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ऑपरेशन सिंदूर, पाकिस्तान की भारत ने खोली सारी पोल

jantaserishta.com
8 May 2025 6:06 PM IST
ऑपरेशन सिंदूर, पाकिस्तान की भारत ने खोली सारी पोल
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नई दिल्ली: विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने दोहराया कि भारत की कार्रवाई केवल आतंक के ढांचों को ध्वस्त करने तक सीमित थी, हमने नागरिकों या सैन्य प्रतिष्ठानों पर नहीं, बल्कि सिर्फ आतंकियों के ठिकानों पर हमला किया. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के सूचना मंत्री द्वारा यह कहना कि हमारे यहां कोई आतंकी नहीं हैं, पूरी तरह से झूठ और भ्रामक है. पाकिस्तान आज भी वैश्विक आतंकवाद का केंद्र है. ओसामा बिन लादेन वहीं मिला और पाकिस्तान ने उसे 'शहीद' कहा था. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की 'संयुक्त जांच' की पेशकश एक बार फिर से समय खींचने की और खुद को बचाने की रणनीति है. भारत ने 26/11 और पठानकोट जैसे हमलों की जांच में सहयोग किया, लेकिन पाकिस्तान ने मामलों को ठंडे बस्ते में डाल दिया.

विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने प्रेस ब्रीफिंग के दौरान कहा कि सीमा पार से हमारे खिलाफ बहुत सी गलत सूचनाएं दी गई हैं, कुछ बातें ध्यान में रखने लायक हैं जैसे इसमें तनाव बढ़ने का जिक्र किया जा रहा है. लेकिन पहली बात ये है कि पहलगाम में हुआ हमला तनाव बढ़ने की पहली वजह है, भारतीय सेना ने कल उसका जवाब दिया है. उन्होंने कहा कि ‘द रेजिस्टेंस फ्रंट’ (TRF) समूह लश्कर-ए-तैयबा का जाना-माना मोर्चा है. जिसने पहलगाम हमले की जिम्मेदारी ली थी, हम इस संबंध में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) को सभी जानकारियां मुहैया करा रहे हैं. TRF के बारे में अपडेट लगातार दिए जा रहे हैं. विक्रम मिसरी ने एक चौंकाने वाला खुलासा करते हुए कहा कि जब UNSC के बयान में TRF का नाम शामिल करने की बात आई, तो केवल पाकिस्तान ने इसका विरोध किया और नाम हटवाया. यह स्पष्ट संकेत है कि पाकिस्तान अब भी इन आतंकी समूहों को ढाल और समर्थन दे रहा है.

MEA की प्रेस ब्रीफिंग के दौरान कर्नल सोफिया कुरैशी ने कहा कि 07 मई 2025 को ऑपरेशन सिंदूर पर प्रेस ब्रीफिंग के दौरान भारत ने अपनी प्रतिक्रिया को केंद्रित, मापा हुआ और गैर-बढ़ावा देने वाला बताया था. यह विशेष रूप से उल्लेख किया गया था कि पाकिस्तानी सैन्य प्रतिष्ठानों को निशाना नहीं बनाया गया था. यह भी दोहराया गया था कि भारत में सैन्य ठिकानों पर कोई भी हमला उचित जवाब को आमंत्रित करेगा. 07-08 मई 2025 की रात को पाकिस्तान ने ड्रोन और मिसाइलों का उपयोग करके अवंतीपुरा, श्रीनगर, जम्मू, पठानकोट, अमृतसर, कपूरथला, जालंधर, लुधियाना, आदमपुर, बठिंडा, चंडीगढ़, नाल, फलोदी, उत्तरलाई और भुज सहित उत्तरी और पश्चिमी भारत में कई सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने का प्रयास किया. इन्हें इंटीग्रेटेड काउंटर यूएएस ग्रिड और वायुरक्षा प्रणालियों द्वारा निष्प्रभावी कर दिया गया. इन हमलों के मलबे अब कई स्थानों से बरामद किए जा रहे हैं जो पाकिस्तानी हमलों को साबित करते हैं.
ऑपरेशन सिंदूर पर MEA की प्रेस ब्रीफिंग हुई. इस दौरान कर्नल सोफिया कुरैशी ने कहा कि हमने सैन्य ठिकानों को निशाना नहीं बनाया. हमने पहले ही पाकिस्तान को चेतावनी दी थी. उन्होंने कहा कि हमने पाकिस्तानी हमलों को नाकाम किया.
उड़ा दिया पाक का एयर डिफेंस सिस्टम HQ-9
8 मई 2025 को लाहौर में HQ-9 वायु रक्षा प्रणाली को भारत ने उस ड्रोन से मारा, जिसका उपयोग इजरायल अपने दुश्मनों के खिलाफ करता है. इस हमले को भारत द्वारा किए गए एक सटीक और रणनीतिक हमले के रूप में देखा जा रहा है, जिसने पाकिस्तान की वायु रक्षा क्षमता को बड़ा झटका दिया.
HQ-9 चीन द्वारा निर्मित एक उन्नत लंबी दूरी की सतह-से-हवा मिसाइल प्रणाली माना जाता है. पाकिस्तान की वायु रक्षा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है. इस हमले में ड्रोन ने सटीकता के साथ लक्ष्य को नष्ट किया, जिसके परिणामस्वरूप पाकिस्तानी वायु रक्षा प्रणाली को भारी नुकसान हुआ. इस हमले ने लाहौर को वायु रक्षा के मामले में असुरक्षित बना दिया, जिससे पाकिस्तान की सैन्य रणनीति पर गंभीर सवाल उठे.
पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ ने दावा किया कि इस हमले में चार सैनिक घायल हुए. सैन्य ठिकाने को आंशिक नुकसान पहुंचा. हालांकि, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कई पोस्ट्स में दावा किया गया कि HQ-9 मिसाइल लॉन्चर लगभग पूरी तरह नष्ट हो गया, जिससे लाहौर की वायु रक्षा प्रणाली गंभीर रूप से कमजोर हो गई.
ऑपरेशन सिंदूर और ड्रोन हमले का संबंध
यह हमला ऑपरेशन सिंदूर-1 का हिस्सा या उसका विस्तार माना जा रहा है, जिसमें भारत ने 7 मई 2025 को पाकिस्तान और PoK में नौ आतंकी ठिकानों पर हमले किए थे. ऑपरेशन सिंदूर-1 में हैमर, स्कैल्प, और अन्य प्रेसिशन हथियारों का उपयोग किया गया था.
यह हमला ऑपरेशन सिंदूर का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य पाकिस्तान की सैन्य क्षमता को कमजोर करना और आतंकी संगठनों जैसे हाफिज सईद के नेतृत्व वाले समूहों को निशाना बनाना हो सकता है.
पाकिस्तान की प्रतिक्रिया
पाकिस्तानी सेना ने दावा किया कि उसने 12 भारतीय ड्रोनों को मार गिराया, जिनमें से एक ने लाहौर के पास सैन्य ठिकाने पर हमला किया. पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता ने कहा कि भारत को इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी. पाकिस्तान ने लाहौर, कराची, इस्लामाबाद, और सियालकोट सहित चार हवाई अड्डों पर उड़ानें निलंबित कर दीं.
इसके अलावा, पंजाब प्रांत में सभी शैक्षणिक संस्थानों को बंद कर दिया गया. पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कहा कि देश "हर तरह से जवाब देने का अधिकार रखता है," जिससे एक व्यापक संघर्ष की आशंका बढ़ गई.
हालांकि हारोप ड्रोन की पहचान सबसे विश्वसनीय मानी जा रही है, कुछ स्रोतों ने अन्य ड्रोनों, जैसे स्काईस्ट्राइकर की संभावना जताई गई है. स्काईस्ट्राइकर, जो एक अन्य इजरायली लॉइटरिंग म्युनिशन है, भी भारत के शस्त्रागार में मौजूद है. हालांकि, इसकी रेंज (20-100 किमी) और विशेषताएं HQ-9 जैसे उच्च-मूल्य लक्ष्य के लिए हारोप की तुलना में कम उपयुक्त हैं. इसलिए, हारोप की संभावना अधिक है.
एयर डिफेंस सिस्टम एस-400
भारत और पाकिस्तान के बीच सीमा पर हालात अब बेकाबू होते दिख रहे हैं. पहलगाम आतंकी हमले का हिसाब बराबर करने के लिए भारतीय सेना ने ऑपरेशन सिंदूर लॉन्च किया और पाकिस्तान, पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में आतंकी ठिकानों पर मिसाइल स्ट्राइक की थी. भारत ने साफ किया था कि हमारा मकसद ना आम लोगों और ना ही पाकिस्तानी सेना को निशाना बनाने का था, बल्कि हम सिर्फ आतंकी ठिकानों पर निशाना कर रहे थे. लेकिन पाकिस्तान इसके बाद भी नहीं माना और उसने भारत पर हमला करना शुरू कर दिया.
पाकिस्तान पहले ही LoC से सटे गांवों पर गोलीबारी कर रहा था, जहां कई आम नागरिकों की जान भी चली गई. इस बीच 7-8 मई की देर रात को पाकिस्तान की ओर से भारत के कई शहरों पर मिसाइल, ड्रोन अटैक करने की कोशिश की गई. भारत सरकार ने जानकारी दी है कि पाकिस्तान ने भारत के कुल 15 शहरों पर हमला करने की कोशिश की थी, लेकिन भारत के एयर डिफेंस सिस्टम ने पाकिस्तान के हर हमले को नाकाम कर दिया.
भारत ने ये कमाल अपने एयर डिफेंस सिस्टम एस-400 से किया है, जिसका नाम 'सुदर्शन चक्र'' रखा गया है. भारत पिछले कुछ समय से अपने डिफेंस सिस्टम को मज़बूत करने में लगा हुआ था और आज इसने सारा पैसा वसूल भी कर दिया. रूस निर्मित इस डिफेंस सिस्टम की ताकत क्या है, हम आपको यहां पर विस्तार से समझाते हैं.
दरअसल, भारत ने साल 2018 में रूस के साथ एस-400 प्रणाली के 5 स्क्वॉड्रन के लिए लगभग ₹35,000 करोड़ के सौदे पर साइन किए थे. यह उन्नत वायु रक्षा प्रणाली भारत के रणनीतिक स्थानों की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है और ऐसा ही इसने पाकिस्तान द्वारा किए गए ड्रोन, मिसाइल अटैक को विफल करने में किया है. भारत ने देश के अलग-अलग हिस्सों में इस सिस्टम को तैनात किया है, जो चीन और पाकिस्तान की सीमा से सटे हुए हैं ताकि किसी भी बुरे वक्त में इनका इस्तेमाल किया जा सके.
एस-400 एयर डिफेंस मिसाइल सिस्टम को आप इस तरह भी समझ सकते हैं कि ये हथियार नहीं महाबली है. इसके सामने किसी की भी साजिश नहीं चलती है. यह आसमान से घात लगाकर आते हमलावर को पलभर में राख में बदल देता है. एस-400 मिसाइल सिस्टम को दुनिया की सबसे सक्षम मिसाइल प्रणाली माना जाता है. पाकिस्तान और चीन भारत के लिए हमेशा से चुनौती रहे हैं. भारत का इन देशों से युद्ध भी हो चुका है. शक्ति का संतुलन बनाए रखने के लिए ऐसी मिसाइल प्रणाली की देश को जरूरत थी.
S-400 एक बार में एक साथ 72 मिसाइल छोड़ सकता है. इसकी सबसे खास बात ये है कि इस एयर डिफेंस सिस्टम को कहीं मूव करना बहुत आसान है क्योंकि इसे 8X8 के ट्रक पर माउंट किया जा सकता है. S-400 को नाटो द्वारा SA-21 Growler लॉन्ग रेंज डिफेंस मिसाइल सिस्टम भी कहा जाता है. माइनस 50 डिग्री से लेकर माइनस 70 डिग्री तक तापमान में काम करने में सक्षम इस मिसाइल को नष्ट कर पाना दुश्मन के लिए बहुत मुश्किल है. क्योंकि इसकी कोई फिक्स पोजीशन नहीं होती. इसलिए इसे आसानी से डिटेक्ट नहीं कर सकते.
S-400 मिसाइल सिस्टम में एक दो नहीं बल्कि पूरी 4 तरह की मिसाइलें होती हैं जिनकी रेंज 40, 100, 200, और 400 किलोमीटर तक होती है. यह सिस्टम 100 से लेकर 40 हजार फीट तक उड़ने वाले हर टारगेट को पहचान कर नष्ट कर सकता है. एस-400 मिसाइल सिस्टम (S-400 Air Defence Missile System) का रडार बहुत अत्याधुनिक और ताकतवर है.
इसकी एक ताकत ये भी है कि इसका रडार 600 किलोमीटर तक की रेंज में करीब 300 टारगेट ट्रैक कर सकता है. यह सिस्टम मिसाइल, एयरक्राफ्ट या फिर ड्रोन से हुए किसी भी तरह के हवाई हमले से निपटने में सक्षम है. शीतयुद्ध के दौरान रूस और अमेरिका में हथियार बनाने की होड़ मची हुई थी. जब रूस अमेरिका जैसी मिसाइल नहीं बना सका तो उसने ऐसे सिस्टम पर काम करना शुरू किया जो इन मिसाइलों को टारगेट पर पहुंचने पर पहले ही खत्म कर दे.
1967 में रूस ने एस-200 प्रणाली विकसित की. ये एस सीरीज की पहली मिसाइल थी. साल 1978 में एस-300 को विकसित किया गया. एस-400 साल 1990 में ही विकसित कर ली गई थी. साल 1999 में इसकी टेस्टिंग शुरू हुई. इसके बाद 28 अप्रैल 2007 को रूस ने पहली एस-400 मिसाइल सिस्टम को तैनात किया गया, जिसके बाद मार्च 2014 में रूस ने यह एडवांस सिस्टम चीन को दिया. 12 जुलाई 2019 को तुर्की को इस सिस्टम की पहली डिलीवरी कर दी.
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