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पवन कल्याण ने तमिलनाडु के नेताओं पर साधा निशाना, हिंदी विरोध को बताया पाखंड
Shantanu Roy
15 March 2025 6:13 PM IST

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बड़ा बयान
Andhra Pradesh. आंध्र प्रदेश। आंध्र प्रदेश के उपमुख्यमंत्री और जनसेना पार्टी के प्रमुख पवन कल्याण ने हाल ही में हिंदी-तमिल भाषा विवाद पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने तमिलनाडु के नेताओं पर पाखंड का आरोप लगाते हुए कहा कि वे आर्थिक लाभ के लिए अपनी फिल्मों को हिंदी में डब करने की अनुमति देते हैं, लेकिन हिंदी भाषा का विरोध करते हैं। पार्टी के स्थापना दिवस पर आयोजित एक कार्यक्रम में पवन कल्याण ने कहा कि भारत को तमिल सहित कई भाषाओं की आवश्यकता है, न कि केवल दो भाषाओं की। उन्होंने भाषाई विविधता को अपनाने पर जोर दिया, जिससे देश की अखंडता बनी रहे और लोगों के बीच प्रेम और एकता बढ़े। पवन कल्याण ने यह भी कहा कि तमिलनाडु के नेता हिंदी का विरोध करते हैं, लेकिन वित्तीय लाभ के लिए अपनी फिल्मों को हिंदी में डब करने की अनुमति देते हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि वे बॉलीवुड से पैसा चाहते हैं, लेकिन हिंदी को स्वीकार करने से इनकार करते हैं, यह किस प्रकार का तर्क है।
पवन कल्याण की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार और डीएमके शासित तमिलनाडु के बीच 'तीन-भाषा फार्मूले' को लेकर तीखी नोकझोंक चल रही है, जो नई शिक्षा नीति का हिस्सा है। पवन कल्याण ने इस बात पर भी जोर दिया कि तमिलनाडु की ओर से उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे हिंदी भाषी राज्यों से मजदूरों का स्वागत करना लेकिन उनकी भाषा को अस्वीकार करना अनुचित है। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु में लोग हिंदी थोपने का विरोध करते हैं, लेकिन कमाई के लिए तमिल फिल्मों को हिंदी में डब करते हैं। उन्होंने सवाल किया कि वे उत्तर प्रदेश, बिहार और छत्तीसगढ़ जैसे हिंदी भाषी राज्यों से राजस्व चाहते हैं, फिर भी कहते हैं कि उन्हें हिंदी नहीं चाहिए। क्या यह अनुचित नहीं है? पवन कल्याण की इस टिप्पणी के बाद भाषा विवाद पर चर्चा और तेज हो गई है। तमिलनाडु और केंद्र सरकार के बीच भाषा नीति को लेकर मतभेद जारी हैं, और इस मुद्दे पर विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
पवन कल्याण की इस टिप्पणी के बाद भाषा विवाद पर चर्चा और तेज हो गई है। तमिलनाडु और केंद्र सरकार के बीच भाषा नीति को लेकर मतभेद जारी हैं, और इस मुद्दे पर विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। पवन कल्याण के इस बयान के बाद, तमिलनाडु में हिंदी भाषा को लेकर बहस और तेज हो गई है। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने हिंदी थोपने के प्रयासों का विरोध करते हुए कहा है कि राज्य अपनी भाषा और संस्कृति की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने केंद्र सरकार से आग्रह किया है कि वह राज्यों की भाषाई विविधता का सम्मान करे और किसी भी भाषा को थोपने से बचे। इस बीच, भाजपा के नेताओं ने पवन कल्याण के बयान का समर्थन किया है और तमिलनाडु सरकार से आग्रह किया है कि वह नई शिक्षा नीति को अपनाए, जिससे छात्रों को अधिक भाषाओं का ज्ञान हो सके और वे राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा कर सकें। भाषा विवाद पर पवन कल्याण के इस बयान ने राष्ट्रीय स्तर पर बहस को नया मोड़ दिया है, जहां भाषाई विविधता और एकता के बीच संतुलन बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया जा रहा है।
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