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हूती हमलों से मिडिल ईस्ट में नया मोर्चा पाकिस्तान की भूमिका पर टिकी नजरें
Islamabad इस्लामाबाद। सऊदी अरब पर हूती हमलों के बाद पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की के बीच हुए मक्का जॉइंट डिफेंस एग्रीमेंट की पहली बड़ी परीक्षा मानी जा रही है। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने कहा है कि अगर यमन का संघर्ष सऊदी क्षेत्र तक फैलता है तो समझौते के सामूहिक रक्षा प्रावधान लागू हो सकते हैं। मक्का समझौते में किसी एक सदस्य पर सशस्त्र हमले को तीनों देशों पर हमला मानने का प्रावधान है। यह बयान ऐसे समय आया है जब ईरान समर्थित हूतियों के हमलों में सऊदी अरब में 73 लोगों के घायल होने की खबर है। इसके बाद क्षेत्र में सैन्य तनाव तेजी से बढ़ा है और सऊदी समर्थित बलों ने यमन में हूती ठिकानों पर हवाई हमले भी किए हैं।
कुछ मीडिया रिपोर्टों में दावा किया जा रहा है कि पाकिस्तान हूती ठिकानों के खिलाफ प्रत्यक्ष सैन्य कार्रवाई कर सकता है। हालांकि इस संभावना को फिलहाल निश्चित नहीं माना जा सकता। दूसरी रिपोर्टों में कहा गया है कि पाकिस्तान ने अभी किसी सैन्य हस्तक्षेप का औपचारिक फैसला नहीं किया है। इसलिए पाकिस्तान के हूतियों पर हवाई हमले की बात को फिलहाल संभावना के रूप में ही देखा जाना चाहिए। मक्का जॉइंट डिफेंस एग्रीमेंट पर पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की ने 7 अगस्त 2026 को हस्ताक्षर किए थे। आधिकारिक पाकिस्तानी बयान के मुताबिक यह समझौता रक्षात्मक प्रकृति का है और किसी खास देश के खिलाफ नहीं है। इसके तहत किसी एक सदस्य देश पर सशस्त्र हमला सभी पर हमला माना जाएगा।
समझौते में केवल सामूहिक सुरक्षा ही नहीं बल्कि सैन्य सहयोग बढ़ाने की भी व्यवस्था है। तुर्की के रक्षा मंत्रालय के मुताबिक तीनों देश संयुक्त सैन्य अभ्यास, एयर डिफेंस, ड्रोन और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की योजना बना रहे हैं। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि सऊदी अरब पर हूती हमलों को मक्का समझौते के तहत औपचारिक रूप से सामूहिक रक्षा की स्थिति माना जाता है या नहीं। पाकिस्तान की प्रत्यक्ष सैन्य भागीदारी क्षेत्रीय संघर्ष को और व्यापक बना सकती है। फिलहाल इस्लामाबाद की ओर से हूतियों के खिलाफ हवाई हमले की आधिकारिक घोषणा सामने नहीं आई है।
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