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आंदोलन का हक है लेकिन ‘हीरो’ बनाना स्वीकार नहीं
MUMBAI मुंबई। महाराष्ट्र के मंत्री नितेश राणे ने विरोध-प्रदर्शन के अधिकार को लेकर बयान देते हुए उमर खालिद का जिक्र किया है। राणे ने कहा कि लोकतंत्र में हर व्यक्ति को आंदोलन करने का अधिकार है, लेकिन आंदोलन के नाम पर उमर खालिद को “हीरो” बनाने की कोशिश को वे स्वीकार नहीं करेंगे। राणे की टिप्पणी ऐसे समय सामने आई है, जब 2 अक्टूबर को मुंबई में प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज है। प्रदर्शन से जुड़े आयोजकों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे समेत कई मांगें उठाई हैं। मुंबई पुलिस ने प्रस्तावित प्रदर्शन के लिए अनुमति नहीं दी है।
मीडिया से बातचीत के दौरान नितेश राणे ने कहा, “हर किसी को आंदोलन करने का हक है। पर उसके नाम पर उमर खालिद को हीरो बनाते रहोगे, तो हम सहन नहीं करेंगे।” यह उनका राजनीतिक बयान है और इसे उसी संदर्भ में देखा जा रहा है। उमर खालिद 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों से जुड़े कथित बड़ी साजिश के मामले में आरोपी हैं। उन पर गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी UAPA के तहत आरोप लगाए गए हैं। 30 सितंबर 2026 को दिल्ली हाईकोर्ट ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी। मामला अभी न्यायिक प्रक्रिया में है और आरोपों पर अंतिम निर्णय अदालत को करना है।
मुंबई में प्रस्तावित प्रदर्शन को लेकर राणे ने आयोजकों के कुछ सोशल मीडिया पोस्ट पर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने महात्मा गांधी और छत्रपति शिवाजी महाराज से जुड़ी कथित तस्वीरों के इस्तेमाल पर आपत्ति जताई और पूछा कि इसके पीछे आयोजकों का क्या संदेश है। यह आरोप राणे की ओर से लगाया गया है।
दूसरी ओर प्रदर्शन से जुड़े संगठनों का कहना है कि उनका आंदोलन चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त से संबंधित मांगों को लेकर है। आयोजकों ने विरोध जारी रखने की बात कही है।राणे के बयान के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर उमर खालिद और विरोध प्रदर्शन के अधिकार को लेकर बहस तेज हो गई है। एक तरफ प्रदर्शन के अधिकार का सवाल है, तो दूसरी तरफ राणे ने आंदोलन के मंच से उमर खालिद के समर्थन पर आपत्ति जताई है।
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