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New Delhi: नीतीश कुमार की इफ्तार पार्टी का बहिष्कार सही कदम, मगर अधूरा: अधिवक्ता एडवोकेट इरशाद अहमद

Admindelhi1
24 March 2025 1:04 PM IST
New Delhi: नीतीश कुमार की इफ्तार पार्टी का बहिष्कार सही कदम, मगर अधूरा: अधिवक्ता एडवोकेट इरशाद अहमद
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नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता एडवोकेट इरशाद अहमद ने अपने एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि इमारत-ए-शरिया, जमीयत उलेमा-एहिंद, मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड और अन्य मुस्लिम संगठनों द्वारा नीतीश कुमार की इफ्तार पार्टी के बहिष्कार का निर्णय बिल्कुल सही और स्वागत योग्य है। लेकिन सवाल यह है कि जब विरोध करना है, तो वह अधूरा क्यों? अगर वाकई में नीतीश कुमार की नीतियों और उनके वक्फ संशोधन बिल पर रुख का विरोध करना है, तो फिर जनता दल (यूनाइटेड) में मौजूद उनके मुस्लिम चेहरे, विशेष रूप से खालिद अनवर, से भी जवाबदेही तय करनी होगी।

यह कोई छिपा हुआ सच नहीं है कि खालिद अनवर को दो बार एमएलसी बनवाने में इमारत-ए-शरिया और मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के जिम्मेदार पदाधिकारियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। जब यही संगठन अब नीतीश कुमार का विरोध कर रहे हैं, तो वे खालिद अनवर का इस्तीफा क्यों नहीं मांग रहे? यह वही खालिद अनवर हैं जिन्होंने पहली बार एमएलसी बनने के लिए मुस्लिम समाज की सियासी ताकत को सत्ता के हाथों गिरवी रख दिया था। दूसरी बार भी उन्होंने सत्ता में अपनी जगह पक्की करने के लिए मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के प्रमुख मौलाना खालिद सैफुल्लाह साहब को अपने घर बुलाकरदावतेंदीं, ताकि यह संदेश जाए कि मुसलमान अब भी जेडीयू के साथ हैं।

अगर वाकई इमारत-ए-शरिया और अन्य मुस्लिम संगठन नीतीश कुमार से नाराज हैं, तो उन्हें केवल इफ्तार के बहिष्कार तक सीमित नहीं रहना चाहिए। सच्चा विरोध तभी माना जाएगा, जब वे जनता दल (यूनाइटेड) के मुस्लिम नेताओं, खासकर खालिद अनवर के खिलाफ भीखुलकर आवाज उठाएं और उनका इस्तीफा सुनिश्चित करें। अगर ये संगठन वास्तव में वक्फ संशोधन बिल के खिलाफ हैं, तो उन्हें सबसे पहले अपने प्यादे खालिद अनवर को एमएलसी पद से इस्तीफा देने के लिए मजबूर करना चाहिए। तभी मुस्लिम समाज को यकीन होगा कि यह विरोध सिर्फ सियासी फायदे और दिखावे के लिए नहीं, बल्कि सच्चे हक और इंसाफ के लिए किया जा रहा है। अन्यथा, यही खालिद अनवर जैसे लोग फिर किसी नए सियासी सौदे के तहत मुस्लिम समाज की नुमाइंदगी का दिखावा करेंगे और सत्ता की गोद में बैठकर मुसलमानों के हक की आवाज को कुचलने का काम करेंगे।

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