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ग्रासरूट्स इकोनॉमी
Delhi दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को भारत के सहयोगी क्षेत्र के दो प्रमुख सिद्धांतों - अमूल और इफको (इफको) को बधाई देते हुए कहा कि भारत का सहयोग क्षेत्र न केवल जीवंत है, बल्कि यह लाखों लोगों के जीवन को मजबूत और समृद्ध बनाना है। प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट में लिखा- "अमूल और इफको को बधाई। भारत का सहकारी क्षेत्र जीवंत है और कई लोगों के जीवन में बदलाव भी ला रहा है। हमारी सरकार आने वाले समय में इस क्षेत्र को और प्रोत्साहित करने के लिए कई कदम उठा रही है।" (अमूल और इफ्को को बधाई। भारत का सहयोगी क्षेत्र जीवंत है और कई जीवन को बदल रहा है। हमारी सरकार आने वाले समय में इस क्षेत्र को और मान्यता देने के लिए कई कदम उठा रही है।
प्रधानमंत्री के इस संदेश पर राष्ट्रपति के सहयोगियों और किसानों के बीच सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है। विशेषज्ञ का मानना है कि मोदी सरकार द्वारा अलग-अलग मंत्रालय की स्थापना के बाद इस क्षेत्र में नकारात्मक गति आ गई है। दूध उत्पादन, केंद्रीय आपूर्ति, ग्रामीण रोजगार और महिला संप्रदाय जैसे क्षेत्रों में सहकारी समितियों की भूमिका लगातार बढ़ रही है। अमूल, जो गुजरात की सहयोगी दुग्ध उत्पादक संस्था है, ने भारत को विश्व का सबसे बड़ा दुग्ध उत्पादक देश बनाने में अहम भूमिका निभाई है। वहीं इफ्को (भारतीय किसान असाधारण साझेदारी लिमिटेड) में किसानों के लिए उच्च गुणवत्ता वाले ब्रांड और कृषि तकनीक उपलब्ध है।
विशेषज्ञ का कहना है कि सहयोगी क्षेत्र अब केवल ग्रामीण विकास का साधन नहीं है, बल्कि "ग्रासरूट्स इकोनॉमी" का प्रमुख बन गया है। सरकार के "सहकार से समृद्धि" के तहत लाखों किसान, निबंधित कर्मचारी और ग्रामीण श्रमिक सीधे जुड़कर आत्मनिर्भर भारत की दिशा में योगदान दे रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने हाल ही में साझीदारों और बन्धुओं और डिजिटल निर्माण पर भी बल दिया था। सरकार अब सहयोगी संस्थाओं, फर्म यूनियनों और कृषि उद्यमियों को डिजिटल नेटवर्क से जोड़ने की दिशा में काम कर रही है। प्रधानमंत्री का यह संदेश न केवल अमूल और इफको के लिए प्रेरित है, बल्कि भारत के संपूर्ण सहयोगी आंदोलन के लिए प्रेरणा का स्रोत है, जो देश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाई तक ले जाने की क्षमता रखता है।
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