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Hyderabad हैदराबाद : AIMIM प्रमुख और सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने गुरुवार को केंद्र सरकार से अपील की कि हज कमेटी ऑफ इंडिया द्वारा जारी उस सर्कुलर को तुरंत रद्द किया जाए, जिसमें वेस्ट एशिया में चल रहे हालात के कारण हज यात्रियों से 100 अमेरिकी डॉलर का अतिरिक्त सरचार्ज वसूलने की बात कही गई है। ओवैसी ने इस फैसले पर नाराज़गी जताते हुए इसे हज यात्रियों के लिए अनुचित बताया है।
हज यात्रा के हवाई किराए में इस साल प्रति यात्री लगभग ₹10,000 की बढ़ोतरी की गई है, जिससे कई आवेदकों में असंतोष देखा जा रहा है। राजनीतिक स्तर पर भी इस मुद्दे को लेकर प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं और कई नेताओं ने इस बढ़ोतरी की आलोचना की है।
ओवैसी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए कहा कि हज कमेटी हज यात्रियों से “डिफरेंशियल एयरफेयर” के नाम पर अतिरिक्त ₹10,000 की मांग कर रही है। उन्होंने यह भी बताया कि कुछ महीने पहले मुंबई एम्बार्केशन पॉइंट से जाने वाले प्रत्येक यात्री से ₹90,844 वसूले गए थे, जो आम अंतरराष्ट्रीय यात्रियों की तुलना में लगभग दोगुना है।
उन्होंने केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू और नागरिक उड्डयन मंत्री के. राम मोहन नायडू को टैग करते हुए सवाल उठाया कि क्या हज कमेटी के जरिए यात्रियों को दंडित किया जा रहा है। ओवैसी ने इसे “शोषण” बताते हुए कहा कि यह निर्णय अनुचित है और इसे तुरंत वापस लिया जाना चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि हज यात्रा करने वाले अधिकतर लोग सामान्य आर्थिक स्थिति से आते हैं और वे वर्षों तक बचत करके इस धार्मिक यात्रा के लिए पैसे जुटाते हैं। ऐसे में उन पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ डालना गलत है।
ओवैसी ने मांग की कि केवल सर्कुलर को वापस ही नहीं लिया जाए, बल्कि जिन यात्रियों से अतिरिक्त राशि ली गई है, उसे भी वापस किया जाना चाहिए।
दूसरी ओर, हज कमेटी द्वारा जारी सर्कुलर में कहा गया है कि यह निर्णय पश्चिम एशिया में मौजूदा परिस्थितियों और एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) की कीमतों में तेज वृद्धि को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। सर्कुलर में बताया गया है कि एयरलाइंस की ओर से बेस किराए में 100 अमेरिकी डॉलर से अधिक की वृद्धि की मांग की गई थी, जिसके बाद यह अतिरिक्त शुल्क लागू किया गया।
सरकारी पक्ष के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों और ईंधन कीमतों में उतार-चढ़ाव के कारण एयरफेयर में बदलाव करना आवश्यक हो गया था। हालांकि इस फैसले को लेकर यात्रियों और राजनीतिक नेताओं की ओर से सवाल उठ रहे हैं।
इस पूरे मामले ने हज यात्रा की लागत और उसके प्रबंधन को लेकर नई बहस शुरू कर दी है। यात्रियों के हितों और बढ़ती लागत के बीच संतुलन बनाए रखने की चुनौती एक बार फिर सामने आई है।
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