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ब्रह्मपुत्र का नया रूप, सीएम सरमा बोले, समुद्री भारत विजन 2030’ की ओर कदम

SHIDDHANT
7 Nov 2025 8:25 PM IST
ब्रह्मपुत्र का नया रूप, सीएम सरमा बोले, समुद्री भारत विजन 2030’ की ओर कदम
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Assam असम: मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने शुक्रवार को गुवाहाटी में ब्रह्मपुत्र नदी के किनारे बने नए गुवाहाटी गेटवे टर्मिनल और जेट्टी का जिक्र करते हुए इसे राज्य के लिए ऐतिहासिक कदम बताया। उन्होंने कहा कि यह परियोजना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “समुद्री भारत विजन 2030” का अहम हिस्सा है, जो पूर्वोत्तर भारत में विकास, व्यापारिक संपर्क और जलमार्ग परिवहन के नए युग की शुरुआत करेगी। मुख्यमंत्री सरमा ने एक्स (ट्विटर) पर पोस्ट किया, “जगमगाता गुवाहाटी। गुवाहाटी गेटवे टर्मिनल और जेट्टी के साथ ब्रह्मपुत्र अब एक नए अवतार में चमक रही है। यह प्रधानमंत्री मोदी के समुद्री भारत विजन 2030 के तहत विकास और कनेक्टिविटी के नए युग का प्रतीक है।”
उन्होंने कहा कि यह पहल न केवल असम, बल्कि पूरे पूर्वोत्तर क्षेत्र को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक गलियारों से जोड़ने में मदद करेगी। इस टर्मिनल के माध्यम से ब्रह्मपुत्र नदी को इनलैंड वॉटर ट्रांसपोर्ट (IWT) के रूप में विकसित किया जा रहा है, जिससे सड़क और रेल परिवहन पर निर्भरता कम होगी। परियोजना के तहत गुवाहाटी से हल्दीया, कोलकाता और बांग्लादेश के बंदरगाहों तक जलमार्ग कनेक्टिविटी को मजबूत करने की योजना है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे असम को न केवल आर्थिक लाभ मिलेगा, बल्कि पर्यटन, व्यापार और औद्योगिक निवेश को भी नई गति मिलेगी।
सीएम सरमा ने कहा कि यह टर्मिनल असम के लिए “विकास का गेटवे” साबित होगा। उन्होंने बताया कि नदी किनारे का वाटरफ्रंट क्षेत्र आकर्षक प्रकाश व्यवस्था और हरित संरचना के साथ तैयार किया गया है, जो गुवाहाटी को एक आधुनिक नदी-शहर (River City) के रूप में स्थापित करेगा। उन्होंने केंद्र सरकार और शिपिंग मंत्रालय के सहयोग के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह परियोजना “विकसित भारत 2047” के विजन में भी महत्वपूर्ण योगदान देगी।
स्थानीय निवासियों ने भी इस पहल का स्वागत किया है और कहा कि ब्रह्मपुत्र के इस रूपांतरण से शहर की सुंदरता और आर्थिक गतिविधियां दोनों बढ़ेंगी। सरकार की योजना है कि भविष्य में इसी मॉडल को डिब्रूगढ़, जोरसिंग, तेजपुर और धुबरी जैसे अन्य नदी तटों पर भी लागू किया जाएगा, जिससे ब्रह्मपुत्र एक आर्थिक जीवनरेखा बन सके।
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