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मां-बाप ने खो दिया 5 साल का मासूम, जाने कैसे हुआ ये भयानक हादसा...

Shantanu Roy
29 Sept 2025 6:28 PM IST
मां-बाप ने खो दिया 5 साल का मासूम, जाने कैसे हुआ ये भयानक हादसा...
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ऐसे थम गई मासूम की सांसें कि...
Sikar. सीकर। राजस्थान के सीकर जिले से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां सरकारी अस्पताल से दी गई खांसी की दवा पीने के बाद 5 साल के बच्चे की मौत हो गई। परिवार का दावा है कि सिरप पीने के बाद ही बच्चे की सांसें थम गईं और उसकी अचानक मौत हो गई। यह घटना जिले के खोरी ब्राह्मणान गांव की है। मृतक बच्चे का नाम नितियांस बताया जा रहा है। इस घटना ने ग्रामीणों और स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मचा दिया है, क्योंकि इससे पहले श्रीमाधोपुर और भरतपुर जिलों में भी खांसी की दवा से बच्चों की तबीयत बिगड़ने के मामले सामने आ चुके हैं।

सिरप पीने के बाद मासूम की मौत
जानकारी के अनुसार, मृतक नितियांस पिछले 4-5 दिनों से खांसी से परेशान था। इसी दौरान उसकी मां खुशी उसे लेकर पास के चिराना स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) पहुंची थीं। वहां से उन्हें निशुल्क दवा योजना के तहत खांसी की दवा दी गई। परिवार का कहना है कि रविवार की रात करीब 11:30 बजे बच्चे को यह सिरप पिलाया गया। रात करीब 3:30 बजे बच्चे को अचानक हिचकी आने लगी, जिसके बाद परिवार ने उसे पानी पिलाया। हालांकि सुबह जब परिजनों ने नितियांस को उठाने की कोशिश की तो वह नहीं उठा। घबराए परिजन तुरंत उसे सीकर स्थित एसके अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

परिवार का दावा – दवा बनी मौत की वजह
बच्चे के चाचा बसंत शर्मा ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि नितियांस बिल्कुल सामान्य था और केवल खांसी से परेशान था। उन्होंने दावा किया कि सिरप पीने के बाद ही उसकी तबीयत बिगड़ी और इसी वजह से उसकी मौत हुई है। परिवार ने कहा कि दवा की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं। बसंत शर्मा ने यह भी बताया कि मृतक बच्चे के पिता झारखंड में होटल चलाते हैं। परिवार में अब केवल मां और बड़ा भाई है, जिसकी उम्र 7 साल है। अचानक हुई इस घटना से परिवार पूरी तरह टूट गया है।

पोस्टमॉर्टम से किया इनकार
दादिया थाना प्रभारी (SHO) बुद्धिप्रसाद ने बताया कि मामले की जानकारी मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची। लेकिन बच्चे के परिजनों ने पोस्टमॉर्टम कराने से इनकार कर दिया। उनका कहना है कि बच्चे की मौत खांसी की दवा पीने से हुई है, इसलिए वे शव का पोस्टमॉर्टम नहीं कराना चाहते। सीकर की यह घटना कोई पहली नहीं है। इससे पहले श्रीमाधोपुर और भरतपुर में भी ऐसे मामले सामने आ चुके हैं, जहां खांसी की दवा पीने से बच्चों की हालत बिगड़ गई थी। भरतपुर में तो स्थिति इतनी गंभीर हो गई थी कि डॉक्टर ने स्वयं दवा पीकर जांच की और उनकी भी तबीयत बिगड़ गई थी। इन घटनाओं ने राजस्थान में सरकारी अस्पतालों की दवाओं की गुणवत्ता और सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

स्वास्थ्य विभाग की साख पर सवाल
इन लगातार मामलों ने राजस्थान स्वास्थ्य विभाग की साख को झटका दिया है। निशुल्क दवा योजना का उद्देश्य गरीब और जरूरतमंद लोगों को राहत देना था, लेकिन अब यही दवाएं लोगों के लिए खतरा बनती दिख रही हैं। ग्रामीणों में यह चर्चा है कि यदि दवा की गुणवत्ता पर ध्यान नहीं दिया गया तो और भी गंभीर हादसे हो सकते हैं।

जांच की मांग तेज
घटना के बाद खोरी ब्राह्मणान गांव में लोगों ने स्वास्थ्य विभाग से जांच की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि यह मामला बेहद गंभीर है और इसकी पूरी जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की जानी चाहिए। वहीं, स्थानीय स्तर पर स्वास्थ्यकर्मियों का कहना है कि दवा की सप्लाई राज्य स्तर से होती है। ऐसे में यह पता लगाना जरूरी है कि कहीं बैच स्तर पर खांसी की सिरप में कोई खामी तो नहीं है। नितियांस की मौत के बाद पूरे गांव में मातम छा गया है। परिवारजन सदमे में हैं। ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी दवाओं पर अब भरोसा करना मुश्किल हो गया है। गांव के लोगों का कहना है कि यदि दवाएं ही सुरक्षित नहीं हैं तो गरीब और आम जनता आखिर कहां जाए।
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