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लापरवाही
Rajasthan राजस्थान। जोधपुर स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) में चिकित्सा लापरवाही का एक गंभीर मामला सामने आया है। अस्पताल में इलाज के दौरान एक ही नाम के दो मरीजों में भ्रम के कारण जूनियर डॉक्टर ने गलत मरीज को खून चढ़ा दिया, जिससे 50 वर्षीय मांगीलाल की मौत हो गई। यह घटना अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में 11 अक्टूबर को हुई थी। घटना के अनुसार, AIIMS में मांगीलाल नामक मरीज का इलाज चल रहा था। इसी नाम के एक और मरीज का भी उसी दिन अस्पताल में इलाज जारी था। जूनियर डॉक्टर ने मरीज की पहचान में त्रुटि करते हुए खून चढ़ा दिया, जो सही मरीज के लिए निर्धारित नहीं था। इससे मांगीलाल की हालत अचानक गंभीर हो गई। इस दौरान सीनियर डॉक्टरों ने देखा और तुरंत खून चढ़वाना रोक दिया, लेकिन तब तक देर हो चुकी थी और मरीज की मौत हो गई।
मृतक के परिजन ने अस्पताल प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए और अस्पताल परिसर में ही धरने पर बैठ गए। परिजनों ने बताया कि इस तरह की लापरवाही न केवल उनके प्रियजन की जान ले गई बल्कि अस्पताल की सुरक्षा और प्रोटोकॉल पर सवाल खड़ा करती है। उन्होंने तुरंत दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। AIIMS जोधपुर के अधिकारियों ने मामले की पुष्टि की है और बताया कि घटना की जांच शुरू कर दी गई है। अस्पताल प्रशासन ने कहा कि जूनियर डॉक्टर की गलती से यह घटना हुई, और सीनियर डॉक्टरों ने उसे देर से पकड़ा। इस मामले में संबंधित डॉक्टरों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में मरीज की पहचान और ब्लड ट्रांसफ्यूजन के प्रोटोकॉल का सख्त पालन अनिवार्य है। अस्पताल में दो या अधिक मरीजों के नाम एक जैसे होने पर भी स्पष्ट पहचान और दस्तावेज़ी प्रमाण सुनिश्चित किए जाने चाहिए। विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की गलती से गंभीर स्वास्थ्य और जानलेवा परिणाम हो सकते हैं। AIIMS जोधपुर में यह मामला न केवल चिकित्सा लापरवाही को उजागर करता है बल्कि पूरे स्वास्थ्य प्रणाली में सुरक्षा और निगरानी की आवश्यकता पर भी ध्यान खींचता है। अस्पताल प्रशासन ने मृतक परिवार से मुलाकात की और उन्हें आश्वासन दिया कि घटना की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
मृतक मांगीलाल के परिजन ने मीडिया से बातचीत में कहा कि उनका परिवार सदमे में है और अस्पताल में इस तरह की लापरवाही से वे बेहद दुखी हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अस्पताल प्रशासन को सुनिश्चित करना चाहिए कि भविष्य में इस तरह की गलती दोबारा न हो। इस घटना ने पूरे राजस्थान में चिकित्सा संस्थानों में खून चढ़ाने और मरीज की पहचान के मानकों पर बहस को बढ़ा दिया है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ और नागरिक दोनों ही चाहते हैं कि अस्पताल में सुरक्षा और प्रोटोकॉल को और मजबूत किया जाए ताकि किसी अन्य मरीज की जान खतरे में न पड़े। इस प्रकार, AIIMS जोधपुर में हुई यह घटना चिकित्सा प्रणाली की गंभीर लापरवाही और सुरक्षा मानकों की अनदेखी को उजागर करती है। मृतक परिवार और समाज दोनों ही न्याय की मांग कर रहे हैं और प्रशासन पर दबाव बना रहे हैं कि दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।
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