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सिरोही। सिरोही गुजरात कलोल से आए महामंडलेश्वर राम मनोहर दास ने कहा कि साधकों को मन में श्रद्धा भाव को प्रगाढ़ करते हुए श्री राम की उपासना करनी चाहिए। सदज्ञान प्राप्ति के लिए अनेक मार्ग हैं लेकिन सत्संग मानवीय महानता का पारस पत्थर है, जिसे स्पर्श करने से जीवन के स्वर्णिम पलों का आगमन होता है। यह बात उन्होंने गुरुवार को रघुनाथ मंदिर पाटोत्सव में आए श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कही। भावनगर गुजरात से महामंडलेश्वर रामचंद्र दास ने कहा कि सत्पुरुषों का संग अंत:करण की श्रद्धा व आस्था युक्त भावनाओं को जागृत कर देता है।अच्छी संगत में मनुष्य के जीवन को परिवर्तन करने की अदभुत शक्ति है। सुख, शान्ति, ज्ञान, पवित्रता आत्मा की अनमोल संपदा है।
रघुनाथ मंदिर महंत डॉ. स्वामी सियारामदास नैयायिक वैष्णवाचार्य ने कहा कि आत्मज्ञान प्राप्ति के बाद जीवन की पूर्णता को अनुभव कर सकते हैं। सदज्ञान के बिना भौतिक सुविधाओं के बावजूद भी जीवन में रिक्तता का अनुभव होता है। चतुर्भुज मंदिर माण्डवगढ़ के महंत नरसिंह दास ने कहा कि भारतीय परंपराओं में साधना की समस्त विधियां, शक्ति की उपासना से अभिपूरित रही हैं। श्रद्धा का अर्थ बिना किसी शंका, तर्क-वितर्क के अपने सर्वस्व को ईश्वरीय शक्ति को अर्पित करने से हैं। मंदिर अधिकारी डॉ. राधाकृष्णदास ने कहा कि ईश्वर भक्ति से सनातन संस्कृति के सिद्धांतों को अपने जीवन में उतारने का सामर्थ्य प्राप्त होता है। मन के भीतर के कपाट खुलने लगते हैं। ज्ञान प्रकाश की किरणें प्रवाहित होने लगती हैं।
महंत डॉ. स्वामी सियारामदास नैयायिक वैष्णवाचार्य के नेतृत्व में शहर के विभिन्न हिस्सों से निकाली गई रथयात्रा में श्रद्धालुओं की खासी भीड़ उमड़ पड़ी। रथयात्रा मंदिर परिसर से आरंभ होकर नक्की बाजार, वाल्टर तिराहा, अर्बुद चौक, चाचा म्यूजियम चौक, पुरानी सब्जी मंडी, सदर बाजार, मस्जिद मार्ग होते हुए पुन: मंदिर पहुंच आमसभा में तब्दील हो गई। जगह-जगह सर्वेश्वर रघुनाथ के रथ में सवार मूर्ति की पूजा अर्चना की गई। प्रसाद बांटे गए। मार्ग में फूलों की वर्षा कर व छबील आदि लगाकर यात्रा का स्वागत किया गया। इससे पूर्व रघुनाथजी का महाभिषेक, राम यज्ञ, पूजा पाठ, भजन, अखण्ड भगवान्नाम संकीर्तन, संगीत संध्या, साधु-संतों, विद्वानों के भाषण, कविता पाठ, भंडारा प्रसादी का आयोजन हुआ। रथयात्रा में आबू विरक्त वैष्णव संघ व खड़ दर्शन मंडल के संतगण, मंदिर ट्रस्टी प्रहलाद भाई पटेल, हिमांशु भाई नागौरी, भूपेंद्र सिंह जैन, मनोज अग्रवाल, नारायण भाटी, मांगीलाल काबरा, जगदीश चंद्र डाड, मनोज गर्ग, देवेंद्र जानी, कालूराम सोनी, नरपत सिंह, महेंद्र सिंह समेत बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।
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