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न्याय की नई पहल: सुप्रीम कोर्ट अधिवक्ता ठाकुर निश्चय सिंह ने Machagora Dam विस्थापितों की लड़ाई संभाली

Shantanu Roy
21 July 2025 12:30 AM IST
न्याय की नई पहल: सुप्रीम कोर्ट अधिवक्ता ठाकुर निश्चय सिंह ने Machagora Dam विस्थापितों की लड़ाई संभाली
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Chhindwara. छिंदवाड़ा। छिंदवाड़ा जिले में वर्षों से न्याय से वंचित किसानों की लड़ाई को आज एक नई दिशा मिली, जब सुप्रीम कोर्ट के युवा अधिवक्ता ठाकुर निश्चय सिंह ने Machagora Dam (Pench Thermal Power Project) से प्रभावित 31 गांवों के 5,500 से अधिक परिवारों के पक्ष में कानूनी मोर्चा संभालने की घोषणा की। वर्ष 1984-85 में Machagora Dam के लिए करीब 5,607 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहित की गई थी, जिसके कारण लगभग 2,572 परिवार (करीब 9,580 लोग) विस्थापित हुए थे। प्रभावित ग्रामीणों का आरोप है कि उन्हें अब तक न मुआवज़ा मिला, न पुनर्वास योजना का लाभ मिला और न ही सरकारी नौकरी या भूमि देने के वादे पूरे किए गए। इन्हीं समस्याओं को लेकर आज छिंदवाड़ा में आयोजित एक विशेष किसान सम्मेलन में 100 से अधिक किसानों ने अपनी पीड़ा अधिवक्ता ठाकुर निश्चय सिंह के समक्ष साझा की। ठाकुर निश्चय सिंह ने इस दौरान अपनी 10 सदस्यीय कानूनी टीम के साथ दस्तावेजों का गहन अवलोकन किया।

पाया कि पूर्व में कानूनी अनभिज्ञता और भ्रामक सलाह के चलते किसान वर्षों तक गुमराह होते रहे। सभा को संबोधित करते हुए ठाकुर निश्चय सिंह ने कहा "यह केवल भूमि अधिग्रहण का नहीं, बल्कि न्याय और मानवाधिकारों का सवाल है। अब समय आ गया है कि संविधान की ताकत से इन आवाज़ों को सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचाया जाए।" उन्होंने घोषणा की कि वह इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में नई रिट याचिका दायर करेंगे, जिसमें भूमि अधिग्रहण अधिनियम, 2013 के तहत मुआवज़ा, पुनर्वास, रोजगार और अधिग्रहण अधिकारों की मांग की जाएगी। विशेष बात यह रही कि उन्होंने इस पूरे मामले को नि:शुल्क (Pro Bono) लड़ने की घोषणा की, जिससे किसानों को कानूनी रूप से सशक्त किया जा सके। सभा में उपस्थित ग्रामीणों ने इसे “नई उम्मीद की किरण” बताते हुए आभार जताया और कहा कि पहली बार कोई सुप्रीम कोर्ट अधिवक्ता नि:स्वार्थ भाव से उनकी लड़ाई लड़ने के लिए आगे आया है।

सच्चाई की दो पंक्तियां:
Pench परियोजना (Machagora Dam) के लिए छिंदवाड़ा जिले में 5,607 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण किया गया, जिससे 2,572 परिवार विस्थापित हुए।
प्रभावितों को न मुआवज़ा मिला, न पुनर्वास योजना, न ही रोजगार से जुड़े वादे पूरे हुए।
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