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मई की गर्मी को लेकर घबराने की जरूरत नहीं, आईएमडी के पूर्वानुमानों का करें पालन: डॉ. जितेंद्र सिंह

jantaserishta.com
2 May 2026 5:38 PM IST
मई की गर्मी को लेकर घबराने की जरूरत नहीं, आईएमडी के पूर्वानुमानों का करें पालन: डॉ. जितेंद्र सिंह
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नई दिल्ली: केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने शनिवार को कहा कि मई में पड़ने वाली संभावित गर्मी को लेकर घबराने की कोई जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि मौसम विभाग (आईएमडी) की भविष्यवाणियों और सामान्य सावधानियों का पालन करके अनावश्यक प्रतिक्रिया से बचा जा सकता है।
एक आधिकारिक बयान के अनुसार, दक्षिणी प्रायद्वीपीय भारत, पूर्वोत्तर और उत्तर-पश्चिम भारत के कुछ हिस्सों में सामान्य से अधिक तापमान और हीटवेव (लू) की स्थिति देखने को मिल सकती है। हालांकि, देश के अधिकांश हिस्सों में सामान्य या उससे कम तापमान रहने की संभावना है।
डॉ. सिंह ने लोगों से अपील की कि वे पर्याप्त पानी पिएं, दिन के सबसे गर्म समय में लंबे समय तक धूप में रहने से बचें और अपने आसपास के कमजोर लोगों का ध्यान रखें। उन्होंने कहा कि आईएमडी के दैनिक अपडेट और प्रभाव-आधारित पूर्वानुमानों का पालन करने से स्वास्थ्य जोखिमों को कम किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि कई क्षेत्रों में न्यूनतम तापमान भी सामान्य से अधिक रहने की संभावना है, जैसा कि आईएमडी की नवीनतम मासिक और विस्तारित अवधि की रिपोर्ट में बताया गया है।
मंत्री ने कहा कि समय पर तैयारी और मौसम विभाग की सलाह का पालन करके हीटवेव की स्थिति को प्रभावी ढंग से नियंत्रित किया जा सकता है। आईएमडी के अनुसार, हिमालयी क्षेत्रों, पूर्वी तट के कुछ हिस्सों (ओडिशा, तटीय आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु), गुजरात और महाराष्ट्र में हीटवेव की स्थिति बनने की संभावना है। इन क्षेत्रों में सामान्य से 2-4 दिन अधिक लू चल सकती है।
मई के दूसरे और चौथे सप्ताह में तापमान ज्यादा रहने की संभावना है, जिससे उत्तर-पश्चिम, मध्य और पश्चिम भारत तथा पूर्वी तट के कुछ हिस्सों में गर्मी की स्थिति और गंभीर हो सकती है। मंत्री ने यह भी कहा कि कुछ समय में रात के तापमान में बढ़ोतरी भी गर्मी की परेशानी को बढ़ा सकती है, खासकर शहरी और तटीय क्षेत्रों में। पूर्वी तट, गुजरात और महाराष्ट्र में गर्म और उमस भरा मौसम रहने की संभावना है।
उन्होंने कहा कि वर्तमान परिस्थितियां उत्तर और उत्तर-पश्चिम भारत में रबी फसलों की कटाई के लिए सामान्य रूप से अनुकूल हैं। हालांकि, दक्षिण और पूर्वोत्तर भारत के कुछ हिस्सों में गर्मी के कारण धान (बोरो), मक्का और दालों जैसी फसलों पर असर पड़ सकता है।
किसानों को सलाह दी गई है कि वे खेतों के काम सुबह और शाम के समय करें, हल्की और नियमित सिंचाई करें और पशुओं की सुरक्षा के उपाय अपनाएं। मंत्री ने कहा कि सरकार गर्मी से जुड़ी स्थितियों से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है। राज्य और जिला स्तर पर समन्वित प्रयास किए जा रहे हैं ताकि पीने के पानी की उपलब्धता, ठंडा रखने की व्यवस्था और बिजली की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके, खासकर बच्चों, बुजुर्गों और बाहर काम करने वाले लोगों के लिए।
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