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Bhubaneswar भुवनेश्वर। ओडिशा पुलिस ने नक्सलवाद के खिलाफ अपनी लगातार चल रही कार्रवाई में एक बड़ा मील का पत्थर हासिल किया है। पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) योगेश बहादुर खुरानिया ने आधिकारिक तौर पर बोलांगीर और बरगढ़ जिलों को नक्सल-मुक्त जिले घोषित कर दिया है। यह घोषणा राज्य में एंटी-नक्सल अभियानों की सफलता का प्रतीक है और केंद्र सरकार के 2026 तक पूरे देश से नक्सलवाद खत्म करने के लक्ष्य से जुड़ी है।
डीजीपी खुरानिया ने प्रेस नोट में बताया कि आज छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में, जो बरगढ़ जिले से सटा हुआ है, 15 माओवादियों ने हथियार डालकर मुख्यधारा में शामिल होने का फैसला किया। ये कैडर बरगढ़-बोलांगीर-महासमुंद (बीबीएम) डिविजन में सक्रिय थे। इनके सरेंडर के साथ ही दोनों जिलों से नक्सल गतिविधियां पूरी तरह समाप्त हो गई हैं। सरेंडर करने वाले कैडरों में वरिष्ठ नेता भी शामिल थे, जिन पर लाखों रुपए का इनाम था।
डीजीपी ने इस सफलता का श्रेय लंबे समय तक चलाए गए संयुक्त ऑपरेशनों, सटीक खुफिया जानकारी, केंद्र और राज्य सुरक्षा बलों के समन्वित प्रयासों और स्थानीय लोगों के सक्रिय सहयोग को दिया। उन्होंने कहा, "यह बड़ी कामयाबी पुलिस बल की हिम्मत, संयम और दृढ़ संकल्प की वजह से संभव हुई है।" उन्होंने ऑपरेशन में शामिल सभी अधिकारियों और जवानों को बधाई दी और जनता के भरोसे व निरंतर समर्थन के लिए आभार जताया।
ओडिशा में हाल के महीनों में नक्सल विरोधी अभियान तेज हुए हैं। कई जिलों जैसे नुआपाड़ा, नवरंगपुर, मलकांगिरी, कोरापुट और बौध को पहले ही नक्सल-मुक्त घोषित किया जा चुका है। गांधमर्दन पहाड़ियों (बरगढ़ और बोलांगीर में फैली) में माओवादियों की मौजूदगी को खत्म करने के लिए विशेष अभियान चलाए गए। सीआरपीएफ और राज्य की स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) की अतिरिक्त टुकड़ियों को तैनात किया गया। सरेंडर पॉलिसी और पुनर्वास कार्यक्रमों ने भी कई माओवादियों को मुख्यधारा में लौटने के लिए प्रेरित किया।
डीजीपी खुरानिया ने जोर दिया कि राज्य के बाकी प्रभावित इलाकों में इसी तरह के तेज अभियान जारी रहेंगे। केंद्र सरकार का लक्ष्य मार्च 2026 तक ओडिशा और पूरे देश को नक्सल-मुक्त बनाने का है, और ओडिशा पुलिस इस दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। इस घोषणा से स्थानीय निवासियों में सुरक्षा की भावना मजबूत हुई है और विकास कार्यों को नई गति मिलेगी। नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में अब बुनियादी सुविधाएं, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएं बेहतर ढंग से पहुंच सकेंगी।
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