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भारत लौटी ऐतिहासिक धरोहर, द हेग में हुआ विशेष समारोह
Delhi दिल्ली: प्रधानमंत्री Narendra Modi ने चोल काल से जुड़े ऐतिहासिक ताम्रपत्रों की वापसी समारोह में हिस्सा लिया। यह कार्यक्रम भारत और नीदरलैंड के सांस्कृतिक संबंधों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सदियों पुराने इन ताम्रपत्रों को भारत की सांस्कृतिक विरासत का अहम हिस्सा माना जाता है, जिन्हें अब वापस भारत लाया जा रहा है।
समारोह के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने भारत की प्राचीन सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण और उन्हें वापस लाने के प्रयासों पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि देश की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उन्होंने नीदरलैंड सरकार और संबंधित संस्थाओं का सहयोग के लिए आभार भी जताया।
चोल ताम्रपत्र दक्षिण भारत के चोल साम्राज्य से जुड़े महत्वपूर्ण ऐतिहासिक दस्तावेज माने जाते हैं। इन पर उस समय के प्रशासन, दान, भूमि व्यवस्था और सामाजिक जीवन से जुड़ी जानकारी दर्ज है। इतिहासकारों के अनुसार, ये ताम्रपत्र भारत के प्राचीन शासन और संस्कृति को समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
भारत सरकार पिछले कुछ वर्षों से विदेशों में मौजूद भारतीय पुरावशेषों और सांस्कृतिक वस्तुओं की वापसी के लिए लगातार प्रयास कर रही है। कई देशों से दुर्लभ मूर्तियां, कलाकृतियां और ऐतिहासिक दस्तावेज भारत लौटाए जा चुके हैं। द हेग में आयोजित यह समारोह भी उसी अभियान का हिस्सा माना जा रहा है। इस अवसर पर दोनों देशों के अधिकारियों और सांस्कृतिक संस्थाओं के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे। कार्यक्रम में भारत-नीदरलैंड सांस्कृतिक सहयोग को और मजबूत करने पर भी चर्चा हुई।
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