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Tapi तापी। गुजरात के लाखों किसानों के जीवन में केंद्र सरकार की पीएम कुसुम योजना नया सवेरा लेकर आई है। गुजरात के दूरदराज और आदिवासी इलाकों के किसान अब खेती के लिए सिर्फ मानसून पर निर्भर नहीं हैं। सौर ऊर्जा से संचालित सोलर पंपों ने उनकी सिंचाई के लिए पानी की समस्या को दूर कर दिया है। यह संभव हुआ है केंद्र सरकार की ‘पीएम कुसुम योजना’ की वजह से। आदिवासी बहुल डांग जिले के उमरपाड़ा गांव के किसान भरतभाई वाघमारे को भी इस योजना का लाभ मिला है। वे अब अपने खेत में लगे सोलर पंप से सूर्योदय से सूर्यास्त तक लगातार सिंचाई करते हैं और हर मौसम में फसल उगाते हैं।
डांग के लाभार्थी किसान भरतभाई वाघमारे ने कहा कि हमें पीएम कुसुम योजना का लाभ मिला है। सरकार ने यह सहायता दी है। हम धान, तुअर, उड़द और बैंगन, चौली जैसी सब्जियां भी उगा रहे हैं। तापी के गवान गांव के किसान गवजीभाई वसावा के खेतों में भी पीएम कुसुम योजना खुशहाली लेकर आई है। गवजीभाई वसावा के बेटे राजेशभाई वसावा बताते हैं कि वे अब सोलर पंप की मदद से पूरे साल में तीन फसल उगाते हैं। उन्हें अब न तो सिंचाई के लिए रात में जागना पड़ता है और न ही बिजली के बिल की कोई चिंता रहती है।
तापी के लाभार्थी किसान राजेशभाई गवजीभाई वसावा ने कहा कि हमने खेत में सोलर पंप लगाया है, जिससे हमें ज्यादा पानी मिलता है और हम साल में लगातार तीन फसलें उगा रहे हैं। बिजली और डीजल के खर्च की कोई चिंता नहीं है। पीएम कुसुम योजना के तहत किसानों को सोलर पंप और सोलर प्लांट लगाने के लिए मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में गुजरात सरकार ने अतिरिक्त सब्सिडी का प्रावधान किया है। आदिवासी और जंगल वाले इलाकों के किसानों को केंद्र की तरफ से 30 प्रतिशत सब्सिडी के अलावा राज्य सरकार की ओर से 70 फीसदी सब्सिडी दी जा रही है। इस योजना से न केवल खेती पर निर्भर किसानों की आमदनी बढ़ी है बल्कि उनका जीवन भी आसान हुआ है।
गुजरात के ऊर्जा और पेट्रोकेमिकल्स मंत्री ऋषिकेश पटेल ने कहा कि पीएम कुसुम योजना के माध्यम से किसान दूरदराज की सभी जगहों पर, चाहे उनके पास कितनी भी खेती की जमीन हो, उस पर फसल उगा सकते हैं और कुदरत की मेहरबानी, सूरज की रोशनी और उससे मिलने वाली बिजली से अपने घर की आय बढ़ा सकते हैं। गुजरात में पीएम कुसुम योजना के कंपोनेंट-सी के तहत 695 मेगावाट क्षमता वाले 256 सोलर पावर प्लांट चालू किए गए हैं, जिससे लगभग 2.97 लाख पंप सोलराइज हुए हैं। इस कंपोनेंट के तहत अब तक 22,787 सोलर पंप शुरू किए जा चुके हैं। आज गुजरात के आदिवासी इलाकों में सोलर पंप सिर्फ एक टेक्नोलॉजी नहीं हैं बल्कि ज्यादा फसल, ज्यादा आय और खुशहाल जीवन का जरिया बन गए हैं।
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