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Delhi दिल्ली: पाकिस्तान का कुल सार्वजनिक कर्ज 360 दिनों में 71 ट्रिलियन रुपए से बढ़कर 80.5 ट्रिलियन रुपए हो गया है। मतलब 9 ट्रिलियन रुपए की वृद्धि, जबकि सरकार इस अवधि को आर्थिक स्थिरीकरण का समय बता रही है। द न्यूज इंटरनेशनल में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, यह वृद्धि हर दिन 26 बिलियन रुपए उधार लेने के बराबर है, जिसमें 19 सार्वजनिक छुट्टियां भी शामिल हैं। घंटे के हिसाब से सरकार पर 1.08 बिलियन रुपए का नया कर्ज जुड़ता है। वहीं, हर मिनट यह आंकड़ा 1.8 मिलियन रुपए तक पहुंच जाता है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था की ओर से कमाए गए हर 100 रुपए में से किसी भी सार्वजनिक सेवा के लिए राशि देने से पहले ही 72 रुपए का कर्ज चुकाना होता है। इसके अलावा, पाकिस्तान सरकार का कर्ज-से-जीडीपी अनुपात 72 प्रतिशत तक पहुंच गया है।
नौ ट्रिलियन रुपए की इस वृद्धि में से, दो ट्रिलियन रुपए अनुदान के रूप में वितरित किए गए, और दो ट्रिलियन रुपए राज्य-स्वामित्व वाले उद्यमों के नुकसान की भरपाई में इस्तेमाल हुए। बिजली कंपनियां, गैस कंपनियां, रेलवे, स्टील और राष्ट्रीय एयरलाइन जैसी प्रमुख घाटे में चल रही संस्थाओं में कोई संरचनात्मक सुधार नहीं किया गया है। सरकारी बेड़े में इस समय 85,500 वाहन शामिल हैं, जो हर साल 114 बिलियन रुपए का ईंधन खर्च करते हैं। रिपोर्ट के अनुसार, “2030 तक कर्ज की अदायगी पाकिस्तान के टैक्स राजस्व का बड़ा हिस्सा खा जाएगी। हर अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष कार्यक्रम केवल समय मांगता है, सुधार नहीं। अगर हमने अपने हालात नहीं सुधारे, तो सुधारने के लिए कुछ बचेगा ही नहीं।
इसमें आगे यह भी बताया गया कि 1971 में, पाकिस्तान में पैदा हुए एक बच्चे पर राष्ट्रीय ऋण के हिस्से के रूप में 462 रुपए का कर्ज था। अब यह आंकड़ा 3,33,041 रुपए हो गया है। यानी बच्चे के जन्म लेते ही, बिना किसी सरकारी सेवा का लाभ लिए, उस पर इतना कर्ज होता है। अर्थशास्त्रियों और वित्तीय विश्लेषकों ने चेतावनी दी है कि जैसे-जैसे कर्ज की अदायगी का बोझ बढ़ेगा, वैसे-वैसे शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में निवेश घटता जाएगा। स्वतंत्रता के बाद से पाकिस्तान में चार गवर्नर-जनरल, 14 राष्ट्रपति और 20 प्रधानमंत्री रह चुके हैं। मौजूदा कर्ज बढ़ने की दर उसके 79 साल के इतिहास में सबसे तेज है।
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