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25 साल की सेवा यात्रा पर पीएम मोदी का बड़ा संकल्प, बोले- “वी विल डू इट”

jantaserishta.com
7 Oct 2026 3:36 PM IST
25 साल की सेवा यात्रा पर पीएम मोदी का बड़ा संकल्प, बोले- “वी विल डू इट”
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नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को सार्वजनिक जीवन में अपने 25 साल पूरे होने के मौके पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित किया। उन्होंने अपने भाषण में “वी विल डू इट” यानी “हम करके दिखाएंगे” का नारा 19 बार दोहराया। पीएम ने कहा कि जब तक भारत विकसित नहीं हो जाता, तब तक वह न थकेंगे और न रुकेंगे। उन्होंने अपनी 25 साल की यात्रा को उपलब्धियों से ज्यादा सीख और कृतज्ञता की यात्रा बताया। मोदी ने कहा कि उनके लिए सत्ता या पद से ज्यादा महत्वपूर्ण देश की सेवा है और वह आज भी खुद को विद्यार्थी मानते हैं।
7 अक्टूबर 2001 से शुरू हुई सेवा यात्रा
पीएम मोदी ने याद किया कि 7 अक्टूबर 2001 को उन्होंने गुजरात के मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ली थी। उस समय उन्होंने नहीं सोचा था कि एक दिन सार्वजनिक जीवन में सेवा करते हुए 25 साल पूरे होंगे।
उन्होंने कहा कि यह पड़ाव जनता के लगातार आशीर्वाद का परिणाम है। इसके लिए उन्होंने भाजपा, एनडीए और लोकतंत्र में विश्वास रखने वाले लोगों के प्रति आभार जताया। मोदी ने कहा कि आज वह जो कुछ भी हैं, उसमें सबसे बड़ा योगदान जनता जनार्दन का है।
उन्होंने देश के 140 करोड़ लोगों के लिए प्रार्थना करने की बात भी कही और कहा कि वह परमात्मा से ऐसी शक्ति मांगते हैं, जिससे देश की और ज्यादा ऊर्जा के साथ सेवा कर सकें।
प्रधानमंत्री ने कहा कि उनके जीवन का मूल उद्देश्य देश के लिए निस्वार्थ कर्म करना रहा है। उनके लिए कर्म ही सब कुछ है और कर्म ही उनका धर्म है। उन्होंने भगवद्गीता के कर्म के संदेश का उल्लेख करते हुए कहा कि वह हर काम पूरी क्षमता के साथ करते रहने को अपना कर्तव्य मानते हैं।
मोदी ने कहा कि वह चुनावी राजनीति में केवल चमकने की इच्छा रखते तो बहुत पहले चुनावी मैदान में उतर सकते थे, लेकिन उनका स्वभाव ऐसा नहीं था। उन्होंने अपनी यात्रा में मिले अनुभवों का जिक्र करते हुए कहा कि जिसने उन्हें गिराया, उसी ने खड़े होना सिखाया और जिसने विरोध किया, उसने लोकतंत्र की ताकत समझाई। हर संकट ने उनके धैर्य की परीक्षा ली और हर उपलब्धि ने बड़े लक्ष्य की तरफ बढ़ने की क्षमता दी।
“25 साल का आकलन मैं कहां पहुंचा से नहीं, देश कहां पहुंचा से होगा”
मोदी ने कहा कि भारत में जन्म लेना ही अपने आप में अमृत जैसा अनुभव है। उनके मुताबिक सत्ता का सुख और पद-प्रतिष्ठा इसके सामने कुछ भी नहीं हैं। उन्होंने कहा कि भारत जैसी पुण्यभूमि कहीं और नहीं मिल सकती।
उन्होंने कहा कि सार्वजनिक जीवन के 25 वर्षों का मूल्यांकन इस आधार पर नहीं होना चाहिए कि वह खुद कहां पहुंचे, बल्कि इस बात से होना चाहिए कि देश कहां पहुंचा है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत को विकसित बनाने के लिए बड़े लक्ष्य तय करने होंगे। उन्होंने विकसित भारत 2047, दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था, आत्मनिर्भर भारत, ओलिंपिक आयोजन और अंतरिक्ष में आगे बढ़ने जैसे लक्ष्यों के संदर्भ में “वी विल डू इट” का नारा दोहराया।
“अब आराम का समय नहीं”
पीएम मोदी ने कहा कि देश के युवाओं के सामने इतिहास का एक बड़ा अवसर मौजूद है और इसे गंवाना नहीं चाहिए। उन्होंने कहा कि अब आराम करने का समय नहीं है, बल्कि सोच के साथ आगे बढ़ने और देश के लिए खुद को समर्पित करने का समय है।
उन्होंने टेक्नोलॉजी, खेल और उद्योग में भारत का तिरंगा और ऊंचा करने की बात कही। पीएम ने कहा कि आज दुनिया भारत के पायलटों की चर्चा करती है और एक दिन ऐसा भी आएगा जब दुनिया “मेड इन इंडिया” विमान की चर्चा करेगी। उन्होंने कहा कि इन लक्ष्यों को पूरा करने के लिए दूरदर्शी नीतियों और कठिन परिश्रम की जरूरत होगी।
हर अनुभव से मिली सीख
प्रधानमंत्री ने अपनी 25 साल की यात्रा में मिले अलग-अलग अनुभवों को सीख का माध्यम बताया। उन्होंने कहा कि चंद्रयान ने उन्हें असफलता के बाद फिर उठना सिखाया, जबकि कोरोना से सामूहिक चेतना की सीख मिली।
उन्होंने कहा कि मीडिया से उन्हें खट्टे-मीठे अनुभव मिले, जिन्होंने आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। गांवों और गरीबों से उन्हें यह सीख मिली कि संसाधन सीमित हो सकते हैं, लेकिन सपने बड़े और हौसले मजबूत होने चाहिए।
मोदी ने कहा कि 25 साल पीछे देखने पर उनके मन में उपलब्धियों से ज्यादा कृतज्ञता का भाव आता है। उन्होंने ईश्वर से प्रार्थना की कि सीखने की इच्छा कभी कम न हो। उन्होंने कहा कि आज भी वह खुद को एक विद्यार्थी मानते हैं।
गुजरात से देश तक “वी विल डू इट” का संदेश
मोदी ने गुजरात के मुख्यमंत्री बनने के शुरुआती दौर को याद करते हुए कहा कि उस समय प्रशासनिक व्यवस्था का उन्हें ज्यादा अनुभव नहीं था, लेकिन उन्हें जनता की शक्ति पर भरोसा था। उन्होंने जनता को साथ लेकर निर्णय लेने, नीतियां बनाने और उन्हें लागू करने की बात कही।
उन्होंने उस दौर की चुनौतियों का जिक्र करते हुए कहा कि देश में निराशा का माहौल था और भारत की अर्थव्यवस्था को लेकर भी सवाल उठ रहे थे। ऐसे समय में उन्होंने लोगों के साथ मिलकर काम किया और “वी विल डू इट” का संदेश दोहराया।
प्रधानमंत्री ने कहा कि आज तस्वीर बदल गई है, लेकिन आगे बढ़ने का संकल्प अभी भी जारी है। उन्होंने कहा कि यह दिन केवल बीते वर्षों को याद करने का नहीं, बल्कि भविष्य के संकल्पों को नई ऊर्जा देने का दिन है।
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