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Sundarbans सुंदरबन: केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री ने हाल ही में सुंदरबन में राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) और प्रोजेक्ट एलीफेंट की बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में पूरे देश में बाघ और हाथी संरक्षण के लिए बनाई गई रणनीतियों की समीक्षा की गई और उनकी प्रभावशीलता पर चर्चा की गई। बैठक में विभिन्न राज्यों के वन अधिकारी, वैज्ञानिक, संरक्षण विशेषज्ञ और परियोजना प्रबंधक उपस्थित थे। केंद्रीय मंत्री ने सभी उपस्थितों को राष्ट्रीय स्तर पर बाघ और हाथी की संख्या बढ़ाने के प्रयासों की महत्वपूर्णता पर जोर देते हुए कहा कि जैव विविधता के इस अनमोल संसाधन की सुरक्षा न केवल पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने के लिए आवश्यक है, बल्कि यह पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए भी अहम है।
बैठक में NTCA और प्रोजेक्ट एलीफेंट की हाल की रिपोर्टों और आंकड़ों पर विस्तार से चर्चा हुई। बाघों की संख्या में आए उतार-चढ़ाव, अवैध शिकार के मामलों और वन्य जीव तस्करी की स्थिति का विश्लेषण किया गया। इसके अलावा हाथियों के आवास, उनके आवागमन के रास्तों और मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के उपायों पर भी विशेष ध्यान दिया गया। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि देश में बाघों और हाथियों की सुरक्षा के लिए राज्यों के बीच समन्वय और स्थानीय समुदायों की भागीदारी बेहद आवश्यक है। उन्होंने जोर देकर कहा कि जंगलों और पारिस्थितिक तंत्र की सुरक्षा के लिए केवल वन विभाग पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है। स्थानीय लोगों को संरक्षण के महत्व और उनके योगदान के बारे में जागरूक करना जरूरी है।
बैठक में हाल ही में सुंदरबन में लागू किए गए संरक्षण उपायों का भी मूल्यांकन किया गया। इसमें जंगलों में स्मार्ट कैमरा ट्रैप, जीपीएस ट्रैकिंग, संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षा गश्त और हाथियों के मार्ग सुरक्षित रखने के लिए बनाए गए नए मार्ग शामिल थे। मंत्री ने कहा कि इन तकनीकी और रणनीतिक उपायों का उद्देश्य बाघ और हाथियों की संख्या बढ़ाना और उनके आवास को सुरक्षित बनाना है। साथ ही, केंद्रीय मंत्री ने प्रोजेक्ट एलीफेंट और NTCA के लिए अतिरिक्त बजटीय आवंटन, प्रशिक्षण कार्यक्रमों और जनसहभागिता अभियानों की आवश्यकता पर भी बल दिया। उन्होंने कहा कि इन उपायों से वन्य जीवों की सुरक्षा के साथ-साथ स्थानीय लोगों को रोजगार और आर्थिक अवसर भी मिलेंगे।
बैठक के दौरान राज्यों को निर्देश दिया गया कि वे बाघ और हाथी संरक्षण योजनाओं को प्रभावी बनाने के लिए डेटा संग्रह, नियमित मॉनिटरिंग और त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करें। साथ ही मंत्री ने कहा कि मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए गांवों और जंगल के सीमावर्ती क्षेत्रों में सामुदायिक जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाएं। बैठक का समापन केंद्रीय मंत्री द्वारा धन्यवाद ज्ञापन और सभी उपस्थितों को बाघ और हाथी संरक्षण के राष्ट्रीय प्रयासों में सक्रिय योगदान देने के लिए प्रेरित करने के साथ हुआ। उन्होंने कहा कि जैव विविधता संरक्षण सिर्फ वन्य जीवों के लिए नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी अनिवार्य है।
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