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Delhi दिल्ली: लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि भारत ने 1947 में 175 करोड़ रुपये के शुरुआती बजट के साथ विकास यात्रा की शुरुआत की थी। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता के बाद देश की शिक्षा व्यवस्था ने न केवल पारंपरिक मूल्यों को संरक्षित किया, बल्कि आधुनिक विकास की चुनौतियों का भी सफलतापूर्वक सामना किया।
एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए Om Birla ने कहा कि भारत की शिक्षा प्रणाली शुरू से ही गुणवत्ता पर आधारित रही है और इसने नवाचार को बढ़ावा दिया है। उन्होंने कहा कि यह प्रणाली देश की सांस्कृतिक, भौगोलिक और सामाजिक मूल्यों से जुड़ी रही है, जिससे छात्रों का सर्वांगीण विकास संभव हुआ।
ओम बिरला ने आगे कहा कि आजादी के बाद विशेष रूप से 1950 के दशक में विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों ने देश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने कहा कि इन संस्थानों ने न केवल पारंपरिक शिक्षा को मजबूत किया बल्कि देश के बुनियादी ढांचे और विकास की चुनौतियों से निपटने में भी योगदान दिया।
उन्होंने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (IITs) की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि आईआईटी देश की प्रगति की एक मजबूत नींव साबित हुए हैं। इनके माध्यम से देश में तकनीकी शिक्षा और अनुसंधान को नई दिशा मिली है, जिससे भारत वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बना सका है। कार्यक्रम में उन्होंने शिक्षा व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाने तथा नवाचार को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
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