भारत

Operation Sindoor: लोअर एयरस्पेस का मास्टर प्लान! ऐसे भारत ने दुश्मन को दिया सरप्राइज

SHIDDHANT
25 Aug 2026 8:15 PM IST
Operation Sindoor: लोअर एयरस्पेस का मास्टर प्लान! ऐसे भारत ने दुश्मन को दिया सरप्राइज
x
ऑपरेशन सिंदूर का सीक्रेट प्लान
Delhi दिल्ली। पूर्व चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल अनिल चौहान ने ऑपरेशन सिंदूर की रणनीति को लेकर बड़ा खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि इस अभियान में भारतीय सशस्त्र बलों ने जानबूझकर लोअर एयरस्पेस यानी कम ऊंचाई वाले हवाई क्षेत्र का इस्तेमाल किया। इसका उद्देश्य संघर्ष की सीमा को नियंत्रित रखना, सफलता की संभावना बढ़ाना और दुश्मन को अचानक चौंकाना था। जनरल अनिल चौहान के मुताबिक, ऑपरेशन सिंदूर के लिए लोअर एयरस्पेस का चयन एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा था। उन्होंने कहा कि इससे पहले उरी हमले के बाद जमीनी कार्रवाई और पुलवामा हमले के बाद बड़े हवाई हमलों का विकल्प अपनाया गया था। लेकिन इस बार सेना ने अलग रणनीति के तहत कम ऊंचाई वाले हवाई क्षेत्र का उपयोग किया। उन्होंने बताया कि लोअर एयरस्पेस में ड्रोन, लॉयटरिंग म्यूनिशन, अटैक हेलीकॉप्टर और कम ऊंचाई पर सटीक हमला करने वाले प्लेटफॉर्म काम करते हैं। इस तकनीक के जरिए सेना को लक्ष्य तक पहुंचने में मदद मिली और अभियान को प्रभावी तरीके से अंजाम दिया गया।
तीनों सेनाओं में रहा बेहतर तालमेल
पूर्व CDS ने ऑपरेशन सिंदूर में तीनों सेनाओं के बीच शानदार तालमेल की बात कही। उन्होंने कहा कि इस बार सेना, नौसेना और वायुसेना ने एकजुट होकर काम किया। किसी भी तरह की कमी या चुनौती को आंतरिक स्तर पर ही दूर किया गया और राजनीतिक नेतृत्व के सामने एक संयुक्त एवं तैयार योजना पेश की गई। जनरल चौहान ने कहा कि यह संयुक्तता यानी जॉइंटनेस का उदाहरण है। तीनों सेनाओं का एक साथ काम करना भविष्य के सैन्य अभियानों के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
पुरानी रणनीतियों से अलग था ऑपरेशन
जनरल चौहान ने बताया कि उरी और पुलवामा के बाद अपनाए गए तरीकों से ऑपरेशन सिंदूर की रणनीति अलग थी। इस बार बड़े स्तर के हमले की जगह ऐसी रणनीति अपनाई गई, जिससे जोखिम कम रहा और लक्ष्य हासिल करने की संभावना बढ़ी। उन्होंने कहा कि आधुनिक युद्ध में तकनीक और बेहतर समन्वय की भूमिका लगातार बढ़ रही है। ड्रोन और सटीक हथियारों जैसी नई तकनीकों के इस्तेमाल से सैन्य अभियान ज्यादा प्रभावी और लचीले हो रहे हैं। पूर्व CDS के इस बयान से यह साफ होता है कि ऑपरेशन सिंदूर में सैन्य नेतृत्व ने रणनीतिक योजना, तकनीकी क्षमता और तीनों सेनाओं के तालमेल को प्राथमिकता दी। यह भविष्य के अभियानों के लिए एक नई दिशा के रूप में देखा जा रहा है।
Next Story