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जहर बिक रहा! केमिकल से फल पकाया तो होगी कार्रवाई, FSSAI ने सख्त रुख अपनाया
jantaserishta.com
17 April 2026 11:49 AM IST

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हो सकती हैं गंभीर बीमारियां.
नई दिल्ली: FSSAI ने फलों को कृत्रिम तरीके से पकाने को लेकर सख्त कदम उठाए हैं. 16 अप्रैल 2026 को जारी निर्देश में साफ कहा गया है कि खतरनाक केमिकल्स के जरिए फलों को पकाना पूरी तरह गैरकानूनी है और अब इस पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी. खासतौर पर कैल्शियम कार्बाइड जैसे जहरीले पदार्थों के इस्तेमाल पर पूरी तरह रोक है. बता दें कि कई जगहों पर फलों को पकाने के लिए कैल्शियम कार्बाइड का उपयोग किया जा रहा था, जिस पर अब सख्ती बढ़ा दी गई है.
भारत सरकार की खाद्य सुरक्षा संस्था (FSSAI) ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के खाद्य सुरक्षा आयुक्तों, क्षेत्रीय निदेशकों और लाइसेंसिंग अधिकारियों को चेतावनी दी है कि आम, केला, पपीता समेत अन्य फलों को पकाने के लिए कैल्शियम कार्बाइड (जिसे बाजार में 'मसाला' के नाम से जाना जाता है) का इस्तेमाल बिल्कुल वर्जित है.
FSSAI ने अपने पुराने निर्देशों को दोहराते हुए कहा है कि कैल्शियम कार्बाइड से पके फल खाने से गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं. इनमें निगलने में तकलीफ, उल्टी, पेट दर्द और त्वचा पर अल्सर (घाव) जैसी शिकायतें शामिल हैं. दरअसल, यह पदार्थ फलों पर लगाने से उनमें जहरीली गैस निकलती है जो इंसान के लिए खतरनाक है.
नोटिस में स्पष्ट किया गया है कि फलों को सीधे एथेफॉन घोल में डुबोकर पकाना अवैध है. FSSAI की गाइडलाइन के अनुसार, एथिलीन गैस का इस्तेमाल तो किया जा सकता है, लेकिन फलों या सब्जियों के साथ उसका सीधा संपर्क (पाउडर या लिक्विड रूप में) पूरी तरह प्रतिबंधित है.
बाजारों और गोदामों में बढ़ेगी छापेमारी
FSSAI ने सभी राज्यों से कहा है कि फल मंडियों, स्टोरेज गोदामों, थोक विक्रेताओं और डिस्ट्रीब्यूटर्स पर नजर रखी जाए.
मौसमी फलों (खासकर आम के मौसम में) जहां 'मसाला' का शक हो, वहां विशेष अभियान चलाए जाएं.
अगर किसी जगह कैल्शियम कार्बाइड, मोम या नकली रंग मिले तो तुरंत कार्रवाई की जाए.
कैल्शियम कार्बाइड मिलने पर FSS Act की धारा 59 के तहत मुकदमा दर्ज किया जा सकता है.
एसीटिलीन गैस की जांच के लिए स्ट्रिप पेपर टेस्ट का इस्तेमाल किया जाए.
FSSAI के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर डॉ. अमित शर्मा ने साफ कहा है कि अवैध तरीके से फल पकाने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई होगी. लोगों के स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए यह कदम उठाया गया है.
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