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PM मोदी का ऐलान: 900 GW क्षमता की ओर बढ़ी देश की ग्रीन एनर्जी
Tara Tandi
30 Sept 2026 7:24 PM IST

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नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को कहा कि ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर फेज-III (GEC-III) स्कीम पर कैबिनेट का फैसला 2035 तक 900 GW नॉन-फॉसिल क्षमता हासिल करने की दिशा में एक "बड़ा कदम" है।
कैबिनेट ने GEC-III स्कीम को मंज़ूरी दे दी है, ताकि राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 135 गीगावाट (GW) तक रिन्यूएबल एनर्जी को एक जगह से दूसरी जगह भेजा जा सके।
पीएम मोदी ने X पर एक पोस्ट में कहा, "साफ़-सुथरी बिजली। मज़बूत ग्रिड। ज़्यादा मौके।"
उन्होंने आगे कहा, "ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर फेज III पर कैबिनेट के फैसले से ये चीज़ें पक्की होंगी: 135 GW रिन्यूएबल एनर्जी का ट्रांसमिशन। 50 GWh बैटरी स्टोरेज। राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मज़बूत पावर ग्रिड। मैन्युफैक्चरिंग, कंस्ट्रक्शन और एनर्जी स्टोरेज में ज़्यादा नौकरियां। 2035 तक 900 GW नॉन-फॉसिल क्षमता की दिशा में बड़ा कदम।"
भारत की कुल इंस्टॉल्ड पावर क्षमता जुलाई 2026 में 552 GW तक पहुँच गई, जो 2014 में 249 GW थी।
खास बात यह है कि नॉन-फॉसिल क्षमता 300.50 GW (31 जुलाई, 2026 तक) तक पहुँच गई है, जो कुल इंस्टॉल्ड क्षमता का 54 प्रतिशत से ज़्यादा है।
रिन्यूएबल एनर्जी इंस्टॉल्ड क्षमता के मामले में भारत दुनिया में तीसरे स्थान पर है। इसकी इंस्टॉल्ड सोलर क्षमता 164.59 GW (31 जुलाई, 2026 तक) तक पहुँच गई है, जो 2014 में 2.8 GW थी।
सोलर अब भारत की रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता का सबसे बड़ा हिस्सा है। भारत 2025 में दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सोलर ग्रोथ मार्केट बन गया, जिसमें 37 GW से ज़्यादा सोलर क्षमता जोड़ी गई, जबकि अमेरिका ने 34 GW क्षमता जोड़ी थी। GEC-III स्कीम को 2032-33 फाइनेंशियल ईयर तक शुरू करने का लक्ष्य है। इस प्रोजेक्ट का कुल खर्च 1,86,405 करोड़ रुपये होगा, जिसमें GEC-III के तहत इंट्रा-स्टेट ट्रांसमिशन सिस्टम (InSTS) के डेवलपमेंट के लिए 1,36,378 करोड़ रुपये और 50 GWh के बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) के लिए 50,000 करोड़ रुपये शामिल हैं।
BESS की मैन्युफैक्चरिंग और उसे लगाने से घरेलू एनर्जी स्टोरेज इंडस्ट्री में और नौकरियां पैदा होंगी। यह स्कीम इसमें शामिल राज्यों में ऑपरेशन, मेंटेनेंस और ग्रिड मैनेजमेंट के क्षेत्रों में लंबे समय के लिए स्किल्ड नौकरियां भी पैदा करेगी।
इस स्कीम में ग्रिड की फ्लेक्सिबिलिटी के लिए रिन्यूएबल एनर्जी (RE) डेवलपर/जनरेटर के एंड पर या किसी दूसरी ज़रूरी जगह पर 50 GWh के बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) लगाने का भी प्रावधान है। इससे रुक-रुक कर होने वाली सप्लाई, कंजेशन, पीक-आवर में कटौती और नॉन-सोलर घंटों में बिजली की मांग जैसी समस्याओं को हल किया जा सकेगा। इस स्कीम के लिए कुल 54,082 करोड़ रुपये की केंद्रीय वित्तीय सहायता दी जाएगी।
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