भारत

पद्मश्री संत रमेश बाबा का निधन, ब्रज सेवा और गौ संरक्षण को समर्पित रहा जीवन

Shantanu Roy
6 Oct 2026 6:07 PM IST
पद्मश्री संत रमेश बाबा का निधन, ब्रज सेवा और गौ संरक्षण को समर्पित रहा जीवन
x
बड़ी खबर
Mathura. मथुरा। बरसाना स्थित मान मंदिर के संस्थापक और पद्मश्री से सम्मानित संत रमेश बाबा का मंगलवार को निधन हो गया। उनके निधन की खबर से बरसाना समेत पूरे ब्रज क्षेत्र में शोक की लहर है। ब्रज संस्कृति, गौ सेवा, पर्यावरण संरक्षण और राधारानी की भक्ति से जुड़े उनके लंबे जीवन को श्रद्धालु और संत समाज याद कर रहे हैं। विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार उन्होंने बरसाना में ही अंतिम सांस ली। संत रमेश बाबा का जन्म वर्ष 1938 में प्रयागराज में हुआ था। उनके पिता बलदेव प्रसाद शुक्ल ज्योतिषाचार्य थे, जबकि उनकी माता का नाम हेमेश्वरी देवी था। किशोरावस्था में ही उनमें वैराग्य का भाव जागृत हो गया था और वर्ष 1954 के आसपास वे बरसाना पहुंचे। यहां आने के बाद उन्होंने राधारानी की भक्ति को अपने जीवन का आधार बना लिया।
बरसाना पहुंचने के बाद उन्होंने राधारानी मंदिर में मृदंग बजाकर और संकीर्तन के माध्यम से भक्ति साधना की। बाद में ब्रह्मांचल पर्वत पर मान मंदिर आश्रम की स्थापना की। धीरे-धीरे उनका जीवन केवल आध्यात्मिक साधना तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उन्होंने ब्रज क्षेत्र की प्राकृतिक और सांस्कृतिक विरासत को बचाने के लिए भी सक्रिय भूमिका निभाई। संत रमेश बाबा को विशेष रूप से गौ सेवा और ब्रज संरक्षण के लिए जाना जाता था। वर्ष 2007 में उन्होंने बरसाना में माताजी गौशाला की शुरुआत की। समय के साथ यह गौशाला देश की बड़ी गौशालाओं में शामिल हो गई। यहां बड़ी संख्या में गौवंश के संरक्षण और देखभाल की व्यवस्था विकसित की गई।
उनका योगदान केवल गौ सेवा तक सीमित नहीं था। उन्होंने ब्रज क्षेत्र के वन, पहाड़ियों, कुंडों और जल स्रोतों को बचाने के लिए भी अभियान चलाए। गहवर वन में पेड़ों की कटाई रोकने, ब्रज की पहाड़ियों में खनन के खिलाफ आवाज उठाने और प्राचीन कुंडों के संरक्षण के लिए उन्होंने लंबे समय तक प्रयास किए। उनके संरक्षण अभियानों ने ब्रज की प्राकृतिक विरासत से जुड़े मुद्दों को व्यापक स्तर पर पहचान दिलाई। ब्रज क्षेत्र में पर्यावरण और प्राकृतिक धरोहरों के संरक्षण के साथ उन्होंने धार्मिक यात्राओं और संकीर्तन परंपरा को भी बढ़ावा दिया। उनके नेतृत्व में शुरू हुई राधारानी ब्रज यात्रा में हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होते रहे। संत रमेश बाबा का मानना था कि ब्रज की सेवा केवल मंदिरों तक सीमित नहीं है, बल्कि यहां की गाय, वन, पहाड़, जल स्रोत और संस्कृति भी संरक्षण की समान रूप से हकदार हैं।
उनके इन कार्यों को देखते हुए भारत सरकार ने वर्ष 2019 में उन्हें पद्मश्री सम्मान प्रदान किया था। उन्हें सामाजिक कार्य, गौ संरक्षण और पर्यावरण रक्षा के क्षेत्र में किए गए योगदान के लिए यह सम्मान मिला। संत रमेश बाबा के निधन की सूचना मिलते ही बरसाना स्थित मान मंदिर और आसपास के क्षेत्रों में उनके अनुयायियों का पहुंचना शुरू हो गया। संत समाज और श्रद्धालुओं ने उनके निधन को ब्रज की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक परंपरा के लिए बड़ी क्षति बताया है। जानकारी के मुताबिक, संत रमेश बाबा का
अंतिम संस्कार
7 अक्टूबर को सुबह 10 बजे गहवर वन क्षेत्र में किया जाएगा। उनके अंतिम दर्शन और श्रद्धांजलि के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। करीब सात दशकों तक ब्रज सेवा से जुड़े रहे रमेश बाबा ने अपने जीवन में भक्ति, गौ सेवा, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक सेवा को एक साथ जोड़ा। उनके निधन के बाद उनके द्वारा शुरू किए गए सेवा कार्यों, गौशाला, पर्यावरण अभियानों और धार्मिक परंपराओं को उनकी विरासत के रूप में देखा जा रहा है।
Next Story