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New York न्यूयॉर्क: पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ का एक वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा में है, जिसमें वह अफगान महिला पत्रकार के सवाल का जवाब देते हुए नजर आ रहे हैं। पत्रकार ने तालिबान के साथ पाकिस्तान के संबंधों और अफगान महिलाओं को लेकर उसकी नीतियों पर सवाल पूछा था। इस दौरान ख्वाजा आसिफ की टिप्पणी और इशारे को लेकर विवाद खड़ा हो गया है।
यह मामला न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र से इतर का बताया जा रहा है। महिला पत्रकार ने ख्वाजा आसिफ से पूछा था कि तालिबान के लिए पाकिस्तान का संदेश क्या है और क्या पाकिस्तान अफगान महिलाओं को लेकर तालिबान की नीतियों में बदलाव की मांग करेगा।
An Afghan woman asked #KhawajaAsif a legitimate question about Pakistan’s friendship with Taliban, and Taliban’s treatment of #AfghanWomen, and why #Pakistan did not challenge these policies from the beginning when the #Taliban were considered friends.
— Aina Durkhanai آئینه درخانۍ (@khybereena) September 26, 2026
His response? Don’t go… pic.twitter.com/cJFVGCbhKB
पत्रकार ने यह भी सवाल किया कि जब तालिबान को पाकिस्तान का करीबी माना जाता था, तब पाकिस्तान ने शुरुआत में ही उसे महिलाओं से जुड़ी नीतियों को लेकर अपनी आपत्ति क्यों नहीं जताई। सवाल सुनने के दौरान ख्वाजा आसिफ ने पत्रकार को बीच में रोक दिया और उनके पहनावे की ओर इशारा किया। वीडियो में नजर आ रहा है कि इसके बाद पाकिस्तानी रक्षा मंत्री ने अपने हाथ को गले पर फेरने जैसा इशारा किया और कुछ शब्द कहे। उनके इस इशारे को सोशल मीडिया पर कई लोगों ने धमकी के तौर पर देखा और उनकी आलोचना की।
हालांकि, वीडियो में ख्वाजा आसिफ ने सीधे तौर पर पत्रकार को किसी तरह की जान से मारने की धमकी नहीं दी। उनके बयान और इशारे को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कुछ लोगों ने इसे अनुचित व्यवहार बताया, जबकि कुछ ने इसे संदर्भ से जोड़कर देखने की बात कही।
सोशल मीडिया यूजर्स ने यह भी सवाल उठाया कि पत्रकार ने अफगान महिलाओं के अधिकारों और तालिबान की नीतियों को लेकर गंभीर सवाल पूछा था, लेकिन उन्हें स्पष्ट जवाब नहीं मिला। वहीं, वीडियो में मौजूद लोगों की प्रतिक्रिया को लेकर भी चर्चा हो रही है। मामला सामने आने के बाद ख्वाजा आसिफ की प्रतिक्रिया और उनके व्यवहार को लेकर बहस तेज हो गई है। अफगान महिलाओं से जुड़े मुद्दे और तालिबान की नीतियां पहले से ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय रही हैं।
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