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अगले आदेश तक वक्फ में कोई नई नियुक्ति नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को दिया एक सप्ताह का समय

jantaserishta.com
17 April 2025 2:23 PM IST
अगले आदेश तक वक्फ में कोई नई नियुक्ति नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को दिया एक सप्ताह का समय
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नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को सुनवाई के दौरान वक्फ कानून पर केंद्र सरकार को 7 दिन की मोहलत दी. केंद्र को एक हफ्ते के भीतर इस पर जवाब देने को कहा है. केंद्र का जवाब आने तक वक्फ संपत्ति की स्थिति नहीं बदलेगी. सरकार के जवाब तक यथास्थिति बनी रहेगी. इसके साथ ही अगले आदेश तक नई नियुक्तियां नहीं होगी.

सुप्रीम कोर्ट 5 मुख्य आपत्तियों पर ही सुनवाई करेगा
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि 110 से 120 फाइलें पढ़ना संभव नहीं हैं. ऐसे में ऐसे पांच बिंदु तय करने होंगे. सिर्फ 5 मुख्य आपत्तियों पर ही सुनवाई होगी. याचिकाकर्ता मुख्य बिंदुओं पर सहमति बनाएं. नोडल काउंसिल के जरिए इन आपत्तियों को तय कीजिए. कोर्ट ने केंद्र को जवाब देने के लिए एक हफ्ते का समय दिया है. तब तक वक्फ बोर्ड और परिषद में नई नियुक्ति नहीं होगी. इसके साथ ही तय समय तक वक्फ बाय यूजर में बदलाव नहीं होगा.
5 मई को होगी अगली सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगले आदेश तक वक्फ के स्टेट्स में कोई बदलाव नहीं होगा. मामले में अगली सुनवाई पांच मई को होगी. इस दौरान केवल 5 रिट याचिकाकर्ता ही कोर्ट में उपस्थित रहेंगे. अदालत ने साफ कहा है कि सभी पक्ष आपस में तय करें कि उनकी पांच आपत्तियां क्या हैं?
क्या है वक्फ कानून?
लोकसभा और राज्यसभा से पास होने के बाद 5 अप्रैल को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने वक्फ (संशोधन) बिल को मंजूरी दी थी. इसके बाद 8 अप्रैल को केंद्र सरकार ने इसकी अधिसूचना भी जारी कर दी थी और अब यह कानून लागू हो चुका है. वक्फ (संशोधन) कानून में कई अहम बदलाव किए गए हैं. नए कानून में सेंट्रल वक्फ काउंसिल और वक्फ बोर्ड में दो गैर-मुस्लिम और दो महिला सदस्यों की नियुक्ति का प्रावधान भी किया गया है. इसके साथ ही 'वक्फ बाय यूजर' के प्रावधान को भी खत्म कर दिया है. अब अगर किसी संपत्ति पर सालों से कोई इस्लामिक इमारत बनी है तो उसे वक्फ की संपत्ति घोषित नहीं किया जा सकता. अब कोई भी संपत्ति तभी वक्फ की संपत्ति मानी जाएगी, जब उसके वैध और कानूनी दस्तावेज होंगे.
वक्फ कानून में एक बड़ा बदलाव भी यह भी किया है कि अब कोई भी मुस्लिम व्यक्ति तभी अपनी संपत्ति को वक्फ के लिए दे सकता है, जब वह कम से कम 5 साल से इस्लाम का पालन कर रहा होगा. इसके अलावा सर्वे का अधिकार भी अब कलेक्टर को दे दिया गया है. एक और बड़ा बदलाव इसमें यह भी किया गया है कि अब तक अगर किसी संपत्ति को लेकर विवाद होता था, तो उसे सिर्फ ट्रिब्यूनल में ही चुनौती दी जा सकती थी और ट्रिब्यूनल का फैसला ही आखिरी होता था. लेकिन नए कानून के बाद इसे ऊपरी अदालत या हाईकोर्ट में भी चुनौती दी जा सकती है.
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