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कावेरी इंजन को नया जीवन, भारत बढ़ा 6वीं पीढ़ी के फाइटर की ओर

Saba Naaz
20 July 2026 5:56 PM IST
कावेरी इंजन को नया जीवन, भारत बढ़ा 6वीं पीढ़ी के फाइटर की ओर
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भारत: भारत के स्वदेशी कावेरी जेट इंजन प्रोजेक्ट को लगभग 18 साल बाद एक नई दिशा मिलती दिखाई दे रही है। तेजस लड़ाकू विमान कार्यक्रम से बाहर होने के बाद लंबे समय तक चुनौतियों से जूझने वाले कावेरी इंजन को अब भविष्य की सैन्य जरूरतों के लिए फिर से विकसित किया जा रहा है। हाल ही में सफल आफ्टरबर्नर परीक्षण और भारत को रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की कोशिशों के बीच यह परियोजना एक बार फिर चर्चा में आ गई है।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने DRDO के वैज्ञानिकों को अगले पांच से सात वर्षों में छठी पीढ़ी के फाइटर इंजन विकसित करने का लक्ष्य दिया है। उन्होंने कहा कि दुनिया के विकसित देशों को अत्याधुनिक फाइटर इंजन तैयार करने में कई दशक लगते हैं, लेकिन भारत को कम समय में इस दिशा में तेजी से आगे बढ़ना होगा। इसी लक्ष्य के तहत कावेरी इंजन की तकनीक को और उन्नत बनाने पर जोर दिया जा रहा है।

मूल कावेरी इंजन परियोजना को वर्ष 1989 में तेजस लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट के लिए स्वदेशी आफ्टरबर्निंग टर्बोफैन इंजन बनाने के उद्देश्य से शुरू किया गया था। इस परियोजना की जिम्मेदारी DRDO की गैस टर्बाइन रिसर्च एस्टेब्लिशमेंट (GTRE) को दी गई थी। शुरुआत में उम्मीद थी कि यह इंजन कुछ वर्षों में तैयार हो जाएगा, लेकिन तकनीकी चुनौतियों के कारण इसमें काफी देरी हुई।

तेजस विमान के लिए जरूरी 83 से 85 किलो न्यूटन थ्रस्ट के मुकाबले कावेरी इंजन लगभग 70 से 72 किलो न्यूटन थ्रस्ट ही हासिल कर पाया। इसके अलावा इंजन का वजन भी अधिक था और टर्बाइन ब्लेड, इंजन कंट्रोल सिस्टम जैसी कई तकनीकी समस्याओं का सामना करना पड़ा। अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों और भारत में उच्च ऊंचाई पर इंजन परीक्षण सुविधाओं की कमी ने भी इस परियोजना को प्रभावित किया।

आखिरकार वर्ष 2008 में कावेरी इंजन को तेजस कार्यक्रम से अलग कर दिया गया और तेजस विमानों में विदेशी इंजन का इस्तेमाल किया जाने लगा। हालांकि, भारत ने इस परियोजना को पूरी तरह खत्म नहीं किया। कावेरी से विकसित तकनीकों को आगे बढ़ाते हुए नए इंजन और रक्षा प्रणालियों पर काम जारी रखा गया।

अब कावेरी 2.0 के रूप में इस इंजन को नए स्वरूप में विकसित किया जा रहा है। इसका लक्ष्य करीब 81 से 83 किलो न्यूटन थ्रस्ट पैदा करना है, जो भविष्य के लड़ाकू विमानों की जरूरतों के काफी करीब है। इस उन्नत इंजन का इस्तेमाल भारत के भविष्य के लड़ाकू विमान और मानव रहित स्टेल्थ ड्रोन कार्यक्रमों में किया जा सकता है।

कावेरी इंजन का एक अन्य संस्करण ‘ड्राई कावेरी’ भी विकसित किया जा रहा है, जिसे भारत के घातक स्टेल्थ ड्रोन के लिए उपयोगी माना जा रहा है। यह इंजन बिना आफ्टरबर्नर के लगभग 49 से 51 किलो न्यूटन थ्रस्ट पैदा करने में सक्षम है और इसके ऊंचाई परीक्षण भी पूरे किए जा चुके हैं।

कावेरी परियोजना से विकसित तकनीक का इस्तेमाल केवल हवाई क्षेत्र तक सीमित नहीं है। इसी तकनीकी अनुभव के आधार पर कावेरी मरीन गैस टर्बाइन भी विकसित किया गया है, जिसने नौसेना परीक्षणों के दौरान करीब 12 मेगावाट यानी 16 हजार हॉर्सपावर की शक्ति उत्पन्न की है।

वर्तमान समय में भारत अपने कई प्रमुख सैन्य विमानों के लिए विदेशी इंजनों पर निर्भर है। तेजस Mk-1 और Mk-1A में अमेरिकी कंपनी जनरल इलेक्ट्रिक के F404 इंजन का इस्तेमाल किया जाता है, जबकि तेजस Mk-2 और AMCA के शुरुआती प्रोटोटाइप के लिए GE F414 इंजन चुना गया है। हाल ही में विदेशी इंजन आपूर्ति में देरी के कारण विमान उत्पादन प्रभावित हुआ था, जिससे स्वदेशी इंजन की जरूरत और ज्यादा महसूस हुई।

भारत की भविष्य की उम्मीदें अब AMCA यानी एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट से जुड़ी हैं। शुरुआत में AMCA के कुछ प्रोटोटाइप विदेशी इंजन के साथ उड़ान भर सकते हैं, लेकिन लंबे समय का लक्ष्य इसे पूरी तरह स्वदेशी इंजन से लैस करना है।

कावेरी इंजन भले ही तेजस को उड़ाने में सफल नहीं हो पाया, लेकिन इस परियोजना ने भारत को एयरो इंजन तकनीक, टर्बाइन डिजाइन, डिजिटल कंट्रोल सिस्टम और मेटलर्जी के क्षेत्र में महत्वपूर्ण अनुभव दिया है। अब यही अनुभव भारत के भविष्य के छठी पीढ़ी के फाइटर इंजन की नींव बन सकता है।

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