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बच्चों की थाली में अब मछली, स्कूलों के मिड-डे मील में बड़ा बदलाव

nidhi
26 Sept 2026 10:24 AM IST
बच्चों की थाली में अब मछली, स्कूलों के मिड-डे मील में बड़ा बदलाव
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स्कूलों के मिड-डे मील में अब मिलेगी मछली
पुडुचेरी: सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के मिड-डे मील में अब मछली को शामिल करने की तैयारी की जा रही है। पुडुचेरी सरकार ने मिड-डे मील में मछली से बने व्यंजन उपलब्ध कराने के लिए पायलट परियोजना शुरू करने का फैसला किया है। शुरुआती चरण में पुडुचेरी और यानम क्षेत्र के चुनिंदा सरकारी स्कूलों में इसे लागू किया जाएगा।
लोक निर्माण एवं मत्स्य मंत्री मल्लाडी कृष्ण राव की अध्यक्षता में विधानसभा परिसर में हुई उच्चस्तरीय बैठक में इस प्रस्ताव पर चर्चा हुई। बैठक में मरीन प्रोडक्ट्स एक्सपोर्ट डेवलपमेंट अथॉरिटी (MPEDA) के चेयरमैन पी. जवाहर समेत मत्स्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे। अधिकारियों को योजना पर आगे की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं।
पहले पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरुआत
फिलहाल यह व्यवस्था सभी सरकारी स्कूलों में एक साथ लागू नहीं होगी। योजना को पहले पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू किया जाएगा। रिपोर्ट के मुताबिक पुडुचेरी और यानम में एक-एक सरकारी स्कूल से शुरुआत करने का फैसला किया गया है। पायलट परियोजना के परिणाम और व्यवस्थाओं का आकलन करने के बाद इसे आगे बढ़ाया जा सकता है। पुडुचेरी सरकार की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार केंद्र शासित प्रदेश के विद्यार्थियों के लिए पहले से मिड-डे मील और ब्रेकफास्ट जैसी योजनाएं संचालित की जा रही हैं। अब भोजन में मछली को शामिल करने का प्रस्ताव बच्चों के लिए उपलब्ध भोजन में एक नया विकल्प जोड़ सकता है।
स्थानीय मछली के इस्तेमाल पर जोर
पायलट योजना में स्थानीय स्तर पर उपलब्ध मछलियों का उपयोग करने पर जोर दिया जा रहा है। इसका उद्देश्य स्कूली बच्चों के भोजन में विविधता लाने के साथ स्थानीय मत्स्य संसाधनों के इस्तेमाल को भी बढ़ावा देना है।
मछली को प्रोटीन समेत कई पोषक तत्वों का स्रोत माना जाता है। पुडुचेरी के स्वास्थ्य विभाग की जानकारी में भी मछली को आयरन और विटामिन-ए उपलब्ध कराने वाले खाद्य स्रोतों में शामिल किया गया है।
मछली से बने व्यंजन देने की योजना
प्रस्ताव में केवल सामान्य मछली की डिश ही नहीं, बल्कि स्थानीय मछली से तैयार किए गए वैल्यू-एडेड उत्पादों को भी शामिल करने पर विचार किया जा रहा है। रिपोर्टों के अनुसार फिश फिंगर्स और फिश बॉल्स जैसे व्यंजन तैयार करने की संभावना पर चर्चा हुई है। इसके लिए स्कूलों में भोजन तैयार करने वाली महिला कर्मचारियों को प्रशिक्षण देने की भी योजना है। MPEDA तकनीकी सहयोग और प्रशिक्षण उपलब्ध करा सकता है। हालांकि व्यापक स्तर पर योजना लागू करने से पहले स्कूल शिक्षा विभाग को आगे की प्रक्रिया पूरी करनी होगी और स्कूल प्रबंधन समितियों से भी चर्चा की जाएगी।
मछुआरों को भी मिल सकता है फायदा
इस पहल को केवल बच्चों के भोजन तक सीमित नहीं रखा गया है। बैठक में पुडुचेरी, कराईकल और यानम में मत्स्य संसाधनों को बढ़ाने, मछली निर्यात को प्रोत्साहित करने, रोजगार के अवसर पैदा करने और मत्स्य आधारित उद्योगों को विकसित करने पर भी चर्चा हुई। बहूर और कराईकल के पोलागम औद्योगिक क्षेत्र में फिशरीज पार्क स्थापित करने का प्रस्ताव भी सामने आया। योजना सफल रहती है तो भविष्य में अधिक सरकारी स्कूलों तक इसका विस्तार किया जा सकता है। फिलहाल सरकार का कदम पायलट स्तर पर है और आगे का विस्तार इसके क्रियान्वयन तथा समीक्षा के आधार पर होगा।
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