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‘न्यायपालिका पर दबाव नहीं बना सकता कोई’, एसआईआर विवाद पर सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी

jantaserishta.com
15 Oct 2026 4:20 PM IST
‘न्यायपालिका पर दबाव नहीं बना सकता कोई’, एसआईआर विवाद पर सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी
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नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने एसआईआर को चुनौती देने वाली विपक्षी नेताओं की याचिका पर चुनाव आयोग और संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी किया है। याचिका में बिना उचित सूचना और सुनवाई के मतदाताओं के नाम हटाए जाने पर सवाल उठाए गए हैं। सुनवाई के दौरान अदालत ने न्यायपालिका पर दबाव बनाने की कोशिशों पर टिप्पणी की। वहीं, दिल्ली में विरोध-प्रदर्शनों से जुड़े मामलों में भी कोर्ट ने निर्देश दिए।
मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर का विवाद अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। गुरुवार को अदालत ने राहुल गांधी के नेतृत्व में विपक्षी नेताओं की ओर से दायर याचिका पर निर्वाचन आयोग और संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी किया। कोर्ट ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू व विवेक जोशी से भी जवाब मांगा है।
याचिका में चुनाव आयोग की ओर से मतदाता सूची में किए जा रहे विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया और कथित तौर पर मतदाताओं के नाम हटाए जाने को चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ताओं ने इस प्रक्रिया की न्यायिक जांच कराने की मांग की है।
बिना सूचना नाम हटाने पर उठाए सवाल
याचिका में सुप्रीम कोर्ट से यह जांचने की मांग की गई है कि चुनाव आयोग के फैसले संविधान के अनुच्छेद 324, चुनाव आयुक्तों से जुड़े 2023 के कानून और टी.एन. शेषन बनाम भारत संघ मामले में दिए गए फैसले के अनुरूप हैं या नहीं।
याचिकाकर्ताओं की प्रमुख मांग है कि किसी भी मतदाता का नाम हटाने से पहले उसे इसकी जानकारी दी जाए और अपना पक्ष रखने का उचित मौका मिले। इसके साथ ही, जिन लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं, उनकी सूची मतदान केंद्र के हिसाब से सार्वजनिक करने का निर्देश देने की मांग भी की गई है। इस सूची में नाम हटाने की वजह और संबंधित मतदाताओं का जनसांख्यिकीय विवरण शामिल करने की बात कही गई है।
याचिकाकर्ता के आचरण पर अदालत की टिप्पणी
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने 13 याचिकाकर्ताओं में से एक के व्यवहार पर भी आपत्ति जताई। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि अदालत संबंधित याचिकाकर्ता से उसके आचरण के बारे में सवाल करना चाहेगी।
सुनवाई के दौरान राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं के एसआईआर में कथित अनियमितताओं के विरोध में सुप्रीम कोर्ट तक मार्च करने का मुद्दा भी उठा। इस पर मुख्य न्यायाधीश ने स्पष्ट कहा कि कोई भी न्यायपालिका पर दबाव नहीं बना सकता।
वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव भाटिया ने राजनीतिक जुलूस और उससे जुड़े घटनाक्रम पर आपत्ति जताई। उन्होंने बताया कि करीब 200 वकीलों ने दबाव बनाने की कोशिश के विरोध में एक ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि अदालत बाहर होने वाली घटनाओं से अनजान नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि न्यायपालिका को अलग-थलग समझना गलत है और अदालत बाहर दिए जाने वाले बयानों से भी परिचित है।
याचिका में कई विपक्षी नेता शामिल
इस मामले में याचिका दायर करने वालों में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव, राजद नेता तेजस्वी प्रसाद यादव, एनसीपी (एसपी) की सुप्रिया सुले और शिवसेना (यूबीटी) के संजय राउत समेत कई नेता शामिल हैं।
यह याचिका 12 अक्टूबर को दाखिल की गई थी। शुरुआत में मौजूद प्रक्रियात्मक कमियों को दूर करने के बाद सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री ने 13 अक्टूबर को इसे पंजीकृत किया। अदालत ने चुनाव आयोग से जुड़े अन्य मामलों पर भी केंद्र सरकार और संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किए। साथ ही, एक जैसी राहत मांगने वाली याचिकाओं को एक साथ रखने का निर्देश दिया।
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में हो रहे विरोध-प्रदर्शनों से संबंधित याचिकाओं पर भी टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि उसके सामने आने वाले हर व्यक्ति की बात महत्वपूर्ण है और सभी पक्षों को अपनी बात रखने का अवसर मिलेगा।
इसके साथ ही, जंतर-मंतर को विरोध-प्रदर्शन के निर्धारित स्थल के रूप में सूची से हटाने के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस से जवाब मांगा गया। सुनवाई के दौरान अदालत ने एक महिला पत्रकार के मामले में भी निर्देश दिया। इस पत्रकार ने प्रदर्शन की कवरेज के दौरान दिल्ली पुलिस के एसीपी विवेक भगत पर यौन हमले और दुर्व्यवहार का आरोप लगाया था।
सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस को निर्देश दिया कि संबंधित याचिका पर विचार होने तक महिला पत्रकार के खिलाफ कोई कार्रवाई न की जाए। इस तरह अदालत ने एसआईआर विवाद, विरोध-प्रदर्शनों और उनसे जुड़े मामलों की सुनवाई के दौरान अपना रुख स्पष्ट किया।
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