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‘पिग-बुचेरिंग’ घोटालों का नया बना गढ़, फैला साइबर अपराध नेटवर्क

SHIDDHANT
16 Jun 2026 7:43 PM IST
‘पिग-बुचेरिंग’ घोटालों का नया बना गढ़, फैला साइबर अपराध नेटवर्क
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सोशल मीडिया से फैल रहा है साइबर ठगी का जाल
Delhi दिल्ली। श्रीलंका अब अंतरराष्ट्रीय टेलीकॉम धोखाधड़ी और 'पिग-बुचेरिंग' निवेश घोटालों का एक बड़ा केंद्र बनता जा रहा है। द्वीपीय देश में आर्थिक संकट और नियमों की कमजोर निगरानी के कारण संगठित साइबर अपराधियों के लिए यहां काम करना आसान हो गया है। सेलोन न्यूज 24 की रिपोर्ट के अनुसार म्यांमार, कंबोडिया और लाओस जैसे दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों में सक्रिय साइबर अपराधी नेटवर्क अब अपने ठिकाने श्रीलंका की ओर स्थानांतरित कर रहे हैं। इसकी एक बड़ी वजह यह है कि विदेशी निवेश या बाहर से आने वाले धन पर अपेक्षाकृत कम जांच-पड़ताल होती है।
साल 2024 के मध्य से श्रीलंका पुलिस और क्रिमिनल इन्वेस्टिगेशन डिपार्टमेंट (सीआईडी) की ओर से की गई कई छापेमार कार्रवाइयों में विदेशी नागरिकों की ओर से चलाए जा रहे बड़े-बड़े स्कैम सेंटर पकड़े गए हैं। इन अभियानों में सैकड़ों लोगों को गिरफ्तार किया गया है। कैंडी, पनादुरा और नेगोम्बो में हुई बड़ी छापेमार कार्रवाइयों में उन लग्जरी होटलों और गेस्ट हाउसों को निशाना बनाया गया, जिन्हें कथित तौर पर स्कैम सेंटर के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा था।
जांचकर्ताओं ने सैकड़ों कंप्यूटर, मोबाइल फोन और सिम-बॉक्स डिवाइस जब्त किए। ये डिवाइस एक साथ सैकड़ों सिम कार्ड चलाकर हजारों फर्जी कॉल और संदेश भेजने में सक्षम थे। अप्रैल 2026 में अंबकंदविला के एक लग्जरी होटल से 150 लोगों को गिरफ्तार किया गया। इनमें 133 चीनी नागरिक, 13 वियतनामी, एक मलेशियाई और अन्य लोग शामिल थे। इन स्कैम नेटवर्क के भर्ती करने वाले लोग सोशल मीडिया पर 'ऑनलाइन मार्केटिंग' या 'डेटा एंट्री' जैसी नौकरियों का विज्ञापन देकर लोगों को फंसाते हैं। नौकरी मिलने के बाद उनके पासपोर्ट जब्त कर लिए जाते हैं और उन्हें जबरन धोखाधड़ी वाले अभियानों में काम करने के लिए मजबूर किया जाता है।
'पिग-बुचेरिंग' इन ठगों की कमाई का मुख्य जरिया है। इसमें वे पहले ऑनलाइन लोगों से दोस्ती या प्रेम संबंध जैसा भरोसेमंद रिश्ता बनाते हैं और फिर उन्हें नकली निवेश प्लेटफॉर्म में पैसा लगाने के लिए मनाते हैं। ठग वीपीएन का इस्तेमाल करके अपनी असली लोकेशन छिपाते हैं और सोशल मीडिया अकाउंट हैक करके भी लोगों से पैसे मांगते हैं। रिपोर्ट में ऐसे मामलों का भी जिक्र है, जहां हैक किए गए अकाउंट्स का इस्तेमाल करके लोगों को फिशिंग लिंक भेजे गए और उन्हें स्थानीय निजी बैंक खातों में पैसे जमा करने के लिए धोखा दिया गया। रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि चीनी और नाइजीरियाई नागरिक ऐसे नेटवर्क के प्रमुख संचालक हैं और ये केंद्र म्यांमार और कंबोडिया में मौजूद अंतरराष्ट्रीय आपराधिक गिरोहों से सीधे जुड़े हुए हैं।
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