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मिडिल ईस्ट
Delhi दिल्ली: मिडिल ईस्ट में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बीच वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने देश की अर्थव्यवस्था को बाहरी झटकों से बचाने के लिए सरकार की रणनीति स्पष्ट की है। मुंबई में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि सरकार का फिलहाल ध्यान ‘3Fs’ यानी Fuel (ईंधन), Fertiliser (उर्वरक) और Forex (विदेशी मुद्रा) के प्रबंधन पर केंद्रित है। उन्होंने कहा कि कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों से पेट्रोल-डीजल महंगे हो रहे हैं, जिसका असर अन्य वस्तुओं की कीमतों पर भी पड़ रहा है। सरकार का प्रयास है कि आम लोगों पर बोझ कम से कम पड़े। वित्त मंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उस अपील का भी समर्थन किया जिसमें विदेशी मुद्रा बचाने और गैर-जरूरी आयात, खासकर सोने के आयात को कम करने की बात कही गई थी।
भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा कच्चा तेल आयातक देश है और वैश्विक संकट का सीधा असर घरेलू बाजार पर पड़ रहा है। ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी से माल ढुलाई और महंगाई पर दबाव बढ़ा है। साथ ही एक्साइज ड्यूटी में कटौती के कारण वित्तीय वर्ष 2026-27 में सरकार को करीब 1 लाख करोड़ रुपये के राजस्व नुकसान का अनुमान है। वित्त मंत्री ने MSME सेक्टर की स्थिति पर भी चिंता जताई। उन्होंने PSU कंपनियों को निर्देश दिया कि छोटे उद्योगों के बकाये का भुगतान 45 दिनों के भीतर किया जाए, क्योंकि देरी से करीब 8.1 लाख करोड़ रुपये की राशि अटकी हुई है, जिससे लिक्विडिटी प्रभावित हो रही है। उन्होंने कहा कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत है और किसी भी तरह की घबराहट फैलाने से बचना चाहिए।
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