि यदि शिक्षा व्यवस्था को लेकर देशभर में व्यापक असंतोष दिखाई दे रहा है तो केंद्र सरकार को इस विषय पर गंभीरता से आत्ममंथन करना चाहिए। लोकतंत्र की शक्ति संवाद, संवैधानिक मूल्यों और जनता के विश्वास में निहित है, न कि दमनात्मक उपायों में।
मौलाना ज़ैदी ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था से जुड़े विवादों और छात्रों के बढ़ते असंतोष की नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार करते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए। उनका कहना था कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में संवैधानिक पदों पर बैठे व्यक्तियों की जवाबदेही केवल प्रशासनिक नहीं बल्कि नैतिक भी होती है। उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की कि छात्रों की शिकायतों पर गंभीरता से विचार किया जाए, पुलिस कार्रवाई की निष्पक्ष जांच कराई जाए तथा यह सुनिश्चित किया जाए कि भविष्य में किसी भी शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक प्रदर्शन के दौरान अनावश्यक बल प्रयोग न हो। मौलाना जावेद हैदर ज़ैदी ने कहा कि देश का भविष्य युवाओं के हाथों में है। यदि छात्रों की आवाज़ को सुना जाएगा तो लोकतंत्र और अधिक मजबूत होगा, जबकि असहमति को बलपूर्वक दबाने का प्रयास लोकतांत्रिक संस्थाओं पर जनता के विश्वास को कमजोर कर सकता है।
अपने संदेश के अंत में उन्होंने कहा- "लोकतंत्र में सत्ता की सबसे बड़ी ताकत जनता का विश्वास होता है। सरकार को चाहिए कि वह छात्रों की आवाज़ सुने, संवाद का रास्ता अपनाए और शिक्षा व्यवस्था में आवश्यक सुधारों के लिए ठोस एवं पारदर्शी कदम उठाए। यही संविधान की भावना और राष्ट्रहित के अनुरूप है।
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