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Gen-Z आंदोलन जांच के तहत केपी शर्मा ओली समेत पांच नेताओं के पासपोर्ट रद्द, काठमांडू छोड़ने पर रोक
Shantanu Roy
28 Sept 2025 10:04 PM IST

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New Delhi/Kathmandu. नई दिल्ली/काठमांडू। नेपाल के Gen-Z आंदोलन के दौरान युवा प्रदर्शनकारियों पर हुई गोलीबारी की जांच के लिए गठित न्यायिक आयोग ने पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली सहित पांच प्रमुख व्यक्तियों को बिना अनुमति काठमांडू छोड़ने से रोक दिया है। यह निर्देश सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस गौरी बहादुर कार्की की अध्यक्षता में गठित आयोग ने जारी किया है।
आयोग ने जारी किए कड़े निर्देश
आयोग ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए केपी शर्मा ओली, पूर्व गृहमंत्री रमेश लेखक, तत्कालीन गृह सचिव गोकर्ण मणि दुवाडी, आंतरिक खुफिया विभाग के प्रमुख हुत राज थापा, और काठमांडू के तत्कालीन जिलाधिकारी छवि रिजाल को काठमांडू से बाहर जाने से रोकने का निर्देश दिया है। आयोग ने इन सभी पर कड़ी निगरानी रखने और आयोग की अनुमति के बिना किसी भी व्यक्ति को बाहर जाने की अनुमति नहीं देने की बात कही है। साथ ही आयोग ने नेपाल पुलिस, सशस्त्र प्रहरी बल और राष्ट्रीय अनुसंधान विभाग को निर्देशित किया है कि वे इन पांच व्यक्तियों की गतिविधियों पर दैनिक रिपोर्टिंग करें। आयोग ने यह कदम उठाते हुए कहा कि यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि Gen-Z आंदोलन के दौरान हुई हिंसा की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच पूरी तरह से हो सके।
पासपोर्ट निलंबन और रद्द करने के आदेश
आयोग ने इन पांच प्रमुख व्यक्तियों के पासपोर्ट निलंबित करने और कई के रद्द करने का आदेश भी जारी किया है। पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली और पूर्व गृहमंत्री रमेश लेखक के पासपोर्ट निलंबित किए गए हैं, जबकि कुछ अन्य व्यक्तियों के पासपोर्ट रद्द कर दिए गए हैं। विशेष रूप से उल्लेखनीय है कि पूर्व प्रधानमंत्री शेरबहादुर देउवा और पूर्व विदेश मंत्री डा आरजू देउवा द्वारा हाल ही में जारी किए गए नए पासपोर्ट भी आयोग ने रद्द करने का निर्देश दिया है। सूत्रों के अनुसार, देउवा दंपत्ति को 19 सितंबर को राष्ट्रीय अवकाश के दिन अस्पताल में नए पासपोर्ट जारी किए गए थे, जिन्हें अब आयोग ने रद्द कर दिया है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि यह प्रतिबंध जांच पूरी होने तक जारी रहेगा और किसी भी व्यक्ति को बिना अनुमति विदेश जाने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
Gen-Z आंदोलन और हिंसा
नेपाल में Gen-Z आंदोलन के दौरान हुई हिंसा में कई युवा प्रदर्शनकारी घायल हुए थे। इस घटना ने देश में राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर हलचल पैदा कर दी थी। न्यायिक आयोग का यह कदम घटनाओं की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने और दोषियों को कानून के अनुसार कार्रवाई के दायरे में लाने के उद्देश्य से उठाया गया है। आयोग का मानना है कि इस तरह की निगरानी और पासपोर्ट निलंबन से जांच में किसी भी तरह के बाहरी दबाव या भागने की कोशिश को रोका जा सकेगा। इसके अलावा यह सुनिश्चित करेगा कि जांच पूरी तरह से स्वतंत्र और निष्पक्ष रूप से हो।
प्रमुख व्यक्तियों पर निगरानी
आयोग ने जिन पांच प्रमुख व्यक्तियों पर निगरानी रखने का आदेश दिया है, उनके नाम और पद इस प्रकार हैं:
केपी शर्मा ओली – पूर्व प्रधानमंत्री
रमेश लेखक – पूर्व गृहमंत्री
गोकर्ण मणि दुवाडी – तत्कालीन गृह सचिव
हुत राज थापा – आंतरिक खुफिया विभाग के प्रमुख
छवि रिजाल – काठमांडू के तत्कालीन जिलाधिकारी
आयोग ने सभी संबंधित अधिकारियों और सुरक्षा एजेंसियों को निर्देशित किया है कि वे इन व्यक्तियों की सभी गतिविधियों पर लगातार नजर रखें और आयोग को दैनिक रूप से रिपोर्ट करें।
राजनीतिक और सामाजिक प्रभाव
Gen-Z आंदोलन के दौरान हुई हिंसा ने नेपाल की राजनीति में गहरी छाप छोड़ी है। इस घटना के बाद राजनीतिक दलों और नागरिक समाज में गहन चर्चा हुई। न्यायिक आयोग की यह कार्रवाई राजनीतिक स्थिरता और न्यायिक प्रक्रिया के प्रति लोगों के विश्वास को बनाए रखने के लिए अहम मानी जा रही है। इस प्रकार के कड़े कदम यह सुनिश्चित करते हैं कि जांच निष्पक्ष और प्रभावी तरीके से पूरी हो, और किसी भी व्यक्ति के दबाव या भागने की कोशिश का कोई मौका न मिले।
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