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वीर बाल दिवस पर PM मोदी ने किया साहिबज़ादों के साहस और बलिदान का स्मरण

Shantanu Roy
26 Dec 2025 2:15 PM IST
वीर बाल दिवस पर PM मोदी ने किया साहिबज़ादों के साहस और बलिदान का स्मरण
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New Delhi. नई दिल्ली। 26 दिसंबर 2025 को वीर बाल दिवस के अवसर पर राजधानी नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शिरकत की और बड़ी संख्या में उपस्थित स्कूली बच्चों व युवाओं को संबोधित किया। अपने उद्बोधन में प्रधानमंत्री ने गुरु गोबिंद सिंह जी के चारों साहिबज़ादों के अद्वितीय साहस, त्याग और बलिदान को याद करते हुए कहा कि उनका बलिदान देश की आने वाली पीढ़ियों को सदैव प्रेरित करता रहेगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि साहिबज़ादों का बलिदान केवल इतिहास की घटना नहीं, बल्कि भारत की आत्मा और मूल विचारों का प्रतीक है। उन्होंने कहा, “साहिबज़ादों का बलिदान सबको याद रखना चाहिए। वे मुगलों के आगे नहीं झुके। उन्होंने अत्याचार, अन्याय और मज़हबी कट्टरता के सामने अपने सिद्धांतों से कोई समझौता नहीं किया।”



प्रधानमंत्री ने स्कूली बच्चों और युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि कार्यक्रम में ‘मेरा युवा भारत’ संगठन से जुड़े बड़ी संख्या में युवा मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि आज की पीढ़ी ‘जेन-ज़ी’ और ‘जेन-अल्फा’ है और यही पीढ़ी भारत को विकसित भारत के लक्ष्य तक ले जाएगी। पीएम मोदी ने कहा, “उम्र से कोई छोटा या बड़ा नहीं होता। इंसान अपने कामों और उपलब्धियों से बड़ा बनता है। कम उम्र में भी ऐसे कार्य किए जा सकते हैं, जो पूरे समाज और देश के लिए प्रेरणा बन जाएं।”

प्रधानमंत्री ने वीर बाल दिवस को भावना और श्रद्धा से भरा दिन बताते हुए कहा कि साहिबज़ादा अजीत सिंह, साहिबज़ादा जुझार सिंह, साहिबज़ादा जोरावर सिंह और साहिबज़ादा फतेह सिंह को बहुत कम उम्र में उस समय की सबसे बड़ी सत्ता से टकराना पड़ा। उन्होंने कहा कि यह संघर्ष केवल सत्ता का नहीं था, बल्कि भारत के मूल विचारों और मज़हबी कट्टरता के बीच की लड़ाई थी। यह सत्य बनाम असत्य की लड़ाई थी। पीएम मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि एक ओर दशम गुरु श्री गुरु गोबिंद सिंह जी थे, तो दूसरी ओर क्रूर औरंगजेब की हुकूमत थी। उन्होंने कहा कि साहिबज़ादे उम्र में छोटे जरूर थे, लेकिन औरंगजेब और उसकी सत्ता उन्हें डिगा नहीं सकी। उन्होंने कहा, “औरंगजेब और उसके सेनापतियों ने यह भूल कर दी थी कि हमारे गुरु कोई साधारण मनुष्य नहीं थे।

वे तप और त्याग के साक्षात अवतार थे। वही विरासत वीर साहिबज़ादों को मिली थी।” प्रधानमंत्री ने कहा कि पूरी मुगलिया बादशाहत के दबाव और अत्याचार के बावजूद चारों साहिबज़ादों में से एक भी अपने धर्म, सत्य और आत्मसम्मान से नहीं डिगा। यही कारण है कि आज भी उनका बलिदान पूरे देश को साहस, संकल्प और राष्ट्रभक्ति की प्रेरणा देता है। कार्यक्रम के दौरान सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से साहिबज़ादों के जीवन और बलिदान को प्रभावशाली ढंग से दर्शाया गया। प्रधानमंत्री ने अंत में कहा कि वीर बाल दिवस का उद्देश्य बच्चों और युवाओं को अपने इतिहास से जोड़ना और उन्हें देश के लिए समर्पण की भावना से प्रेरित करना है।
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