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OMG! एक नंबर का सदमा...इस परिवार के साथ कुछ ऐसा हुआ जिसने सबको झकझोर दिया
jantaserishta.com
4 Sept 2025 5:20 PM IST

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सांकेतिक तस्वीर
जानें स्टोरी.
देवरिया: कुछ घटनाएं ऐसी होती हैं जो सिर्फ पढ़ने भर से नहीं, बल्कि महसूस करने पर दिल को झकझोर देती हैं. देवरिया जिले के मड़कड़ा मिश्र गांव में एक परिवार के साथ कुछ ऐसा हुआ जिसने सुना उसका दिल दुख गया. दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय से MSC गणित कर रहे आयुष मिश्रा के पिता मुरलीधर मिश्रा यूनिवर्सिटी पहुंचे थे, सिर्फ यह जानने के लिए कि उनके बेटे को इंटरनल मार्क्स में एक अंक क्यों दिया गया.
पूरे साल मेहनत करने और लगातार अच्छे अंकों के बाद भी आयुष के लिए यह अंक ऐसा झटका था, जिसे पिता सहन नहीं कर सके. कुर्सी पर बैठते ही पिता मुरलीधर मिश्रा का दिल सहम गया, और वह गिर पड़े. एक पिता की उम्मीद, एक बेटे की मेहनत और शिक्षा व्यवस्था की ठोस दीवार के बीच टकराहट ने इस परिवार को सदमे में डाल दिया.
आयुष मिश्रा, जो जनपद देवरिया के भलुअनी थाना क्षेत्र के मड़कड़ा मिश्र गांव के रहने वाले हैं, DDU गोरखपुर विश्वविद्यालय में MSC गणित के चौथे सेमेस्टर के छात्र हैं. पहले सेमेस्टर में 78%, दूसरे में 80%, तीसरे में 85% अंक हासिल करने के बाद भी उनकी मेहनत चौथे सेमेस्टर में केवल एक अंक के कारण फेल हो गई. क्लासिकल मैकेनिक्स के 75 अंक के एग्जाम में आयुष ने 34 अंक प्राप्त किए, जबकि 25 अंकों के इंटरनल में उन्हें सिर्फ एक अंक दिया गया. परिवार का कहना है कि यह अंक जानबूझकर कम दिया गया. क्योंकि विश्वविद्यालय के नियमों के अनुसार, 25 अंक के इंटरनल में 5 अंक अटेंडेंस के होते हैं, जिसमें कम से कम 3 अंक दिए जाने चाहिए. 6 महीने के सेमेस्टर में तीन बार टेस्ट लिया जाता है, जिसमें छात्र की प्रगति आंकी जाती है और बेहतर दो अंकों में से एक अंक छात्र को मिलता है. आरोप है कि एक महिला प्रोफेसर ने जानबूझकर आयुष को कम अंक दिए, जबकि आईटीआई में भी उनका अंक कम दिखा. इससे छात्र फेल हो गया और परिवार को गहरा आघात पहुंचा.
17 जुलाई को कम अंक मिलने की शिकायत पर विभागाध्यक्ष से आवेदन किया गया, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई. 27 अगस्त को छात्र के रिश्तेदार कुलपति से मिले, पर हल नहीं निकला. इसके बाद MLC देवेंद्र प्रताप सिंह ने वीसी को चिट्ठी लिखी. 1 सितंबर को आयुष और उनके पिता विश्वविद्यालय पहुंचे. पिता मुरलीधर मिश्रा का उद्देश्य बस इतना था कि उनके बेटे को सही अंक दिए जाएं. लेकिन प्रशासन ने साफ मना कर दिया. इस नकारात्मक उत्तर को सुनते ही पिता कुर्सी पर बैठते हुए गिर पड़े. आनन-फानन में छात्रों ने एम्बुलेंस बुलाई और मेडिकल कॉलेज भेजा, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया. परिवार का आरोप है कि बिना पोस्टमार्टम शव सौंप दिया गया.
पीड़ित परिवार के बड़े भाई गोपाल मिश्रा ने कहा कि वे अंतिम संस्कार में व्यस्त थे, लेकिन वे विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर से मिलकर जांच की मांग करेंगे. उनका कहना है कि तीन प्रोफेसरों की भूमिका की जांच होनी चाहिए.
स्थानीय लोग और सोशल मीडिया पर लोग इस घटना से स्तब्ध हैं. यह मामला केवल एक छात्र या पिता की त्रासदी नहीं है, बल्कि शिक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक पक्षपात की पोल खोलता है. लोग पूछ रहे हैं कि कैसे एक छात्र को इतने कम अंक देकर फेल किया जा सकता है, जबकि उसने पूरे साल मेहनत की थी और सभी मानदंड पूरे किए थे. हालांकि जब यूनिवर्सिटी के परीक्षा नियंत्रक डॉक्टर कुलदीप सिंह से फोन पर सम्पर्क करने की कोशिश की गई लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया.
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