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विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस: कई नेताओं ने दी श्रद्धांजलि, अमित शाह बोले- 'देश के बंटवारे का दंश कांग्रेस की देन'

jantaserishta.com
14 Aug 2026 8:15 AM IST
विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस: कई नेताओं ने दी श्रद्धांजलि, अमित शाह बोले- देश के बंटवारे का दंश कांग्रेस की देन
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नई दिल्ली: विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर पूरा देश उन सभी लोगों को याद कर रहा है, जिन्हें विभाजन के समय अपनी जिंदगी गंवानी पड़ी। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के अलावा कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने इस दिन अमानवीय पीड़ा सहने वाले लोगों को श्रद्धांजलि दी है।
गृह मंत्री अमित शाह ने 'एक्स' पोस्ट में लिखा, "14 अगस्त 1947 का दिन इतिहास के उस क्रूरतम अध्याय का साक्षी है, जिसमें अमानवीय पीड़ा सहते हुए लाखों लोगों को अपना जीवन गंवाना पड़ा और करोड़ों लोगों को घर, संपत्ति व अपनों को छोड़कर विस्थापित होना पड़ा। देश के बंटवारे का यह दंश, जो कांग्रेस की देन है, उसे इतिहास कभी भूल नहीं पाएगा। इस विभीषिका में अपने प्राण गंवाने वाले और अत्याचारों के खिलाफ संघर्ष करने वाले सभी लोगों को श्रद्धापूर्वक नमन करता हूं।"
उन्होंने आगे लिखा, "मोदी सरकार विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के माध्यम से इस त्रासदी की स्मृतियों को युवा पीढ़ी तक पहुंचा रही है, ताकि देश को फिर से तोड़ने वाली ताकतें कभी सफल न हो सकें और 'एक भारत, श्रेष्ठ भारत' ही हमारा सर्वोच्च ध्येय बने।"
केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने पोस्ट किया, "धर्म के आधार पर 1947 में हुआ देश का विभाजन भारतीय इतिहास का एक अमानवीय और काला अध्याय है। आज 'विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस' पर उन सभी लोगों का स्मरण करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं, जिन्हें देश के विभाजन के समय अपनी जिंदगी गंवानी पड़ी। देश इस विभाजन की विभीषिका कभी नहीं भूलेगा।"
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लिखा, "वर्ष 1947 में विभाजन, मात्र सीमाओं का ही नहीं हुआ था। वह असंख्य परिवारों के सपनों, संबंधों और संवेदनाओं का बिखराव भी था। 'विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस' हमें उस अकल्पनीय पीड़ा को स्मरण करने, उससे सीख लेने और राष्ट्र की एकता-अखंडता को सर्वोच्च मानने का संदेश देता है। विखंडन की इस विभीषिका में अपने प्राण गंवाने वाले निर्दोष नागरिकों को विनम्र श्रद्धांजलि। उनकी स्मृतियां हमें सदैव सशक्त, संगठित और अखंड भारत के निर्माण के लिए प्रेरित करती रहेंगी।"
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर उन लाखों निर्दोष नागरिकों को श्रद्धांजलि की, जिन्होंने मां भारती के विभाजन की असहनीय वेदना झेली और अपना सर्वस्व खो दिया। उन्होंने लिखा, "14 अगस्त 1947 को केवल देश की सीमाएं नहीं बदली थीं। किसी की जन्मभूमि छूट गई, किसी का घर उजड़ गया, किसी के अपने बिछड़ गए। पीढ़ियों से जिस मिट्टी में जीवन रचा-बसा था, लाखों परिवार उसी मिट्टी से विस्थापित कर दिए गए। विभाजन की हिंसा ने अनगिनत सपनों, संबंधों और जीवन को छिन्न-भिन्न कर दिया।"
रेखा गुप्ता ने लिखा, "प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के माध्यम से विस्थापित परिवारों की पीड़ा, संघर्ष और पुरुषार्थ को राष्ट्र की सामूहिक स्मृति में प्रतिष्ठित किया है। यह दिवस मां भारती की एकता, अखंडता, सांस्कृतिक एकात्मता और सामाजिक समरसता की रक्षा के हमारे संकल्प को और दृढ़ करता है। यही विभाजन की वेदना सहने वाले प्रत्येक परिवार के प्रति हमारी सच्ची श्रद्धांजलि है।"
मध्य प्रदेश के सीएम मोहन यादव ने कहा, "विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर भारत के विभाजन की पीड़ा में प्राण गंवाने वाले पुण्यात्माओं को सादर नमन करता हूं। विभाजन की त्रासदी मानवता की रक्षा, सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय एकता के महत्व का सदैव स्मरण कराती है। आइए, हम सभी राष्ट्र की एकता व अखंडता को सुदृढ़ बनाने के प्रयासों में सहभागिता का संकल्प लें।"
केंद्रीय आवास और शहरी मामलों के मंत्री मनोहर लाल ने कहा, "विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर मैं उन सभी लोगों को श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं, जिन्होंने देश के विभाजन के दौरान अमानवीय पीड़ाओं का सामना किया, बेघर हुए, अपना एवं अपनों का जीवन खो दिया। 1947 में धर्म के आधार पर हुआ देश का विभाजन भारतीय इतिहास के कालखंड का वो काला अध्याय है जिसे कभी नहीं भुलाया जा सकता है।"
उन्होंने आगे लिखा, "प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अथक प्रयास से इस दिवस को मनाने की परंपरा राष्ट्रनिर्माण की ओर उठाया गया मजबूत कदम है। आइए, इस अवसर पर हम सब उस भयानक त्रासदी से सबक लें और राष्ट्र प्रेम को सर्वोपरि रख कर देश की एकता तथा सामाजिक सद्भाव को मजबूत करने का संकल्प लें।"
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