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बंगाल में पेपर लीक की जगह शिक्षा के क्षेत्र में हुए घोटालों ने ले ली
jantaserishta.com
26 Feb 2023 5:21 PM IST

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कोलकाता (आईएएनएस)| पश्चिम बंगाल में करोड़ों रुपये के शिक्षक भर्ती घोटाले ने इतनी नकारात्मक लोकप्रियता हासिल कर ली है कि यह इस बात पर हावी हो गया है कि पेपर लीक की घटनाएं भी परीक्षा घोटाले का हिस्सा हैं।
परीक्षा के पेपर लीक होने की घटनाएं पश्चिम बंगाल के पूर्व शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी के कार्यकाल के दौरान हुईं। चटर्जी करोड़ों रुपये के शिक्षक भर्ती घोटाले में कथित मास्टरमाइंड के रूप में न्यायिक हिरासत में हैं।
पेपर लीक की घटना 2019 में माध्यमिक परीक्षा के दौरान दर्ज की गई थी। बांग्ला, अंग्रेजी, इतिहास, गणित और जीवन विज्ञान के प्रश्न पत्र न केवल लीक हुए बल्कि सोशल मीडिया पर भी प्रसारित किए गए। इस सिलसिले में कई गिरफ्तारियां भी की गईं।
साल 2020 में परीक्षाएं कड़ी निगरानी में कराई गईं, लेकिन उसके बावजूद बांग्ला और भूगोल के पेपर लीक होने के आरोप लगे। 2021 में कोरोना महामारी के कारण माध्यमिक परीक्षाएं आयोजित नहीं की गई और परीक्षार्थियों को कक्षा 9 और 10 में उनके प्रदर्शन के आधार पर अंक दिए गए। हालांकि, 2022 में ऐसी कोई परीक्षा पेपर लीक होने की सूचना नहीं मिली।
आश्चर्य की बात यह है कि पश्चिम बंगाल में चल रहे करोड़ों रुपये के शिक्षक भर्ती घोटाले में लिखित परीक्षाओं में प्रश्नपत्र लीक होने की घटना कभी सामने नहीं आई। हालांकि, घोटाले की जांच करने वाली सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने अपनी रिपोर्ट और अदालत में दायर चार्जशीट में घोटाले के कई कोणों को उजागर किया है, लेकिन इनमें से किसी भी रिपोर्ट में प्रश्नपत्र लीक होने का जिक्र नहीं किया गया है।
जांच प्रक्रिया से जुड़े सीबीआई के एक सूत्र ने बताया कि इस घोटाले में परीक्षा के पेपर लीक होने की कोई जगह नहीं थी। उन्होंने आगे कहा कि भर्ती परीक्षाओं में घोटाले दो तरह से हो सकते हैं। पहला, एक निश्चित राशि के एवज में प्रश्न पत्रों को लीक करने का पारंपरिक तरीका है।
ऐसे में संबंधित परीक्षार्थी को पहले से ही उत्तरों को जानने और याद करने का प्रयास करना होता है और फिर ओएमआर शीट में सभी प्रश्नों के सही उत्तर देने का भी प्रयास करना होता है। सीबीआई के सूत्रों ने आगे कहा कि लेकिन इस विशेष घोटाले में, रिवॉर्ड उन लोगों के लिए थे जिन्होंने खाली ओएमआर शीट जमा की थी या केवल कुछ प्रश्नों का उत्तर दिया था।
भर्ती सुनिश्चित करने के लिए पैसे देने वाले उम्मीदवारों की ओएमआर शीट को बदल दिया गया या बाद में उन्हें भर्ती के लिए योग्य बनाने के लिए छेड़छाड़ की गई। हमारे लिए यह पूरी तरह से नया अनुभव है कि बिना प्रश्न पत्र लीक किए परीक्षा में हेरफेर कैसे किया जा सकता है, वो भी ओएमआर शीट में।
हालांकि, उस समय के आसपास आयोजित लेटेस्ट टीईटी में लिखित परीक्षा के मुकाबले पिछले साल की अंतिम तिमाही में पेपर लीक का आरोप फिर से सामने आया। परीक्षा में उपयोग की गई कुछ ओएमआर शीट की प्रतियां वास्तविक परीक्षा से ठीक एक घंटे पहले सामने आने के बाद विवाद खड़ा हो गया।
राज्य के शिक्षा मंत्री ब्रत्या बसु ने प्रश्नपत्र लीक होने के आरोपों को खारिज किया और दावा किया कि निहित स्वार्थ राज्य और राज्य सरकार की शिक्षा प्रणाली को बदनाम करने के लिए नकली ओएमआर शीट प्रसारित कर रहे थे।
हालांकि, केंद्रीय जांच एजेंसी के एक अधिकारी ने बताया कि परीक्षा के पेपर लीक होने का आरोप सही या गलत, फिर से सामने आया है। ओएमआर शीट के साथ छेड़छाड़ चल रही जांच के कारण सवाल से बाहर है।
इतिहास के प्रोफेसर ए.के. दास के अनुसार, चाहे परीक्षा पेपर लीक के माध्यम से हो या ओएमआर शीट में हेरफेर से, खासकर भर्ती परीक्षाओं के मामले में, मामला भर्ती सुनिश्चित करने के लिए भारी रकम के भुगतान से जुड़ा है।
दास ने आगे कहा कि ज्यादातर मामलों में ऐसे अनुचित तरीकों से नौकरी पाने वाले लोग अपनी संपत्ति बेचकर या भारी मात्रा में उधार लेकर पैसे की व्यवस्था करते हैं, जो ज्यादातर मामलों में निजी साहूकारों से अत्यधिक ब्याज पर ली गई रकम होती है।
इसलिए नौकरी मिलने के बाद भी शिक्षक का मुख्य कार्य पीछे की ओर जाता है और उनका ध्यान कर्ज चुकाने या जितनी जल्दी हो सके भुगतान किए गए धन की वसूली के लिए साइड इनकम पर केंद्रित होता है। इस तरह पूरी शिक्षा प्रणाली का पतन शुरू हो जाता है।
शहर के मनोचिकित्सक और केपीसी मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल के एक शिक्षक डॉ. तीथर्ंकर गुहा ठाकुरता अनुचित तरीकों से नियुक्त शिक्षकों के मनोवैज्ञानिक पहलू का विश्लेषण करते हैं जो उन्हें शिक्षक के मुख्य कार्य से दूर रखने के लिए प्रेरित करते हैं।
उन्होंने कहा कि एक अवैध रूप से नियुक्त शिक्षक हमेशा अपनी अक्षमता से अवगत रहता है। इसलिए उसे पकड़े जाने का डर हमेशा मन में बना रहता है।
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