
नई दिल्ली(आईएएनएस): जवाहरलाल नेहरू के लिए यह सोचना मुमकिन नहीं था कि रियासतें स्वतंत्र भारत की सीमा से बाहर रहेंगी। वह भारतीय रियासतों के राजाओं को ब्रिटिश शासन के साथ संबधों के बारे में सोच भी नहीं सकते थे। उन्हें किसी बाहरी सत्ता के प्रति निष्ठा रखने या बिटिश शासन के साथ कोई प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष संबंध रखने की अनुमति नहीं दी जा सकती थी, क्योंकि इससे स्वतंत्र भारत की आंतरिक सुरक्षा खतरे में पड़ जाती और राष्ट्र का विकास भी प्रभावित हो सकता था। देश के नेहरूवादी आदर्श की आधारशिला यह थी कि एकीकरण की प्रक्रिया शुरू होने पर रियासतों की सांस्कृतिक और भाषाई निकटता को एक दूसरे के साथ या आसपास की इकाइयों के साथ सबसे ऊपर रखा जाएगा। नेहरू ब्रिटिश राजशाही व्यवस्था और भारत में चैंबर ऑफ प्रिंसेस के साथ इसके संबंधों से घृणा करते थे।
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