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Chandigarh चंडीगढ़: शहर को 15 वर्षों तक दहशत में रखने वाली भयावह अपराध श्रृंखला का खुलासा आखिरकार हो गया। चंडीगढ़ जिला अदालत ने सेक्टर 38 वेस्ट की शाहपुर कॉलोनी निवासी 38 वर्षीय टैक्सी ड्राइवर मोनू कुमार को तीन महिलाओं की हत्या और बलात्कार के मामले में दोषी करार दिया है। अदालत अब 28 नवंबर 2025 को सजा सुनाएगी, जिसमें उसे उम्रकैद या फांसी की सजा तक हो सकती है। मोनू कुमार नशे की गहरी लत में था और इसी लत की आड़ में वह जंगलनुमा सुनसान इलाकों में अकेली महिलाओं को निशाना बनाता था। वह किसी भी तरह का मोबाइल फोन, आधार या बैंक खाता इस्तेमाल नहीं करता था, जिससे पुलिस को सालों तक कोई डिजिटल सुराग नहीं मिला। लेकिन उसने एक गलती कर दी—उसने अपने पीड़ितों के कपड़ों और शरीर पर डीएनए के निशान छोड़ दिए, जो अंततः उसकी गिरफ्तारी का आधार बने।
इस कहानी की शुरुआत 30 जुलाई 2010 से होती है, जब 21 वर्षीय एमबीए छात्रा नेहा अहलावत घर से अंग्रेजी बोलने की क्लास के लिए निकली थीं। उसी रात भारी बारिश में उनका अर्धनग्न शव करन टैक्सी स्टैंड के पास झाड़ियों में मिला। गला घोंटकर हत्या और दुष्कर्म की पुष्टि हुई थी, लेकिन कोई सुराग नहीं मिल पाया। यह केस 2020 में बंद कर दिया गया, लेकिन डीएनए नमूने सुरक्षित रखे गए। इसी तरह के दो और मामले चंडीगढ़ के जंगल क्षेत्रों में सामने आए। तीनों महिलाओं पर हमला, बारिश के मौसम, गला घोंटना—सबमें समान पैटर्न था। तीनों घटनाओं में मिला डीएनए एक ही व्यक्ति का था, लेकिन पहचान नहीं हो पा रही थी।
2022 में जांच में नया मोड़ आया, जब एक और महिला का शव मिला और डीएनए फिर वही निकला। पुलिस ने इसके बाद 2023 में एक बड़ा कदम उठाया—प्रशासन के साथ मिलकर रक्तदान शिविर आयोजित किया और अनुमति लेकर सैंपल लिए गए। एफएसएल ने सैकड़ों नमूनों की तुलना शुरू की, तभी अपराधी ने तीसरी वारदात कर दी। इस बार पीड़िता थीं मोहाली निवासी शनीचरा देवी। आरोपी ने पहले की तरह हमला किया, शव सेक्टर 54 के जंगल में फेंक दिया। रेप का प्रयास असफल रहा, लेकिन डीएनए के अंश उनके कपड़ों से मिले और तुरंत पहले के मामलों से मैच हो गए।
जांच ने मोनू कुमार तक रास्ता बना दिया। वह अमृतसर भाग गया था, लेकिन 6 मई 2024 को लौटते ही पकड़ा गया। पहले उसने सब कुछ नकार दिया, लेकिन जब डीएनए मैच का सामना कराया गया, तो उसने तीनों हत्याओं को स्वीकार कर लिया। उसके मोबाइल की लोकेशन भी तीसरी वारदात वाली जगह से मेल खाती पाई गई। एसएसपी कनवदीप कौर की अगुवाई में बनी एसआईटी ने इस जांच को अंजाम दिया। टीम ने 100 से ज्यादा डीएनए सैंपल जांचे और हर सुराग पर महीनों तक काम किया। पुलिस का यह भी अनुमान है कि मोनू ने पड़ोसी राज्यों में भी अपराध किए हो सकते हैं। नेहा अहलावत का परिवार, जिसने 15 साल तक न्याय का इंतजार किया, अदालत में फैसला सुनते ही भावुक हो उठा। कई वर्षों के बाद पहली बार उन्हें राहत मिली। यह मामला साबित करता है कि अपराध कितना भी पुराना या चतुराई से छुपाया गया हो, डीएनए कभी झूठ नहीं बोलता।
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