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दिल्ली: देश में चुनाव प्रक्रिया और मतदाता सूची को लेकर सियासी टकराव बढ़ता जा रहा है। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ अपना विरोध जारी रखने का फैसला किया है। विपक्ष सोमवार, 12 अक्टूबर को दिल्ली में एक और मार्च निकालने की तैयारी कर रहा है। कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने रविवार को इसकी जानकारी दी। इस दौरान विपक्षी सांसदों के जंतर-मंतर पहुंचने की भी संभावना है।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने बताया कि राहुल गांधी सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत से मुलाकात करना चाहते हैं। इसके लिए सोमवार शाम चार से पांच बजे के बीच का समय मांगा गया है। हालांकि, मुलाकात का समय मिलने की पुष्टि अभी नहीं हुई है। खड़गे के मुताबिक, विपक्ष मुख्य न्यायाधीश के सामने चुनाव व्यवस्था और लोकतांत्रिक संस्थाओं को लेकर अपनी चिंताएं रखेगा। कांग्रेस का आरोप है कि केंद्र सरकार चुनाव आयोग की स्वतंत्रता को प्रभावित कर रही है। पार्टी लगातार मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों का मुद्दा भी उठा रही है।
चार दिनों तक दिल्ली में चला विरोध प्रदर्शन
विपक्ष का यह नया कार्यक्रम पिछले सप्ताह हुए प्रदर्शनों के बाद सामने आया है। छह से नौ अक्टूबर के बीच कांग्रेस और INDIA गठबंधन के सांसदों ने दिल्ली में अलग-अलग जगह विरोध जताया था।
इन प्रदर्शनों में राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा भी शामिल हुए। कई मौकों पर पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को निर्धारित स्थान से आगे बढ़ने से रोका। इस दौरान राहुल और प्रियंका को हिरासत में भी लिया गया।
छह अक्टूबर को विपक्षी सांसदों ने संसद से चुनाव आयोग के कार्यालय की ओर मार्च करने की कोशिश की थी। पुलिस के रोकने के बाद प्रदर्शनकारियों ने धरना दिया। सात अक्टूबर को जंतर-मंतर की ओर बढ़ रहे नेताओं को भी सुरक्षा बलों ने रास्ते में रोक दिया।
राजघाट से राष्ट्रपति तक पहुंचा विवाद
आठ अक्टूबर को विपक्षी नेताओं ने महात्मा गांधी की समाधि राजघाट पहुंचकर श्रद्धांजलि दी। इससे पहले सुरक्षा व्यवस्था के कारण उन्हें कुछ समय इंतजार करना पड़ा था। नौ अक्टूबर को राहुल गांधी ने राष्ट्रपति से हुई बातचीत का जिक्र करते हुए कहा कि विपक्ष ने कथित वोट चोरी से जुड़े मुद्दे उठाए हैं। उनके अनुसार, राष्ट्रपति ने इन आरोपों पर सबूत मांगे थे।
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि जब तक चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर उनके सवालों का संतोषजनक जवाब नहीं मिलता, विरोध जारी रहेगा। विपक्ष मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग भी कर रहा है।
मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर विवाद जारी है। विपक्ष ने नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। वहीं, एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले दस महीनों में SIR से जुड़े मामलों पर कम से कम 14 बार आपत्तियां दर्ज कराई थीं।
रिपोर्ट में चुनावी डेटा, सॉफ्टवेयर तक पहुंच, फॉर्म-6 में बदलाव और जिम्मेदारियों के बंटवारे से जुड़े मतभेदों का भी उल्लेख किया गया है। हालांकि, इन दावों को आधिकारिक निष्कर्ष नहीं माना जा सकता।
सोमवार के कार्यक्रम पर टिकी नजर
अब राजनीतिक हलकों में सोमवार के घटनाक्रम को लेकर उत्सुकता है। विपक्ष के मार्च में कितने दल शामिल होंगे और क्या राहुल गांधी को मुख्य न्यायाधीश से मिलने का समय मिलेगा, यह देखना महत्वपूर्ण होगा। फिलहाल कांग्रेस अपने आरोपों को लेकर सरकार और चुनाव आयोग पर दबाव बढ़ाने की कोशिश कर रही है। दूसरी ओर, मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों और चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर उठ रहे सवालों के बीच संबंधित संस्थाओं का पक्ष भी अहम है। इन आरोपों की निष्पक्ष समीक्षा और तथ्यों की स्पष्टता लोकतांत्रिक प्रक्रिया में जनता का भरोसा बनाए रखने के लिए जरूरी है।
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