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दिल्ली-NCR में गाड़ियों और ऑफिस पर लगी नई पाबंदियां, हवा में सुधार, फिर भी क्यों लागू हुआ विंटर प्लान?
jantaserishta.com
1 Nov 2026 1:51 PM IST

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नई दिल्ली: दिल्ली-NCR में सर्दियों के दौरान बढ़ने वाले वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए 1 नवंबर से नए नियम लागू कर दिए गए हैं। अब दिल्ली के बाहर रजिस्टर्ड BS-VI से कम उत्सर्जन मानक वाली गाड़ियां राजधानी में प्रवेश नहीं कर सकेंगी। इसके अलावा सरकारी और निजी कंपनियों के कार्यालयों में 50% कर्मचारियों को घर से काम करना होगा। कुछ सार्वजनिक पार्किंग में गाड़ियों को खड़ा करने की फीस भी दोगुनी कर दी गई है।
इन फैसलों का मकसद सर्दियों में सड़कों पर वाहनों की संख्या और उनसे निकलने वाले धुएं को कम करना है। खास बात यह है कि इस बार प्रदूषण का स्तर गंभीर होने का इंतजार किए बिना पहले से तय तारीख पर प्रतिबंध लागू किए गए हैं। हालांकि, दिल्ली की हवा की गुणवत्ता के आंकड़ों में इस साल कुछ राहत भी देखने को मिली है। केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय के मुताबिक, अक्टूबर 2026 में दिल्ली का औसत एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 166 रहा। साल 2018 के बाद अक्टूबर महीने में यह सबसे कम औसत स्तर है।
1 नवंबर से 28 फरवरी तक लागू रहेगा विंटर प्लान
दिल्ली सरकार ने जुलाई 2026 में सर्दियों के प्रदूषण से निपटने के लिए विंटर पॉल्यूशन एक्शन प्लान को मंजूरी दी थी। इसके तहत हर साल 1 नवंबर से 28 फरवरी तक प्रदूषण नियंत्रण के लिए अलग-अलग उपाय लागू किए जाएंगे। इस योजना में वाहनों के इस्तेमाल, दफ्तरों में काम करने के तरीके और पार्किंग व्यवस्था से जुड़े कदम शामिल हैं। इस बार भी 1 नवंबर से इन नियमों को लागू कर दिया गया है।
पहले प्रदूषण बढ़ने के बाद GRAP के तहत पाबंदियां लगाई जाती थीं। यानी हवा की स्थिति बिगड़ने पर प्रशासन अलग-अलग चरणों में कार्रवाई करता था। लेकिन नए विंटर प्लान के तहत कुछ प्रतिबंध पहले से तय हैं। इससे प्रदूषण का स्तर बढ़ने से पहले ही उसे नियंत्रित करने की कोशिश की जाएगी।
दिल्ली में किन वाहनों और दफ्तरों पर लागू होंगे नियम?
नए प्रतिबंधों का असर दिल्ली के बाहर से आने वाले वाहनों और राजधानी में काम करने वाले कर्मचारियों पर पड़ेगा।
- पुरानी गाड़ियों पर रोक: दिल्ली के बाहर रजिस्टर्ड BS-VI से कम उत्सर्जन मानक वाली गाड़ियां राजधानी में प्रवेश नहीं कर सकेंगी।
- वर्क फ्रॉम होम: सरकारी और निजी कंपनियों के कार्यालयों में आधे कर्मचारियों को घर से काम करना होगा।
- पार्किंग फीस में बढ़ोतरी: कई सार्वजनिक पार्किंग स्थलों पर गाड़ी खड़ी करने का शुल्क दोगुना कर दिया गया है।
इन उपायों के जरिए निजी वाहनों का इस्तेमाल कम करने और सड़कों पर ट्रैफिक का दबाव घटाने की कोशिश की जा रही है।
क्या है GRAP, प्रदूषण बढ़ने पर कैसे लगती हैं पाबंदियां?
GRAP यानी ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान दिल्ली-NCR में वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने की व्यवस्था है। इसे जनवरी 2017 में लागू किया गया था। इसका उद्देश्य हवा की गुणवत्ता खराब होने पर प्रदूषण के स्तर के अनुसार तुरंत कदम उठाना है। इसके तहत AQI के आधार पर चार चरण बनाए गए हैं। जैसे-जैसे प्रदूषण बढ़ता है, प्रतिबंध भी सख्त होते जाते हैं। इन उपायों में निर्माण गतिविधियों पर रोक, वाहनों से जुड़े प्रतिबंध और दूसरे प्रदूषणकारी कामों पर नियंत्रण जैसे कदम शामिल हो सकते हैं। नए विंटर प्लान और GRAP में मुख्य अंतर यह है कि विंटर प्लान के कुछ उपाय तय तारीख से लागू होंगे, जबकि GRAP की पाबंदियां हवा की स्थिति के आधार पर लगाई जाती हैं।
8 साल में अक्टूबर की सबसे बेहतर हवा, 220 दिन AQI 200 से नीचे
केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली में इस साल जनवरी से अक्टूबर के बीच 220 दिन ऐसे रहे, जब हवा की गुणवत्ता अच्छी से संतोषजनक श्रेणी में दर्ज की गई। इन दिनों दैनिक औसत AQI 200 से कम रहा।
पिछले वर्षों के आंकड़ों से तुलना करें तो यह संख्या अधिक है।
आंकड़ों के मुताबिक, 2026 में AQI 200 से कम रहने वाले दिनों की संख्या 220 रही, जो 2025 के 200 दिनों से अधिक है। वहीं, 2024 में ऐसे 201 दिन और 2023 में 206 दिन दर्ज किए गए।
वहीं, इस साल जनवरी से अक्टूबर के दौरान 84 दिन ऐसे रहे, जब हवा खराब से गंभीर श्रेणी में थी। इन दिनों AQI 200 से ऊपर दर्ज किया गया। पिछले वर्षों में ऐसे दिनों की संख्या इससे ज्यादा रही थी। 2025 और 2024 में 104-104 दिन, 2023 में 98 दिन और 2022 में 144 दिन हवा खराब से गंभीर श्रेणी में रही थी।
प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए आगे की चुनौती
आंकड़ों से पता चलता है कि दिल्ली की हवा की गुणवत्ता में पिछले कुछ वर्षों के मुकाबले सुधार हुआ है। लेकिन सर्दियों में तापमान गिरने, हवा की गति कम होने और अलग-अलग स्रोतों से निकलने वाले प्रदूषण के कारण स्थिति फिर बिगड़ सकती है।
ऐसे में सरकार के सामने चुनौती केवल प्रतिबंध लागू करने की नहीं, बल्कि उनका प्रभावी पालन कराने की भी है। वाहनों से होने वाला प्रदूषण कम करने, निर्माण स्थलों पर धूल रोकने और औद्योगिक उत्सर्जन पर नियंत्रण जैसे कदम भी जरूरी होंगे। विंटर प्लान का वास्तविक असर आने वाले महीनों में दिल्ली की हवा के स्तर से साफ होगा।
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